Saturday, April 11, 2026
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स्मार्ट सिटी का मुंह चिढ़ा रहा क्षतिग्रस्त डिवाइडर, जिम्मेदार अनजान

  • भैंसाली बस अड्डे के सामने क्षतिग्रस्त डिवाइडर दे रहा हादसों को न्योता
  • डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर न लगे होने के कारण शहर में बढ़ रही दुर्घटनाएं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्रांतिधरा को सुंदर बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। सुंदर शहर बनाने की योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। बड़े-बड़े कार्यक्रमों से बड़े-बड़े वादे व दावे सुंदर शहर के लिये किये गये हैं। प्रशासन कई कार्यक्रमों के माध्यम से स्वच्छ व सुंंदर मेरठ शहर की बात करता है, लेकिन वर्तमान हालातों पर किसी का ध्यान नहीं है। हमें भविष्य की योजनाओं को बनाने के साथ-साथ शहर के वर्तमान हालातों का भी ध्यान रखना चाहिये, जिससे आमजन को रोज-रोज जूझना पड़ता है।

हम बात कर रहे हैं शहर की यातायात व्यवस्था के दौरान डिवाइडरों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे उन आमजनों की जो शहर की सड़कों के बीचों बीच इसलिये निर्मित किये गये हैं, ताकि सुलभ और सुरक्षित यातायात जनमानस को उपलब्ध हो सके, लेकिन शहर के अतिव्यस्तम इलाके भैंसाली बस अड्डे के सामने बना डिवाइडर क्षतिग्रस्त हालत में स्मार्ट सिटी की पोल खोलने के लिए काफी है।

यह क्षतिग्रस्त डिवाइडर न केवल नगर निगम की पोल खोल रहा हैें, बल्कि वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। इस क्षतिग्रस्त डिवाइडर पर न तो रेडियम पट्टिका लगाई गई है। जिससे यह डिवाइडर और भी अधिक भयावह हो गया है। न कि इसलिये कि ये डिवाइडर किसी के लिये जानलेवा बन जायें। अक्सर हमने व आपने देखा होगा कि जिन शहरों में सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर बनाये जाते हैं। उनके रखरखाव व उनका सही ढंग से प्रबंधन का जिम्मा भी नगर निगम का होता है।

समय-समय पर उनकी रंगाई-पुताई किया जाना। उन पर रेडियम पट्टिका लगी होना ताकि रात के समय लाइट न होने के बावजूद गाड़ी की रोशनी पड़ने पर वह वाहन चालक को स्पष्ट नजर आ सकें। नगर निगम में शहर के मेन्टीनेंस के नाम पर लाखों करोड़ों रुपया की राशि शासन-प्रशासन द्वारा भेजी जाती है। बावजूद इसके शहर के इन डिवाइडरों की हालत बद से बदतर स्थिति में पहुंच चुकी है।

सड़क के गड्ढों से खुद को बचाते हैं तो डिवाइडर मुसीबत बन जाता है एक तो मेरठ शहर की गड्ढेदार सड़कें और ऊपर से बिना रंग-रोगन के रात के अंधेरे में नजर न आने वाले जर्जर व्यवस्था में बने सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर वाहन चालक के लिये परेशानी का सबब तब बन जाता है, जब वाहन चालक अपनी गाड़ी को गहरे गड्ढे में जाने से बचाने का प्रयास करता है।

ऐसे में चूंकि सड़क के डिवाइडरों पर ना तो रंग रोगन है और ना ही रेडियम पट्टिका या किसी प्रकार का संकेत, ऊपर से यदि खराब मौसम या किसी अन्य कारण से सड़क की बिजली गुम हो जाये तो इस डिवाइडर से गाड़ी का टकराना स्वाभाविक हो जाता है। नतीजतन कई लोगों को ऐसे हालातों में डिवाइडरों से दुर्घटनाग्रस्त होते देखा गया है।

डिवाइडरों से रिफ्लेक्टर गायब

शहर में बने डिवाइडरों पर रिफ्लेक्टर न लगे होने के कारण आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। बढ़ते हादसे देखते हुए कई बार विभाग ने रिफ्लेक्टर लगाए है, लेकिन वह भी दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ गए। उसके बाद विभाग ने रिफ्लेक्टर नहीं लगाए। शहर की दिल्ली रोड पर भैंसाली बस अड्डे के सामने बनाए गए डिवाइडर से रेडियम रिफ्लेक्टर पूरी तरह गायब हो चुके हैं। इस कारण रात के समय वाहन सवारों को यह डिवाइडर नजर नहीं आता। नतीजा अक्सर हादसे हो जाते हैं। रिफलेक्टर नहीं लगाए जाने से डिवाइडर दिखाई नहीं देता है और गाड़ियां डिवाइडर पर चढ़ जाती हैं। शहर के मुख्य मार्गों में भी रिफलेक्टर नहीं हैं।

सुरक्षा की अनदेखी

रैपिड रेल निर्माण कार्य के चलते शहर में भारी वाहनों का दबाव होने के बाद भी यहां पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। भैंसाली बस अड्डे पर डिवाइडर है, लेकिन नजर नहीं आता है। ट्रैफिक पुलिस ने भी यहां पर रेडियम और सिग्नल नहीं लगाए हैं। स्ट्रीट लाइट की रोशनी बेहद कम रहती है। न तो रात में गड्ढे नजर आते और न ही डिवाइडर दिखता है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

रोशनी पड़ने पर होता है रिफलेक्ट

डिवाइडर में रेडियम, डेलिनेटर या आई कैट जैसे रिफलेक्टर लगाने से रात में डिवाइडर दिखाई देता है। यह डिवाइडर होने के संकेत है। अंधेरे में जब गाड़ी की लाइट इन पर पड़ती है तो रिफलेक्ट होती है। इससे चालक को समझ आ जाता है कि सामने डिवाइडर है। यहां तक डिवाइर के बीच-बीच में भी इसे लगाने का नियम है, ताकि कोई गाड़ी डिवाइडर से न टकराए।

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