जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: रात के करीब दो बज रहे थे जब गाजियाबाद की ‘भारत सिटी सोसाइटी’ की नौवीं मंजिल पर एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी, जो एक बड़े तूफान का संकेत दे रही थी। तीन बहनें—12 साल की पाखी, 14 साल की प्राची और 16 साल की विशिका अपने कमरे में बैठी थीं। बाहर की दुनिया सो रही थी, लेकिन इन तीनों के मन में एक मोबाइल गेम का नशा सिर चढ़कर बोल रहा था। अचानक, तीनों बहनें एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बालकनी की ओर बढ़ीं और बिना किसी हिचकिचाहट के नीचे कूद पड़ीं। अगले दिन सुबह तक, यह घटना पूरे इलाके को हिला कर रख चुकी थी। जब पुलिस ने उनके कमरे की तलाशी ली, तो वहां एक सुसाइड नोट मिला, जो सबको स्तब्ध कर गया। उस नोट में लिखा था, “मम्मी-पापा सॉरी… गेम नहीं छोड़ पा रही हूं। अब आपको एहसास होगा कि हम गेम से कितना प्यार करते थे, जिसे आप छुड़वाना चाहते थे।” पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि तीनों बहनें एक “कोरियन लव गेम” की शिकार थीं।
गेम की लत का खतरनाक प्रभाव
परिजनों के मुताबिक, ये तीनों बहनें बेहद घुली-मिली थीं। वे साथ में खातीं, सोतीं और एक-दूसरे का सहारा बनकर रहती थीं। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया ऑनलाइन हुई, तो इन बच्चियों के हाथों में मोबाइल फोन आ गया। धीरे-धीरे वे पढ़ाई और बाहरी दुनिया से कटने लगीं और दिनभर मोबाइल पर खेली जाने वाली गेम्स में व्यस्त हो गईं। पिता ने कई बार उनके फोन छीनने और गेम हटाने की कोशिश की, लेकिन लत इतनी गहरी हो चुकी थी कि उन्हें रोकना नामुमकिन हो गया। इन बहनों ने स्कूल जाना भी बंद कर दिया और उनकी दुनिया उस रहस्यमयी गेम के चारों ओर घूमने लगी।
‘कोरियन लव गेम’
यह कोई साधारण गेम नहीं था। यह एक चैट आधारित गेम था, जिसमें सामने वाला व्यक्ति खुद को कोरियाई लड़का या लड़की बता कर बातचीत शुरू करता था। इस गेम में कोरियन संस्कृति, K-पॉप और K-ड्रामा की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठाया जाता था। धीरे-धीरे यह चैट रोमांस में बदल जाती, जिसमें खिलाड़ी को अपने काल्पनिक प्रेमी या प्रेमिका के प्रति प्रेम साबित करने के लिए कई टास्क पूरे करने होते थे। शुरुआत में ये टास्क साधारण होते थे, लेकिन जैसे-जैसे गेम बढ़ता गया, वे खतरनाक होते गए। अंत में खिलाड़ी को खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए कहा जाता और फिर मौत को गले लगाने का टास्क दिया जाता।
‘ब्लू व्हेल’ जैसा खतरनाक खेल
यह गेम किसी भी एप स्टोर पर उपलब्ध नहीं था, लेकिन फिर भी लोग इसे गुप्त लिंक और वेबसाइट्स से डाउनलोड कर खेल रहे थे। पुलिस जांच में यह भी आशंका जताई गई कि यह गेम पुराने ‘ब्लू व्हेल’ गेम जैसा हो सकता है, जिसमें 50 टास्क दिए जाते थे और 50वें टास्क में आत्महत्या करने को कहा जाता था। भारत सरकार ने 2017 में ‘ब्लू व्हेल’ गेम को बैन कर दिया था, लेकिन गाजियाबाद की इस घटना में तीनों बहनें इतनी गहरे तरीके से इस गेम में फंस चुकी थीं कि वे एक साथ अपना जीवन समाप्त करने को तैयार हो गईं। वे इस वर्चुअल दुनिया के मायाजाल में इस कदर उलझ चुकी थीं कि उन्हें अपनी जान की अहमियत नहीं रही। अब गाजियाबाद पुलिस मोबाइल फोन्स की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि गेम के नाम और उसमें दिए गए खतरनाक टास्क का पता लगाया जा सके।
बच्चों को इस खतरनाक गेम से कैसे बचाएं?
कई बार बच्चों के माता-पिता से दूर होने के कारण वे वर्चुअल रिश्तों में असली प्यार खोजने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब बच्चे इस तरह के गेम्स में भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं, तो वे सही-गलत का फर्क करना छोड़ देते हैं और हर टास्क को पूरा करने की चिंता करने लगते हैं। इस गेम में अनजान लोग बच्चों से चैटबॉट्स या मैसेजिंग एप के जरिए जुड़ते हैं, और चूंकि यह गेम प्यार और जज्बात की बातें करता है, किशोर उम्र के बच्चे इसे आसानी से अपना लेते हैं।
यह घटना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि ऑनलाइन एडिक्शन केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है। बच्चों को इस तरह के गेम्स से बचाने के लिए माता-पिता को उनकी डिजिटल गतिविधियों और उनके व्यवहार में हो रहे बदलावों पर करीबी नजर रखनी होगी, ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझ जाए।

