- हस्तिनापुर सीट पर मतदाता हर बार चुनाव में बदल देते हैं समीकरण, मतदाताओं की खामोशी बनी पहेली
- सियासी अंदाजी से मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की ताल ठोक रहे प्रत्याशी
जनवाणी संवाददाता |
परीक्षितगढ़: चुनावी महाभारत में एक-दूसरे को पछाड़ने की तैयारी में प्रत्याशी लगे हुए हैं। वहीं, मतदाताखामोशी से चुनावी समर का आनंद उठा रहे हैं। हस्तिनापुर विधानसभा सुरक्षित सीट का इतिहास रहा है। यहां की जनता जिसे जिताकर विधानसभा भेजती है। उसी दल की प्रदेश में सरकार बनती है। इस विधानसभा को लेकर एक और बात प्रचलित है। यहां पर आज तक दूसरी बार विधायक नहीं चुना जाता। जनता विधायक बदल देती है। इसलिए पार्टियों के मुखियाओं की नजर इस सीट पर खास रहती है।

चुनावी महाभारत में हस्तिनापुर विधानसभा सीट से भाजपा ने मौजूदा विधायक व मंत्री दिनेश खटीक को टिकट दिया है। गठबंधन से प्रत्याशी पूर्व विधायक योगेश वर्मा पांचवीं बार चुनाव के मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। जहां बसपा के टिकट पर इस बार नए चेहरे के रूप में संजीव जाटव चुनावी जंग लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने अभिनेत्री अर्चना गौतम को मैदान में उतारकर नए समीकरण पैदा कर दिये हैं।
प्रथम चरण का मतदान आगामी 10 फरवरी को होगा। जिसके लिए प्रत्याशियों ने मेहनत कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। जिसे लेकर सभी पार्टियों के प्रत्याशियों में बेचैनी बढ़ रही है और जनता के बीच पहुंचकर उनके सुख दु:ख बांट रहे हैं और विकास कराने का वादा कर रहे हैं, लेकिन मतदाताओं का खामोश बने रहना उनके लिए सिर दर्द बना हुआ है। जनता को अपने पक्ष में वोट करने के लिए तरह के सियासी तीर चुनावी मैदान से छोड़े जा रहे हैं, लेकिन जनता उनके तीर बाजी की अदाओं पर मुस्करा रही है।
इस बार चुनाव में समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन चुनावी समर का लुप्त भी ले रहे हैं। हस्तिनापुर सीट में सियासी समीकरण में हर बार चुनाव में अपना रंग बदल देती है और नये चहरे का विधायक बनाकर विधानसभा भेजती है। 2007 में बसपा पार्टी से विधायक योगेश वर्मा जीत हासिल कर बसपा की प्रदेश में सरकार बनी थी। 2012 में सपा पार्टी से विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि ने इस सीट पर जीत हासिल कर प्रदेश में सपा सरकार की ताजापोशी हुई थी।
वहीं, 2017 में भाजपा पार्टी से मौजूदा विधायक मंत्री दिनेश खटीक ने इस सीट पर भाजपा की जीत का परचम लहराया था तथा प्रदेश में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनी थी। चुनावी आंकडेÞ बताते हैं कि इससे पूर्व भी इस सीट का इतिहास रहा है। जो यहां से जीतता है, उसी पार्टी की प्रदेश में सरकार बनी थी। हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर इस बार सपा रालोद गठबंधन व भाजपा पार्टी से में कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
वहीं, बसपा प्रत्याशी व कांग्रेस प्रत्याशी दलित मुस्लिम समीकरण के आधार व अन्य वोटों के सहारे अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस बार गठबंधन व भाजपा का सीधा मुकाबला दिख रहा है। क्योंकि दलित, मुस्लिम गुर्जर, मतदाता बराबर है। जैसे-जैसे मतदान नजदीक आ रहा है। वैसे ही हस्तिनापुर सीट रोज नए समीकरण पैदा हो रही हैं। जिसकोे लेकर हार जीत को लेकर प्रत्याशियों के दिलों की धड़कने बढ़ने लगी है।
इस बार चुनावी मैदान में आजाद समाज पार्टी हिमांशु सिद्धार्थ, आम आदमी पार्टी अनमोल कौरी, एआईएमआईएम से विनोद जाटव मैदान में है। चुनावी मैदान को फतह करने के लिए चुनावी सियासी तीर के सहारे नैय्या पार करने के मूड में है।

