कृषि कानून के विरोध में 72 दिन से गाजियाबाद गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे बुजुर्ग एवं युवा किसानों से जनवाणी की टीम ने खास बातचीत की। जिसमें बुजुर्ग एवं युवा किसानों ने खुलकर अपनी बात रखी। बुजुर्गों किसानों ने कहा कि अनाज की आपूर्ति को भरोसेबंद बनाने एवं किसानों की आर्थिक हालात को सुधारने के लिए 18 नवंबर 2004 को तत्कालीन केन्द्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया था। आयोग ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुल पांच रिपोर्ट सौंपी थी।
आंदोलनरत किसानों से उनके विचार को साझा करने तथा दुःख दर्द को समझने के लिए
जनवाणी टीवी संवाददाता विशाल भटनागर और फोटो जर्नलिस्ट किशन सुदन ग्राउंड रिपोर्टिंग करने गाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचे। प्रस्तुत है किसान आंदोलन की ज़मीनी हकीकत :
गाजीपुर बॉर्डर: कृषि कानून के विरोध में 72 दिन से गाजियाबाद गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे बुजुर्ग एवं युवा किसानों से जनवाणी की टीम ने खास बातचीत की। जिसमें बुजुर्ग एवं युवा किसानों ने खुलकर अपनी बात रखी। बुजुर्गों किसानों ने कहा कि अनाज की आपूर्ति को भरोसेबंद बनाने एवं किसानों की आर्थिक हालात को सुधारने के लिए 18 नवंबर 2004 को तत्कालीन केन्द्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया था।
आयोग ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुल पांच रिपोर्ट सौंपी थी। दिसंबर 2004, अगस्त 2005, दिसंबर 2005, अक्टूबर 2006 एवं अंतिम रिपोर्ट चार अक्टूबर 2006 को सौंपी थी। जिसमें फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने समेत किसानों की दशा को सुधारने की दशा में महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। लेकिन इतने वर्षों के पश्चात भी किसी भी सरकार ने उस रिपोर्ट को लागू नहीं किया।
अगर वह रिपोर्ट लागू हो जाएं तो वास्तव में अब तक किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो जाता। इस सरकार ने आने से पहले भी वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करते हुए किसानों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। मगर अन्य सरकारों की तरह इस सरकार ने भी उस रिपोर्ट को दबा की रखा है।
कृषि कानून को ख़त्म कर लागू हो स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट
किसानों ने कहा कि सरकार सरकार ने स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की स्थान पर कृषि सुधार के लिए कृषि कानून ऐक्ट लागू कर दिया। जबकि इस कानून से सुधार कम किसानों को परेशानियों का सामना ज्यादा करना पड़ेगा। क्योंकि अब भी निर्धारित मूल्य पर किसानों की फसल को नहीं खरीदा जाता तो। कानून लागू होने के बाद एमएसपी के अनुसार फसल खरीदी जाएगी। इसकी क्या गारंटी है। इस कृषि कानून के तीन प्रावधान से किसानों को फाएदा कम नुकासन ज्यादा होगा। अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित के लिए कार्य करना चाहती है तो स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करे। तभी लाभ होगा।
किसान नहीं चाहते कानून तो क्यों है हठ ?
