- हत्यारोपी आलिम के सरेंडर के बाद पीड़ित परिवार ने लिया फैसला, पुलिस कार्रवाई पर लगाए प्रश्नचिन्ह
जनवाणी संवाददाता |
किठौर: गुलफराज के मुख्य हत्यारोपी आलिम के हापुड़ में सरेंडर के बाद पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट मृतक के परिजन बृहस्पतिवार को पलायन पर अमादा दिखे। उन्होंने अपने घर पर पलायन का फ्लेक्स लगाया जो चंद पलों में सोशल मीडिया वायरल हो गया। पीड़ित परिवार को पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बड़ी शिकायतें हैं। किठौर में छह दिन पूर्व बहरोड़ा मार्ग स्थित नलकूप पर हुए गुलफराज हत्याकांड में मुख्य हत्यारोपी आलिम के हापुड़ कोर्ट में सरेंडर के बाद खौफजदा पीड़ित परिवार पलायन को तैयार है।
बृहस्पतिवार को मृतक के भाई तौकीर उर्फ कलवा व बेटे समीर ने घर पर पलायन का फ्लेक्स लगाया जो कुछ ही क्षणों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बातचीत में मृतक के भाई तौकीर ने कहा कि किठौर के गुंडाराज और पुलिस की अकर्मण्यता से त्रस्त होकर वे यहां से पलायन कर रहे हैं। सात लाख रुपए रंगदारी न देने पर उसके भाई गुलफराज की शनिवार को दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई। नामजद रिपोर्ट के साथ सबकुछ स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस हत्यारोपियों आलिम व सलमान को गिरफ्तार नहीं कर पाई।
तौकीर ने कहा कि पुलिस के नकारापन की इंतेहा देखिए कि मुख्य हत्यारोपी आलिम बुधवार को सफेदपोशों के संरक्षण में जब हापुड़ कोर्ट में सरेंडर करने चला तो हमनें पुलिस को पल-पल खबर दी, लेकिन कोर्ट गेट से गिरफ्तारी और हमारी मांग पर एनकाउंटर का दावा करने वाले इंस्पेक्टर किठौर हमें बहलाते रहे और आलिम कोर्ट से जेल चला गया। सलमान अभी फरार है। कहा कि अब हम पुलिस-प्रशासन से कार्रवाई या सुरक्षा की क्या उम्मीद रखें? तौकीर ने स्पष्ट कहा कि जेल से आकर आलिम हमें भी मारेगा। लिहाजा हमारे परिवार का यहां से चले जाना ही बेहतर है।
बड़ा था गुलफराज
तौकीर ने बताया कि गुलफराज तीन भाईयों में बड़ा था। तनवीर दिल्ली में चालक है और परिवार सहित वहीं रहता है। तौकीर भी पहले चालक की नौकरी करता था, लेकिन दो साल से गुलफराज ने उसे गाड़ी पर जाने नहीं दिया बल्कि खेतीबाड़ी में साथ लगा लिया था। तौकीर ने कहा कि मेहनत से कमाना और अपने बच्चों को पढ़ाना उनका शौक है।
गुलफराज का घनिष्ठ था आलिम
कस्बे के कई लोगों ने दबी जबान से बताया कि आलिम और उसके हममिजाज बहुत से लोग गुलफराज के घनिष्ठ थे। गुलफराज के नलकूप पर ऐसे लोगों का खूब आना-जाना था। क्योंकि वहां सट्टा, शराब के साथ कई तरह का खानपान चलता था। स्थानीय जनप्रतिनिधि तो उस पर भी कुछ नहीं बोले थे, लेकिन आलिम की गुलफराज से क्या बात बिगड़ी ये तो आलिम ही स्पष्ट करेगा।
चले जाएंगे पैतृक गांव
तौकीर उर्फ कलवा से जब पूछा कि पलायन कर कहां जाओगे तो उसने बताया कि बागपत का बसौद उनका पैतृक गांव है। किठौर में उसकी ननिहाल है। लगभग 60 वर्ष पूर्व उनकी मम्मी मुसैय्यदा पिता इस्लामुद्दीन को यहां ले आई थी। बताया कि हमसब भाई-बहनों की पैदाइश किठौर की है। अब हम यहां से पलायन कर बसौद जाएंगे। क्योंकि झगड़े-फसाद से काम नहीं चलेगा। बच्चे पढ़ लिख रहे हैं।
बताया कि गुलफराज का बड़ा बेटा समीर रूस से एमबीबीएस कर रहा है। दूसरा मुनीर जामिया में नीट की तैयारी कर रहा है। एक बेटा गफूरी इंटर कालेज में नौंवी का छात्र है। कई बच्चे आईएम में पढ़ रहे हैं। तौकीर ने कहा कि किठौर में कई बड़े नेता हैं लेकिन उनका पुरसा-ए-हाल कोई नहीं निकला।

