- आशा हेल्थ वर्कर एसोसिएशन ने भेजा अपर मुख्य सचिव व मिशन निदेशक को पत्र
- नहीं मिल रहा बढ़ा हुआ मानदेय और कोविड भत्ता
जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ/गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गृह क्षेत्र गोरखपुर में पल्स पोलियो महाभियान का शुभारंभ करते हुए यह बात जोर देकर कही थी कि अब जाकर हमारे सूबे का स्वास्थ्य महकमा मजबूत होता दिख रहा है। निश्चित रूप से सूबे का वो मुखिया जो आगे भी पांच साल के लिये प्रदेश की सत्ता संभालने जा रहा हो, ऐसे में उसका यह कहना हमारे हेल्थ डिपार्टमेंट के लिए एक राहत भरी खबर हो सकती है।
मगर, जमीनी धरातल पर प्रदेश के सुदूर व ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत आशा बहुयों की हालत देखें तो आज भी वो कोविड काल में दिनरात ड्यूटी करने के बाद भत्ते के लिये इधर-उधर भटक रही हैं। जबकि सीएम योगी ने काफी पहले ही आशा बहुओं के अविलम्ब बढ़े हुए मानदेय व कोविड भत्ता को जारी करने का आदेश दे दिया था, लेकिन स्वास्थ्य महकमा सूबे के मुखिया की ही पूर्व की बातों को अनसुना कर दिया। अब आलम यह है कि यही आशा बहुएं फिर से सीएम योगी की तरफ आशा भरी निगाहों से टकटकी लगायी हुई हैं।
वहीं इस बाबत आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष कुसुम लता ने प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव तथा मिशन निदेशक को पत्र लिखकर आशाओं की समस्याओं से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप प्रदेश में कार्यरत आशा बहुओं के लिए 3500 रुपए प्रति माह का मानदेय तय किया गया था।
मार्च 2021 से अप्रैल 2022 तक 200 रुपया प्रति माह कोविड भत्ता भी देने का आदेश किया गया था, लेकिन आज तक प्रदेश के किसी भी जनपद में आशाओं को ना तो बढ़ा हुए कोविड भत्ते का भुगतान किया गया और ना ही 3500 प्रति माह तय किए गए मानदेय का ही भुगतान हुआ।
अध्यक्ष कुसुम लता यादव ने विभागीय अपर मुख्य सचिव एवं मिशन निदेशक का ध्यान आकर्षित करते हुए एक विस्तृत पत्र भेजा है। जिसमें उन्होंने अवगत कराया है कि केंद्रों पर आशाओं के साथ वाउचर्स का मनमानी ढंग से भुगतान किया जाता है। वाउचर के पूरे पैसों का भुगतान नहीं होता है।
उन्होंने आशाओं को मिलने वाली धनराशि का सीधे उनके खाते में भुगतान कराने की मांग की है। कुसुमलता ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी से प्रदेश की आशाओं को उनका मानदेय, कोविड भत्ता दिलाने तथा स्थानीय स्तर पर उनका शोषण रोकने में सहयोग करने की अपील किया है।

