Sunday, February 8, 2026
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खतरा: 10 प्रदूषित शहरों में शामिल अपना शहर

  • तमाम उपायों के बाद भी कम नहींं हो रहा प्रदूषण
  • कंस्ट्रक्शन के कारण लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: शहर में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण निर्माण कार्यों पर रोक नहीं लगना है। अपना शहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। इसके चलते प्रशासन ने निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है, लेकिन यह रोक सिर्फ कागजी है। जमीनी हकीकत इसके ठीक उल्टी है। जिले में कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। इनके चलते प्रदूषण का स्तर घटने की बजाय लगातार बढ़ रहा है।

महानगर में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। प्रदूषण के स्तर को रोकने के लिए तमाम उपाय कर लिए गए हैं, लेकिन उसके बाद अभी तक प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई है। हालांकि तेज हवाओं के चलने से प्रदूषण के कम होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन उसके बाद भी शहर के प्रदूषण में कमी नहीं हुई है। कंस्ट्रक्शन होने के कारण शहर में ज्यादा प्रदूषण बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में तो स्थिति और भी ज्यादा भयंकर हो जाएगी। क्योंकि गर्मी का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में प्रदूषण की स्थिति और विकट होने की संभावना है।

प्रदूषण की रोकथाम के लिए तमाम तरह के दावे मेरठ महानगर में किए जाते हैं, लेकिन यह दावे सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाते हैं। क्योंकि अगर आंकड़ों पर नजर डाले तो उससे साफ जाहिर होता है कि यहां सिर्फ दावे किए जाते हैं। धरातल पर तस्वीर कुछ और ही है। क्योंकि मेरठ महानगर में अगर सबसे ज्यादा प्रदूषण की स्थिति खराब है तो वह जयभीमनगर और दूसरे स्थान पर पल्लवपुरम आता है। क्योंकि यहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पहले ही मेरठ शहर को देश के 10 प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल कर रखा है। यहां प्रदूषण की रोकथाम के लिए दावे तो हर बार प्रदूषण विभाग से लेकर जन जागरूक लोगों करते हैं, लेकिन यह दावे सिर्फ कागजों तक ही रह जाते हैं।

मिक्चर प्लांट से उड़ रही धूल और धुआं

शहर में बदहाल पड़ी सड़कों और रैपिड रेल के निर्माण का काम चल रहा है। इसके चलते यहां मिक्चर प्लांट लगाए गए हैं। इनमें लगातार निर्माण सामग्री मिलाने का काम चलता है। इससे बड़ी-बड़ी मशीन चलती हैं। इसके चलते जहां निर्माण सामग्री से धूल उड़ती है, वहीं मशीन चलने से धुआं भी निकलता है।

सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हुए

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लागू किए गए सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। सड़कों पर धुआं उगलते वाहनों की संख्या कम नहीं हो रही है। कूड़े के ढेर में जगह-जगह आग लगाई जा रही है। विभाग निर्माण कार्यों पर निगरानी का दावा कर रहा है, लेकिन कंस्ट्रक्शन मटीरियल अब भी खुले में पड़े हुए हैं।

कंस्ट्रक्शन के काम खुले

शहर में कंस्ट्रक्शन के कार्यों को खोलने का निर्णय लिया गया है। अधिकारी मॉनिटरिंग सख्त रखेंगे। धूल नियंत्रण की गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करना है। नियमों का पालन न करने वालों पर पेनाल्टी लगाई जाएगी बाद में नोटिस जारी किया जाएगा। मजदूरों को हो रही दिक्कतों के चलते कंस्ट्रक्शन कार्यों को खोला जा रहा है।

प्रदूषण रोकथाम की जाएगी मॉनिटीरिंग

शहर में प्रदूषण की रोकथाम करने के लिए विभाग द्वारा तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। हाइवे पर जो कंस्ट्रक्शन का काम हो रहा है। उसकी विभाग द्वारा मॉनिटीरिंग की जा रही है। ऐसे विभागों को नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। महानगर में शहर की स्थिति को रोकने के लिए तमाम तरह के प्रयास विभाग द्वारा किए जा रहे हैं।
-डा. योगेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी

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