युवा किसानों का कहना है कि जब किसान चाहते ही नहीं है कि यह तीनों कानून के तहत किसानों की फसल खरीदी जाए। तो फिर सरकार क्यों इस बात पर अडिग है। कृषि कानून को लेकर सरकार जल्द से जल्द किसानों से वार्ता करें और किसानों को मांगों को पूरी करते हुए इस कानून को तत्काल रुप से निरस्त करें। उन्होंने कहा कि किसान हमेशा देश हित के लिए खड़ा रहता है, अब भी देशहित को ध्यान में रखते हुए किसानों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। जिसमें किसी भी प्रकार का कोई भी हिंसात्मक कदम नहीं उठाया जाता। ऐसे में सरकार भी किसानों की मांगों को माने और जल्द से जल्द तीनों किसी कानून को रद करते हुए किसान हित में कदम उठाना चाहिए। क्योंकि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं लेगी वह यूं ही डेट रहेंगे।
फसल की बुवाई सिर पर आयी, लेकिन मजबूरी
किसानों ने कहा कि गेहूं की फसल की से संबंधित कार्य खेत में चल रहे है। जिसमें खाद डालना एवं समय पर पानी देने जैसे कार्य चल रहे हैं। जिनको घर की महिलाएं संभाल रही है और वह सभी यहां पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार से कानून रद करने की मांग कर रहे है। क्योंकि, आज वह सभी यहां से चले गए तो जिस तरह से आज पानी की बोतल कापर्रिट जगत द्वारा 20 से 30 रुपये लीटर बेची जा रही है। उसकी प्रकार कृषि भी कापर्रिट जगत के हाथो में चल गयी तो इस देश में अनाज भी सोनू के भाव पर मिलेंगे। ऐसे वह सभी यहां पर डटे हुए हैं। परिचर्चा में धर्मेंद्र चौधरी, प्रिंस चौधरी, जयपाल सिंह, चौधरी काले सिंह, चौधरी इंद्रपाल सिंह, सोनू सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
रफ्तार की जगह तंबुओं का शहर बना गाजीपुर हाइवे
उत्तर प्रदेश गाजियाबाद से दिल्ली की तरफ जाने वाले गाजीपुर हाइवे पर तीन माह पूर्व गाड़िया फर्राटे भरते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचती थी, लेकिन अब उसी हाइवे पर तंबुओं का शहर बना हुआ। जिसमें गाड़ियों के चलने वाले स्थान पर प्रदर्शनकारी किसान तंबू के सहारे अपने जीवन को यापन करते हुए सरकार से कानून को वापस लेने की मांग कर रहे है।
जनवाणी की टीम ने सभी तंबुओं का निरीक्षण करते हुए तंबू में रह रहे युवा किसानों से खास बातचीत की। तो युवाओं ने जनवाणी की टीम से खास करते हुए कहा कि वह किसान है और किसान हमेशा से ही विपरीत परिस्थितियों में रहकर देश के लिए अनाज उगाता है। उसमें चाहे भीषण गर्मी हो, ठंड जो या फिर बारिश किसान सदैव अपने कार्य में लगा रहता है। ऐसे में अपने हक के लिए अगर उन्हे तंबू का सहारा लेना पड़ रहा है। तो वह उसके लिए भी तैयार है।
क्योंकि अब भी अपने हक की लड़ाई नहीं लड़ी तो आगे जाकर कॉपोर्रेट जगत किसानों को बर्बाद कर देगा। खेती, किसान को बचाने के लिए ही वह अपना घर बार छोड़कर इन तंबुओं में दिन गुजार रहे। ताकि सरकार इस अपनी हठ छोड़ते हुए इस कानून को वापस ले। उन्होंने कहा कि सरकार को इस लिए वोट दी थी, कि उनकी सभी समस्याओं को दूर किया जाएगा, लेकिन सरकार द्वारा समस्याएं दूर करने की जगह हर बार कॉपोर्रेट जगत को ही बढ़ावा दिया जाता है।
ऐसे में प्रदर्शन ही सहारा है कि सरकार जागे और कृषि कानून को जल्द से जल्द वापस ले। उन्होंने कहा कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिया जाएगा। तब तक वह सभी इसी तरह से तंबूओं में रहकर शांति पूर्ण तरीके से प्रदर्शन करेंगे। इतना हीं नहीं किसानों ने कहा कि किसान हमेशा से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करता है। वह देशहित के साथ खड़ा रहता है। अगर कोई भी प्रदर्शन में आकर आरजकता फैलाएगा तो व उसको चयनित कर खुद अपने प्रदर्शन से दूर कर देंगे।
