Monday, June 14, 2021
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गुदड़ी बाजार हत्याकांड: 13 बरस से फैसले के इंतजार में तरस रहीं आंखें

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  • मेरठ कालेज के तीन छात्रों की हुई थी निर्मम हत्या

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 13 साल पहले कोतवाली थानांतर्गत गुदड़ी बाजार में मेरठ कालेज के तीन छात्रों की निर्मम हत्या कर शवों को बालैनी में फेंकने के आरोपियों हाजी इजलाल समेत 14 लोगों की सजा पर अदालत का अभी फैसला नहीं आया है। इन तीनों छात्रों के परिजनों की आंखों में 23 मई का दिन आते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं और अपने लाड़लों के हत्यारों को सजा मिलने वाले दिन का इंतजार में लगे हैं।

23 मई 2008 की मध्यरात्रि को कोतवाली थाना क्षेत्र में गुदड़ी बाजार मोहल्ले में तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मरने वालों में मेरठ कालेज के छात्र सुनील ढाका (27) निवासी जागृति विहार, पुनीत गिरी (22) निवासी खटकी परीक्षितगढ़ और सुधीर उज्जवल (23) गांव सिरसलगढ़ बागपत हैं।

गुदड़ी बाजार निवासी हाजी इजलाल ने इन तीनों युवकों को अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर तीनों का विक्टोरिया पार्क से अपहरण किया। पहले पाइपों से पीटा, आंखें फोडी, मुर्गा बनाया उसके बाद गोली मारी और गर्दन काटी और इनके शवों को कार में रखकर बागपत के थाना बलेनी के क्षेत्र में हिंडन नदी के किनारे जंगल में इनकी कार को छोड़ दिया।

24 मई की सुबह इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने पर शहर में आक्रोश के साथ माहौल तनावपूर्ण हो गया। हत्याकांड के विरोध में शहर ऐतिहासिक पूर्ण रूप से बंद हुआ था।

पुलिस ने इजलाल व उसके दो भाई व साथियों सहित 14 लोगों की गिरफ्तारी की थी। इनमें हाजी इजलाल पुत्र इकबाल, अफजाल पुत्र इकबाल, परवेज पुत्र इकबाल, मन्नू ड्राइवर (देवेंद्र आहुजा) पुत्र विजय आहूजा, मेहराज पुत्र मेहताब, इसरार पुत्र राशिद, कल्लू (कलवा) (अब्दुल रहमान) पुत्र हाजी अमानत, रिजवान पुत्र उस्मान, बदरुद्दीन पुत्र फकरुदीन, वसीम पुत्र नजीर, इजहार पुत्र नसीरुद्दीन, शम्मी पुत्र जुनैल, माजिद पुत्र बाबू और शीबा सिरोही पुत्री चंद्रपाल शामिल थे।

इनमें से एक माजिद की मृत्यु हो गई। इस वक्त इजलाल, अफजाल, मनु ड्राइवर, इसरार, कल्लू ( अब्दुल रहमान), इजहार और शम्मी जेल में बंद है और परवेज, मेहराज, रिजवान, बदरुद्दीन, वसीम, शीबा सिरोही जमानत पर बाहर हैं।

हत्यारों को मिले फांसी

तिहरे हत्याकांड में मारे गए छात्र सुनील ढाका के भाई अनिल ढाका ने बताया कि 13 सालों से तीनों के परिवार इसी बात का इंतजार कर रहे हैं कि कातिलों को फांसी मिले। इन वर्षों में परिवार के सदस्यों के सामने नृशंस हत्याकांड रह-रह कर याद आ रहा है।

इनका कहना है कि उनको न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि उनको न्याय जरुर मिलेगा। इस वक्त यह केस स्पेशल जज गैंगस्टर ऐक्ट की अदालत में चल रहा है। गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। कोविड के कारण अदालतों में अभी कानूनी कार्रवाई नहीं चल रही है।


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