जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने हाल में ही में इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश के बाद 250 ऐसे अकाउंट को ब्लॉक किया था जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में हैशटैग चला रहे थे, लेकिन महज 24 घंटे के अंदर ही ट्विटर ने इन अकाउंट को फिर से एक्टिव कर दिया था। इन अकाउंट से ‘किसानों का नरसंहार’ हैशटैग चलाया जा रहा था।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इन अकाउंट्स को लेकर यह भी दावा किया है कि इन अकाउंट्स पर रिजनल पाबंदी लगाई गई है यानी सिर्फ भारत में इन अकाउंट को एक्सेस नहीं किया जा सकता, जबकि अन्य देश से ये इन अकाउंट को ऑपरेट किया जा सकता है।
ट्विटर के इस कदम के बाद भारत सरकार ने उसे नोटिस जारी किया है। सरकार की ओर से ट्विटर से पूछा गया है कि उसने सरकार के आदेश की अवहेलना करता हुए इन अकाउंट्स को फिर से क्यों एक्टिव किया। ट्विटर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (ए) के उल्लंघन का आरोप है।
यदि ट्विटर दोषी पाया जाता है तो उसे सात साल के कैद की सजा भी हो सकती है। नोटिस में कहा गया है कि ट्विटर को भारतीय कानून का पालन करना चाहिए, हालांकि इस नोटिस पर ट्विटर ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है।
बता दें कि सोमवार को ट्विटर ने अपने सोशल मीडिया मंच 250 से अधिक अकाउंट पर रोक लगा दी जिनमें कुछ नए विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के वर्तमान प्रदर्शन से जुड़े हैं। जिन एकाउंट पर रोक लगाई गई थी उनमें किसान एकता मोर्चा (एट द रेट ऑफ किसानएकतामोर्चा) और बीकेयू एकता उग्राहन (एट द रेट ऑफ बीकेयूएकताउग्राहन) शामिल हैं। इन दोनों के हजारों फोलोवर्स हैं।

