Sunday, February 15, 2026
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सियासत के भंवर में डूबी इनर रिंग रोड

  • इनर रिंग रोड का कार्य सिर्फ चल रहा कागजों में
  • नहीं दिखाई दे रहा धरातल पर कार्य
  • जनता इनर रिंग रोड के लिए अपने आपको को कर रही ठगा-सा महसूस
  • बरती जा रही घोर लापरवाही, फिर से गर्माया मुद्दा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर की लाइफ लाइन कहीं जा रही इनर रिंग रोड एक तरह से सियासत के भंवर में डूबी हुई हैं। कहने को इनर रिंग रोड पर काम तो मेरठ विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अनुसार तीन दशक से काम कागजों में चल रहा हैं, मगर धरातल पर कुछ नहीं हैं। कई प्रोजेक्ट इसके तैयार हुए, लेकिन सही क्रियान्वन न होने से योजना परवान नहीं चढ़ सकीं। जनता इनर रिंग रोड के मामले में खुद को ठगी महसूस कर रही है।

प्लान बना, लेकिन काम नहीं हुआ। खास बात यह है लोगों से सीधे जुड़े इनर रिंग रोड के निर्माण के मुद्दे पर भी लापरवाही बरती गई। अब जब चुनाव होने जा रहे हैं तो इनर रिंग रोड का मुद्दा फिर से गरमा गया है। प्रोजेक्ट क्रांतिधरा पर इनर रिंग रोड बनाने का था। पांच वर्ष तक इसका प्रोजेक्ट सिर्फ फाइलों में ही दौड़ता रहा, लेकिन उसके बाद यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया।

मेरठ में इनर रिंग रोड बनाने का ख्याल सबसे पहले एमडीए को मास्टर प्लान 2021 में आया था। सर्वप्रथम 12 किलोमीटर बनायी जानी थी। बिजली बंबा बाइपास से बागपत रोड का आपस में लिंक करना था। इसका प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। सिंचाई विभाग से भी इसकी एनओसी मांगी गई थी। क्योंकि यहां पर सिंचाई विभाग का रजवाहा हैं, जिसको कवर करते हुए पटरी दोनों तरफ इनर रिंग रोड का निर्माण करना प्रस्तावित था।

ये प्रस्ताव वर्षों तक चला, फिर खारिज कर दिया गया। एमडीए अधिकारियों का कहना था कि बजट की कमी के चलते इनर रिंग रोड के प्रोजेक्ट को पीडब्लयूडी को भेज दिया गया था, जिसके बाद इनर रिंग रोड का प्रोजेक्ट फुटबाल बन गया। एक विभाग से दूसरे विभाग में इसकी फाइल घूमती रही। वर्तमान में इसकी फाइल पकड़ने के लिए कोई तैयार नहीं हैं, यह हाल तो शहर की लाइफ लाइन से जुड़े इनर रिंग रोड का मामला हैं।

अब योगी आदित्यनाथ की सरकार पांच वर्ष पूरे कर रही हैं, ऐसे में फिर से केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इनर रिंग रोड के निर्माण का वादा कर दिया, लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी शर्त लगा दी कि प्रशासन जमीन अधिग्रहण करके दे तो भूतल परिवहन विभाग इनर रिंग रोड बनाने के लिए तैयार हैं। फिर वहीं समस्या खड़ी होगी कि जमीन अधिग्रहण करने के लिए बजट का रोना रोया जाएगा।

बजट मिलेगा नहीं, फिर इनर रिंग रोड फाइलों मे दौड़ती रहेगी। चुनाव से ठीक पहले किया गया इनर रिंग रोड के निर्माण के वादे ने अवश्य ही लोगों को भ्रमित करने का काम किया हैं। यूपी व केन्द्र, दोनों जगह भाजपा की सरकार थी, लेकिन इसके बावजूद इनर रिंग रोड की फाइल सिर्फ कागजों में इधर-उधर दौड़ती गई, लेकिन इनर रिंग रोड योजना धरातल पर नहीं उतरी। अब फिर इनर रिंग रोड का मुद्दा चुनावी बन गया हैं। सपा-रालोद के नेता इस मुद्दे को उठाकर भाजपा की घेराबंदी कर रहे हैं।

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