Saturday, February 14, 2026
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कोरोना महामारी से हो रही मृत्यु दर में लाये कमी: डीएम

  • मरीज के तीमारदारों व परिवारजनों को दें मरीज का हेल्थ अपडेट
  • प्रभावी ढंग से हो काॅन्टेक्ट टेस्टिंग, कंटेनमेंट जोन में बैरिकेडिंग की जाये
  • मरीज से फोन कर जाने उसका हाल, लें अस्पताल व फैसीलिटी का फीडबैक: के. बालाजी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिलाधिकारी के बालाजी ने बचत भवन में कोरोना महामारी के प्रभावी नियंत्रण के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी व अन्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक की। जिलाधिकारी ने कंटेनमेंट जोन, काॅन्टेक्ट ट्रेसिंग, बेड व आक्सीजन सिलेण्डर की उपलब्धता, डोर टू डोर सर्वे आदि की जानकारी ली।

उन्होने कहा कि कोरोना महामारी के कारण हो रही मृत्यु दर में कमी लायी जाये। कंटेनमेंट जोन में बैरिकेडिंग की जाये व काॅन्टेक्ट ट्रेसिंग को प्रभावी ढंग से किया जाये।

जिलाधिकारी ने कहा कि कोरोना धनात्मक मरीज मिलने के बाद बनाये गये कंटेनमेंट जोन में डोर-टू-डोर सर्वे अभियान प्रभावी ढंग से किया जाये तथा उसमें एक्टिव केस सर्च का कार्य 48 घंटे में पूर्ण किया जाये। उन्होने कहा कि प्राईवेट अस्पतालों में दिये जा रहे उपचार की समीक्षा की जाये तथा कहा कि प्राईवेट अस्पताल सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही चार्ज करें यह सुनिश्चित किया जाये।

जिलाधिकारी के बालाजी ने जनपद में संचालित एल-1, एल-2 व एल-3 अस्पतालों की जानकारी ली तथा आईसीयू बेड व बेड की उपलब्धता की जानकारी ली तथा आक्सीजन सिलेण्डर की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होने कहा कि बेड व आक्सीजन सिलेण्डर की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होने कहा कि मरीजों से निरंतर संपर्क में रहा जाये तथा उनका फीडबैक लिया जाये साथ ही उनके तीमारदारों व परिवारजनों को मरीज का हैल्थ अपडेट दिया जाये।

जिलाधिकारी के. बालाजी ने कहा कि इन्टीग्रेटेड कमाण्ड एंड कंट्रोल सेन्टर प्रभावी ढंग से कार्य करें यह सुनिष्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम से कोविड अस्पतालों में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से वहां की निगरानी की जाये। मरीजों को अच्छा उपचार, भोजन व वातावरण मिले यह सुनिष्चित किया जाये।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजकुमार ने बताया कि जनपद में वर्तमान में करीब 800 कंटेनमेंट जोन है। उन्होने बताया कि किसी क्षेत्र में एक मरीज मिलने पर उसके आसपास के 100 मीटर के एरिया को कंटेनमेंट जोन बनाया जाता है तथा एक से अधिक मरीज मिलने पर 250 मीटर के एरिया को कंटेनमेंट जोन बनाया जाता है। उन्होने बताया कि कंटेनमेंट जोन में घर-घर सर्वे अभियान चलाया जाता है तथा 48 घंटे में एक्टिव केस सर्च करना होता है। उन्होने रैपिड रेस्पाॅन्स टीम आदि की जानकारी जिलाधिकारी को दी।

इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 पूजा शर्मा सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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