हाईटेक मशीन से बन रही है रोटियां
कृषि कानून के विरोध में गाजियाबाद गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में कोई भी प्रदर्शनकारी भूखा न रहे इसके लिए विभिन्न प्रकार के लंगर आयोजित किए जा रहे हैं। सभी प्रदर्शनकारियों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने की विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। इतना ही नहीं भोजन के समय कोई भी व्यक्ति प्रतीक्षा ना करे उसके लिए हाईटेक रोटी बनाने की मशीन भी लगाई गई हैं। ताकि समय पर सभी को रोटी मिलती रहे। दरअसल, हाईटेक मशीन के माध्यम से एक घंटे में 1000 रोटी बनकर तैयार हो जाती हैं। लंगर को संचालित करने वाले आयोजक जितेंद्र यादव ने बताया कि जब से यह प्रदर्शन चल रहा है। तब से प्रतिदिन हजारों किसानों को यहां पर भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इसलिए ही इस आधुनिक मशीन को लगाया गया है। क्योंकि बिना मशीन के रोटी बनाने में काफी समय लगता है, लेकिन इस मशीन के माध्यम से सिर्फ आटा गूदने के बाद सब अन्य कार्य मशीन के माध्यम से ही हो जाते हैं। उसके पश्चात सिर्फ सेवादारों द्वारा सभी को रोटी उपलब्ध करायी जाती है।
किसानों के प्रदर्शन में दिख रहा भारतीय संस्कृति का नजारा
कृषि कानून के विरोध मेें दिल्ली के समीप गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन में भारतीय संस्कृति का संगम देखने क ो मिल जाएगा। जहां पर ग्रामीण संस्कृति के अनुरूप बड़े-बुजुर्गों के साथ-साथ युवा प्रदर्शन कर अपनी सहभागिता निभा रहे हैं और सरकार से कृषि कानून को वापस लेने की मांग कर रहे है। साथ ही विभिन्न कैंपों में जिस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ों का सम्मान किया जाता है उसी प्रकार बड़ों का सम्मान करते हुए युवा उनके मागदर्शन में प्रदर्शन को सफल बनाने में लगे हुए हैं।
लंगर में खाने के लिए विशेष स्वादिष्ट भोजन
72 दिनों से गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में सभी किसानों के लिए खाने के लिए लंगर आयोजित किए गए है। जिसमें विभिन्न प्रकार की भोजन सामाग्री प्रदर्शनकारी किसानों को वितरित की जा रही है। इतना ही नहीं सभी को भोजन भी पूरे आदर व सम्मान के साथ खलाया जा रहा है। लंगर को संचालित किसान भाइयों ने कहा कि भोजन के लिए प्रत्येक दिन किसान भाइयों द्वारा ही खाद्य सामाग्री उपलब्ध करायी जा रही हैं। ताकि व्यवस्था में किसी को भी किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो।
सभी धर्मों के लोग करे रहे सेवा
हमारे देश में धर्मो को लेकर अनेकों बाते की जाती है, लेकिन गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन में आपसी भाईचारे की बेहतरीन मिशाल देखी जा रही है। जिसमें चाहे हिंदू हो या फिर मुस्लिम या फिर सिख या फिर ईसाई सभी एक-दूसरे को भरपेट भोजन उपलब्ध कराने के लिए सेवा के लिए लगे हुए है।
विशेष मेडिकल कैंप में मिल रहा उपचार
प्रदर्शन के दौरान किसी भी किसान को अगर उपचार की आवश्यकता होती है तो तत्काल वहां पर मेडिकल चेकअप में लगी टीम उनका उपचार करती है। जिससे किसी भी किसान भाई को किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो। सभी के उपचार के लिए मेडिकल से संबंधित सभी दवा भी नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही है।
कैमरे की नज़र में धरना स्थल