Saturday, February 14, 2026
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गांधी की इच्छा

AMRITWANI


आजादी का जश्न हर साल हम धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन देश की आजादी के लिए अनशन को हथियार बनाने वाले राष्ट्रपति महात्मा गांधी स्वतंत्रता दिवस को कुछ अलग ही तरीके से मनाने का इच्छा रखते थे।

महात्मा गांधी ने यंग इंडिया नाम की मैगजीन में लिखे अपने लेख में स्वतंत्रता दिवस को मनाने के अपने तरीके की चर्चा की थी।

उन्होंने अपने लेख में लिखा था कि अगर आजादी की घोषणा होती है तो मैं चाहूंगा कि यह देश के सभी गांवों, शहरों में हो।

बेहतर होगा कि सभी जगहों पर एक ही समय सांकेतिक समूह में इसे मनाया जाए। गांधी जी चाहते थे कि आजादी की घोषणा परंपरागत तरीके यानी ड्रम बजाकर जगह-जगह की जानी चाहिए।

समारोह का शुरुआत तिरंगा फहराकर होनी चाहिए, इसके बाद पूरा दिन संरचनात्मक काम करते हुए बिताना चाहिए।

इसमें चरखा चलाना, अछूतों की सेवा करना, हिंदू मुसलमानों का पुनर्मिलन कराना या फिर यह सारे काम एक साथ करना।

ये सारे काम एक साथ करना असंभव नहीं है। अगर कोई सरकार आजादी को छीने तो उसे खत्म कर देना चाहिए।

इन कामों में हिस्सा लेने वालों लोगों को इस बात की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि अपने देश की मिट्टी और आजादी को वह आगे भी आने वाली पीढ़ियों को विरासत के रूप में सौंपेगे।

लेकिन अगर कोई सरकार लोगों के इस अधिकार का हनन करती है तो लोगों को उस सरकार को भी खत्म करने का अधिकार होना चाहिए। हालांकि यहां गौर करने वाली बात है कि महात्मा गांधी ने यह लेख 1930 में लिखा था।

लेकिन जब देश को आजादी मिली तो देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच खून-खराबा मचा हुआ था और बापू 15 अगस्त 1947 को 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे थे।


SAMVAD

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