- मटका मिट्टी से भरा हुआ था और इसका वजन करीब 60 किलो
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: महाभारत कालीन ऐतिहासिक तीर्थ नगरी स्थित उल्टा खेड़ा पांडव टीले पर चल रहे उत्खनन में सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मेरठ सर्किल की टीम ट्रायल टेंच दो में खुदाई के दौरान विशाल प्राचीन मटका मिला। जिसे कार्बन डेंटिंग के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। वहीं इसी टेंच में एक और रिंग वेल मिली है।
बता दे कि पुरातत्व विभाग की मेरठ सर्किल टीम द्वारा पांडवों की जन्म भूमि पांडव टीले पर पिछले करीब एक माह से भी ज्यादा समय से खुदाई कार्य चल रहा है। जिसमें अभी तक पुरातत्व विभाग की टीम को विभिन्न काल खंडों के विभिन्न अवशेष प्राप्त हुए हैं। जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। वहीं, सोमवार को खुदाई के दौरान अष्टापद के सामने और पुरातत्व विभाग कार्यालय के समीप लगाए गए एक ट्रेच से एक विशाल मटका प्राप्त हुआ है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जो मिट्टी से भरा हुआ था और इसका वजन करीब 60 किलो होगा। इसके साथ ही मटके के समीप एक प्राचीन रिंग वैल और, हड्डियों के अवशेष के साथ-साथ मृदभांड के अवशेष प्राप्त हुए हैं। वहीं, मटके के पास निकला अभी तक का तीसरा रिंग वेल है। इससे पहले भी पिछले सप्ताह दो रिंग वेल एक ही ट्रेच से निकले थे। पांडव टीले पर खुदाई के लिए पूर्व में तीन ट्रेच से लगाए गए थे।
उसके बाद प्राचीन अवशेष निकल के देख पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने दो नए ट्रेच और लगाए हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग ट्रेंच में अलग-अलग काल खंडों के प्रमाण पुरातत्व विभाग की टीम को मिल रहे हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी तक की गई खुदाई पांचवीं ईसा पूर्व शताब्दी पर पहुंच गई है।
वहीं, पांडव टीले की खुदाई में पुरातत्व विभाग की टीम को अभी तक 2200 से 2500 वर्ष तक के अवशेष प्राप्त होने की संभावना है। हालांकि सभी अवशेषों को कार्बन डेंटिंग और पुरातत्व विभाग की लैब के लिए सुरक्षित रखा गया है। वहीं, कई अवशेषों को जांच के लिए भेजा भी गया है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह कितने वर्षों पुराने हैं।

