Sunday, February 15, 2026
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इंसानों का कुत्तापना और कुत्तों का इंसानपना

Ravivani 33


डॉ. प्रेमचंद द्वितीय |

खबर है कि झारखंड के जमशेदपुर में कुत्तों को बड़ा सम्मान मिलने का एकमात्र स्थान है। वहां पर कुत्तों की यादों को सहजने के लिए कुत्तों का एक स्मारक स्थल है। जहां बहादुर कुत्तों की मौत के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक दफन किया जाता है, यही नहीं उनकी कब्रों पर बहादुरी की इबारत भी लिखी जाती है।

जब कुत्तों के स्मारक बनने की खबर मोहल्ले के कुत्तों को लगी तो मोहल्ले के कुत्तों ने हर्ष जताया और उनकी कौम के कुत्तों के स्मारक बनाने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुत्तों की आयोजित आभार सभा की अध्यक्षता मोहल्ले के वयोवृद्ध झामरिया कुत्ते ने की। सभा में सबसे पहले नवजात कुरकुरिए ने जो ठंड की रात मे लीला काकी द्वारा पहनाई पुराने कपड़ों की ड्रेस और उन्हीं के हाथ से दूध पीकर बड़ा हो रहा था बोला, वफादारी का मैं नौसिखिया पिल्ला हंू। आवारा कुत्ते की गिनती में कुछ महीनों बाद शामिल हो जाऊंगा। वफादारी सीख रहा हूं, लेकिन जहां कुत्तों का स्मारक बना है, उसमें अलसेशन नस्ल के कुत्ते को दफनाया है। हम आवारा श्रेणी के कुत्तों का स्मारक तो ठीक स्मारक तक नहीं देखने देते हैं। ऐसे में आभार मानना है तो मान लो, पर जिन्होंने डॉग कनोल बनाई है, उन्हें यह संदेश जरूर पहुंचाएं कि इंसानों की बिरादरी को पिछड़े, दलित, सवणों को लेकर बांटा जा रहा है। कम से कम हम कुत्तों पर रहम करें और नस्लों में भेद करना भूलें।

नस्लो के भेद पर नवजात कुरकुरिए के संवाद सुनकर मोहल्ले का सबके प्यारा युवा काला कुत्ता बोला, हम दिन रात मोहल्ले में सुरक्षा करते हैं। रात में नए नए चोर उचक्के आते हैं तो हम भौंकते हैं। भौंकने पर रामू चाचा, दगड़ू सेठ, आला बाबू जग जाते हैं और सुबह मेरे साथ खेलते हुए कहते हैं कि यह युवा काला कुत्ता ना होता तो मोहल्ला अ सुरक्षित हो जाता। उसका भौंकना और उससे हमारा जगना और चोरों को भागना इस युवा कुत्ता की वजह से हुआ है। ऐसी सुरक्षा वाले काले कुत्ते की तारीफ पर सुभाष माड़साब का आधा पालतू आधा, आवारा कुत्ता अपनी बंदी रस्सी को तोड़ने के लिए आतुर हुआ तो सुभाष माड़साब ने उसको बोलने के लिए रस्सी से मुक्त कर दिया। वह जैसे ही मुक्त हुआ समीप खड़ी आॅडी महंगी कार पर खड़े खड़े लघु शंका से निवृत हुआ और बोला इंसानों को तो सार्वजनिक युरिनल पर लाइन में खड़े रहना पड़ता है, हमारे पास करोड़ों वैल्यू की यूरिनल हैं। अपने आधा पालतू और आधे देसी व्यवहार को ध्यान में रखते हुए घर के वातावरण के अनुसार शिक्षाप्रद कुत्ता भाषण देने लगा, जब मैं पाला नहीं गया था, मैं सारे मोहल्ले की निगरानी में रहता था। जब पाल लिया गया तो तो मेरी निगरानी माड़ साब को करना पड़ती है।

माड़साब के जैकी की इंसानों की तरफदारी पर मोहल्ले से धूरधूर करने वाला मोती कुत्ता बीच मे खड़ा हो गया ओर बोला, इंसानों को तुम नहीं जानते हो। मैं कई मर्तबा दिन दिन भर भूखा रहता हूं। मेरी गलती इतनी हुई थी कि एक साहब की मेम के साथ साब का मुंह लगा पिल्ला था। उसका मैंने पीछा कर लिया। लेकिन मेरा पीछा किया जाना मेम साहब को अच्छा नही लगा। मेरे भांपने के संदेह ने मेरी रोटी छुड़ा दी और मोहल्ले की सभी मेमों द्वारा भी दुत्कारा जाने लगा। हमारी इसी अन्वेषी प्रवृति से नाराज मोहल्ले के लोग भी कुत्तेपने पर आ गए और स्मारक बनाने की बात तो दूर हो गई, वे मुझे कुत्ते की मौत मरने का इंतजार करने लगे।

मोती के संवेदना भरे वक्त्वय को सुनकर कालोनी के राजा बाबू के गेटकीपर का काम देख रहे भूरे कुत्ते ने अपना मुंह खोला, सभी एक जैसे नहीं होते हैं। मैं गेट में किसी को घुसने नहीं देता। लेकिन मेरी आवारा नस्ल होने से राजा बाबू ने आज तक मुझे घर मे इंट्री नहीं दी। वफदारी करने पर वे जरूर बेवफा नहीं हुए ,लेकिन हम कुत्ते हैं वो भी आवारा, हमसे वे कुत्तापना सीख गए। इस बीच पालतु कुत्तों के बारे में फालतु बयानबाजी करने वाले कुत्तों के समूह के बीच कालोनी का अलसेशन कुत्ता नित्यकर्म के लिए जाता दिखा तो सभी आवारा कुत्ते उस पर भौंकने लगे। अलसेशन पर रोष जाहिर करने वाले आवारा कुत्तों की भौं-भौं बंद करते हुए सभा के अध्यक्ष झामरिया कुत्ता खड़ा हुआ और बोला, इसी हरकत से तुम्हारे स्मारक नहीं बनते हैं। तुम लोग इमानदारी से वफादारी करते हो, लेकिन थोथा चना बाजे घना की तर्ज पर भौं-भौं करते हो। इस पर तुम्हारी वैल्यू नहीं है। इसलिए आज हम हमारी आवारा कुत्तों की नस्ल यह प्रस्ताव पास करती हैं कि हमारा दुरूपयोग न तो मोहल्ले वाले करें न ही कोई निजी व्यक्ति करे। हम ये भी प्रस्ताव पारित करते हैं कि स्मारक बनाने से लेकर कुत्तों को दी जाने वाली सुविधाओं में हमें सत्तर प्रतिशत आरक्षण मिले। और हमारे कुत्तेपने को इंसानों द्वारा लेने तथा हम कुत्तों द्वारा इंसानपना लेने पर अवार्ड से नवाजा जाए।


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