जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एमबीबीएस छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां पीड़िता के लिए न्याय की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर यह मामला सियासी तकरार का केंद्र बन चुका है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस गंभीर मामले को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर कई आरोप लगाए हैं, जिनमें अपराधियों को संरक्षण देने और पीड़ित पक्ष की अनदेखी करने के आरोप प्रमुख हैं।
“ममता सरकार बना रही है दबाव”
राज्य के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस को संबोधित करते हुए दावा किया कि दुर्गापुर कांड में पुलिस, प्रशासन और चिकित्सा संस्थान — तीनों ही सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद न तो मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही पीड़ित परिवार को उचित सहयोग मिला।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि “ममता सरकार का सारा तंत्र अपराधियों को बचाने में जुटा है। निजी मेडिकल कॉलेज ने भी मुझसे कहा कि वे भारी दबाव में हैं। यह दबाव ममता बनर्जी का है, ममता की पुलिस का है या ममता के गुंडों का?” —
“बंगाल बना अपराधियों का अड्डा”
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा कि इस एक घटना ने साबित कर दिया है कि पश्चिम बंगाल महिलाओं के लिए देश का सबसे असुरक्षित राज्य बन चुका है। उन्होंने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा “ममता सरकार अपराधियों को पनाह दे रही है। महिलाओं की सुरक्षा इस सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं है। संदेशखली हो या दुर्गापुर — हर बार सरकार की संवेदनहीनता सामने आई है।”
“टीएमसी की सोच ही पिछड़ी है”
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान पर गहरा आक्रोश जताया जिसमें उन्होंने छात्रा के देर रात हॉस्टल से बाहर निकलने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा “एक महिला मुख्यमंत्री जब यह कहे कि रात में लड़कियों को बाहर नहीं जाना चाहिए, तो वह अपराधियों को नहीं, बल्कि पीड़िता को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। ममता बनर्जी की यह मानसिकता दुखद और निंदनीय है।” बांसुरी स्वराज ने ममता बनर्जी के नारे ‘मां, माटी, मानुष’ पर भी तंज कसते हुए कहा कि अब ‘मां शर्मिंदा’, ‘माटी लहूलुहान’ और ‘मानुष बदहाल’ हैं।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन उनके बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा “घटना निंदनीय है, लेकिन छात्रा रात 12:30 बजे हॉस्टल से बाहर कैसे निकली? सभी छात्रों को भी अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। निजी कॉलेज की जिम्मेदारी है कि वो अपने छात्रों पर नजर रखें।” उनके इस बयान को लेकर विपक्ष का कहना है कि ममता सरकार पीड़िता की बजाय पीड़िता की परिस्थितियों पर सवाल उठा रही है।
आगे क्या?
घटना के बाद पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, और जांच जारी है। हालांकि, विपक्ष इस बात पर अडिग है कि जब तक ममता सरकार सत्ता में है, पीड़िता को न्याय नहीं मिल सकता। भाजपा ने इस मामले में केंद्रीय हस्तक्षेप और न्यायिक जांच की मांग की है।
यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था का ही नहीं, बल्कि ममता सरकार की राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी का भी सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

