Monday, February 9, 2026
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गेमिंग की लत युवाओं को पहुंचा रही मौत तक

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कौनसी तरकीब अपनाई जाए, जिससे बच्चें फिर से अपने पारंपरिक देशी किस्म के खेलकूदों की ओर मुड सकें। दरअसल, ऐसी जरूरत गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइट के बाद और ज्यादा महसूस होने लगी है। क्यों मॉडर्न बच्चे मैदानी खेलों को छोड़कर मोबाइल गेमिंग जैसी आफतों में घुसते जा रहे हैं। ऐसे सवालों का उत्तर बिना देर किए सामुहिक स्तर पर समाज के प्रत्येक वर्गों को खोजने की आवश्यकता है। टीनएजर्स में गेमिंग की लत जानलेवा बीमारी जैसी हो गई है, जिसका ताजातरीन उदाहरण गाजियाबाद की दुखद घटना सामने है। कोरियन गेमिंग की आड़ में गाजियाबाद की तीन सगी नाबालिग बहनों ने ह्यलवर गेम टास्कह्ण में खुद को फंसाकर मौत को गले लगाना पड़ा। उनके सुसाइड की खबर समाज में आग की तरह फैली हुई हैं। दरअसल तीनों बहनों ने मौत को जिस अंदाज से अपनाया उसने अभिभावकों को सबसे ज्यादा झकझोरा है। मृतकों ने अपने पिता के नाम चिट्ठी लिखकर मौत की वजह भी बताई। आठ पन्नों के सुसाइट में उन्होंने अपनी अधूरी चाहत की पूरी दास्तां को विस्तार से लिखा। ऐसी-ऐसी वजहें लिखीं, जिन्हें पढ़-सुनकर समाज सोचने पर विवश हुआ है।

घटना की शुरुआती पड़तालें बताती हैं कि गेम की गिरफत में तीनों बहनें ऐसी जकड़ी कि निकल ही नहीं पाई, निकलने की तमाम नाकाम कोशिशें जरूर की? लेकिन दलदल में इतनी फंस चुकी थी, वहां से निकला उनके लिए नामुकिन हो गया। अंत में तीनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला को समाप्त करना ही मुनासिब समझा। पुलिस घटना की तफ्तीश में है। मामला जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, नई-नई अचंभित करने वाली बातें सामने आ रही हैं। कुछ ऐसी भी बातें जिनपर एकाएक विश्वास करना मुस्किल है। पुलिस की थ्योरी और पड़ोसियों की माने तो तीनें लड़कियां चौबीसों घंटे गेंम में रहती थीं।

तीनों ही कोरियन लड़कों से शादी करने पर आमादा थी। गेमिंग के जरिए कोरियन कल्चर को उन्होंने अपने दिल-दिमाग में इस कदर बिठा हुआ था कि कोरिया के बिना उनका जीवन बेकार है। उनकी हरकतों से परिवार भी, बीते दो सालों से परेशान और चिंतित था। पिता ने तीनों से उनका मोबाइल भी छीन लिया था, जिसके चलते उन्होंने लड़ना-झगड़ा भी शुरू कर दिया था। इसके अलावा लड़कियां रोजाना अपने परिवार पर कोरिया ले जाने का दबाव भी डालने लगी थीं। सुसाइड में तीनों बहनों ने दुखभरी इमोजी भी बनाई, जिसमें पिता चेतन कुमार को ‘सॉरी पापा’ लिखकर, अंत में अलविदा शब्द भी लिखा।

इस झकझोर देने वाली घटना को ध्यान में रखकर ये समझा होगा कि आखिर कोरियाई कल्चर टीनएजर्स को क्यों लुभाने रहा है? दरअसल, कोरियाई कल्चर की कुछ खासियतें हैं। उनका आधुनिक ड्रामा और के-पॉप प्यार और पारिवारिक भावनाएं लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं। उनके अपनेपन से लोग आसानी से उनसे जुड़ जाते हैं। कोरिया की आधुनिक और पारंपरिक जीवनशैली, के-फूड, फैशन और के-ब्यूटी भी नवयुवाओं को खासा आकर्षित करती है। हिंदुस्तान में इस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कोरियन फिल्म, ड्रामा, सीरियल और मूवीज को खूब पसंद किए जा रहे हैं। इस सबसे बढ़कर नवाचर युवाओं पर उनका गेमिंग सेक्टर ज्यादा प्रभाव डाल रहा है। नवांकुर युवा होती जनरेशन पर आॅनलाइन गेमिंग के गहरे मानसिक असर से बचाने की बड़ी चुनौती सामने खड़ी हो गई है।

गाजियाबाद जैसी घटनाओं के चलते नाबालिगों का असमय चले जाना, अभिभावकों को भीतर तक आघात देता है। बदले युग की आधुनिक तस्वीरें निश्चित रूप से डरावनी हैं। मैदान, पार्क, खेलकूद की तमाम जगहें बच्चों के बिना सुने पड़े हैं। उन्हें छोड़कर बच्चें मोबाइलों में घुसे हैं। स्कूलों से आने के बाद बच्चे मोबाइल्स पर झपट्टा मारते हैं। इस दुखद घटना से हम सभी को सीखने की जरूरत है।

बिना किसी हस्तक्षेप के बच्चे इतने साल अपनी पढ़ाई को कैसे गंवा सकते हैं? क्या उन्हें कोई दिक्कत थी। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्याएं थीं। इसके अलावा कोई सामाजिक अलगाव या कुछ और समस्याएं थीं, जिस पर परिवार ने ध्यान नहीं दिया? इन सवालों के तय तक जांच-पड़ताल करने की जरूरत है। क्योंकि एकाएक गेम की लत के चलते तीनों का दुनिया छोड़ देना, गले नहीं उतरता? फिर अगर, मौत का कारण गेम है तो इतना समझ लेना चाहिए, इस समस्या ने सभी के दरवाजों पर दस्तक दे दी है। अपने बच्चों को कैसे बचाना है, ये खुद पर निर्भर करता है। क्योंकि हमारे देश में ऐसा संभव नहीं है कि आॅस्ट्रेलिया की भांति हमारे यहां भी 16 वर्ष तक के बच्चों को सोशल मीडिया पर बैन लग सकता है। ये अभिभावकों के लिए खुली चुनौती और चेतावनी जैसी है। ऐसी चेतावनी जो बच्चों को गेमिंग जैसी बीमारी से बचाने का आह्वान करती है। बच्चों पर निगरानी रखनी होगी।

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