Sunday, March 22, 2026
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Supreme Court में बंगाल SIR पर सुनवाई, ममता बनर्जी ने लगाया मतदाता नाम हटाने का आरोप

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में मौजूद रहीं और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो सहयोगी न्यायाधीशों से प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर जानकारी मिली है और उसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को मामले में शामिल किया गया है।

32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं, 1.36 करोड़ नाम विसंगति सूची में—बंगाल सरकार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि SIR प्रक्रिया पूरी करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम ‘तार्किक विसंगति सूची’ में हैं, 63 लाख मामलों की सुनवाई अब भी लंबित है।

उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी में नहीं आते। दीवान ने आरोप लगाया कि आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और ओबीसी प्रमाण पत्र जैसे वैध दस्तावेजों को भी अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है।

नामों के उच्चारण को लेकर जजों और वकीलों में चर्चा

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने नामों के उच्चारण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बंगाल में ‘द्विवेदी’ का उच्चारण ‘दिबेदी’ होता है क्योंकि बंगाली भाषा में ‘वा’ की ध्वनि नहीं है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिक्रिया दी कि कम से कम उनके नाम का उच्चारण तो सही होगा। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि ऐसा भी संभव नहीं है।

SIR का इस्तेमाल केवल नाम हटाने के लिए—ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत में कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख अखबारों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का उपयोग केवल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं, फ्लैट खरीदने या स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम एकतरफा तरीके से सूची से हटा दिए गए हैं। अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अदालत के पूर्व निर्देशों के बावजूद ऐसे मामलों को ‘गलत मानचित्रण’ बताकर नाम काटे जा रहे हैं।

‘केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा’—मुख्यमंत्री

ममता बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधार कार्ड को मान्यता दिए जाने के बाद बंगाल के लोगों को राहत मिली थी, लेकिन अन्य राज्यों में जहां निवास और जाति प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाते हैं, वहीं चुनाव की पूर्व संध्या पर केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने भावुक लहजे में कहा, “जब न्याय बंद दरवाजों के पीछे पुकारता है, तो लगता है कि कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा।” उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग को अब तक छह पत्र लिखे जा चुके हैं और वह किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि व्यापक जनहित में लड़ रही हैं।

भाजपा शासित राज्यों से आए सूक्ष्म पर्यवेक्षकों पर आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के अधिकार छीन लिए गए हैं और भाजपा शासित राज्यों से आए सूक्ष्म पर्यवेक्षक बिना सत्यापन के नाम हटा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-6 भरने की अनुमति नहीं दी गई, कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया और 58 लाख नाम काट दिए गए, जिनके खिलाफ अपील का कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया।

चुनाव आयोग पर तीखा हमला, कहा—‘व्हाट्सएप आयोग’

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सएप आयोग’ तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग व्हाट्सएप के जरिए अनौपचारिक आदेश जारी कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, फसल कटाई का मौसम है और लोग यात्रा पर हैं, तब इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है।

9 फरवरी को अगली सुनवाई, कोर्ट ने मांगी अधिकारियों की सूची

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सोमवार तक ग्रुप-बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत की जाए जिन्हें कार्यमुक्त कर उपलब्ध कराया जा सकता है। कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि SIR से जुड़ी सभी याचिकाओं पर 9 फरवरी को एक साथ सुनवाई की जाएगी।

सुनवाई के अंत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीठ के प्रति आभार जताया और सुप्रीम कोर्ट से लोकतंत्र और जनता के मतदान अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया।

ECI के SIR आदेश रद्द करने की मांग

अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 को जारी SIR से जुड़े सभी आदेशों और निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 को अपरिवर्तित मतदाता सूची के आधार पर कराने के निर्देश देने की भी अपील की है। उनका तर्क है कि 2002 की आधारभूत सूची पर आधारित SIR प्रक्रिया और कठिन सत्यापन प्रणाली वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों के लिए खतरा बन रही है।

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