Home धर्म ज्योतिष Navratri Day 8: दुर्गा अष्टमी पर कैसे करें मां महागौरी की पूजा? जानें विधि, मंत्र और आरती

Navratri Day 8: दुर्गा अष्टमी पर कैसे करें मां महागौरी की पूजा? जानें विधि, मंत्र और आरती

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Navratri Day 8: दुर्गा अष्टमी पर कैसे करें मां महागौरी की पूजा? जानें विधि, मंत्र और आरती

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि का आज आठवां दिन है, जिसे महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर से हुआ था और इसका समापन 30 सितंबर को नवमी तिथि पर होगा। महाष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मां महागौरी भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं, इसलिए उनकी आराधना से भक्तों को मां दुर्गा के साथ-साथ भोलेनाथ का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। मां महागौरी को सौम्यता और शांति की देवी माना जाता है। भक्त उनकी पूजा कर जीवन की सभी नकारात्मकता और दुखों से मुक्ति की कामना करते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन कन्या पूजन (कंजक पूजा) का भी विशेष महत्व है। भक्त छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके चरण पूजते हैं, भोजन कराते हैं और उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कन्या पूजन का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि इससे घर में समृद्धि आती है और परिवार पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है। इस दिन मां की विधिवत पूजा, मंत्र-आरती करने और उन्हें विशेष भोग लगाने से साधक को संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं मां महागौरी की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती…

शुभ मुहूर्त

इस साल अष्टमी तिथि का प्रारम्भ 29 सितंबर को शाम 04:31 बजे शुरू होगी और इसके समापन 30 सितंबर को शाम 06:06 बजे होगा। ऐसे में महाअष्टमी का पर्व 30 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा।

पूजन मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:37 से 5:25 बजे तक (स्नान व ध्यान के लिए उत्तम)
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:47 से 12:35 बजे तक
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: प्रातः 10:40 से 12:10 बजे

पूजा विधि

इस दिन प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
घी का दीपक जलाएं और मां को रोली, चंदन, अक्षत, धूप व पीले फूल अर्पित करें।
नारियल, पूड़ी, काले चने और हलवे का भोग लगाएं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां का मंत्र जाप और आरती करें।

प्रिय भोग

मां महागौरी को नारियल से बने व्यंजन विशेष रूप से प्रिय हैं। आप चाहें तो घर पर नारियल आधारित पकवान जैसे नारियल लड्डू, नारियल की बर्फी आदि बनाकर देवी को भोग लगा सकते हैं। यह सरल होने के साथ-साथ देवी को प्रसन्न करने का उत्तम माध्यम है।

मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥
सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥

मंत्र

ॐ देवी महागौर्यै नमः
स्तुति मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

पूजा से होने वाले लाभ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां महागौरी का ध्यान करने से साधक को अद्भुत सिद्धियों की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से भक्तों के जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं और असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं। मां महागौरी को अन्नपूर्णा का स्वरूप भी कहा गया है, इसलिए अष्टमी पर कन्याओं का पूजन अत्यंत शुभ माना जाता है। वह धन, ऐश्वर्य और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं और उनकी उपासना से जीवन में सकारात्मकता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।