नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सनातन धर्म में आज लाभ पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। दिवाली के बाद, कई भारतीय समुदाय लाभ पंचमी नामक त्योहार मनाते हैं। इसे “सौभाग्य पंचमी” या “ज्ञान पंचम” भी कहा जाता है। यह दिवाली के औपचारिक समापन का प्रतीक है। यह शुभ दिन नई शुरुआत, समृद्धि और सफलता का स्वागत करने का अवसर प्रदान करता है। लाभ पंचमी का दिन किसी भी नए कार्य के लिए शुभ होता है।
कहा जाता है कि, लाभ पंचमी के दिन भगवान शिव, गणेश और लक्ष्मी की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और व्यवसाय, व्यवसाय में उन्नति होती है। सुख, समृद्धि और मंगलकामना के लिए सौभाग्य पंचमी का व्रत करें। चाहे बिजनेस बढ़ाना हो, नया काम शुरू करना हो या बाजार से खरीदारी करनी हो, यह दिन 24 घंटे शुभ रहता है। यह दिन शुभ कार्यों के लिए विशेष दिन है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि ।
शुभ मुहूर्त
पंचमी तिथि प्रारंभ:06 नवंबर 2024 को देर रात्रि 12:16 बजे से
पंचमी तिथि समाप्त: 07 नवंबर, 2024 को देर रात्रि 12:41 बजे
चौघड़िया
सूर्योदय : प्रातः 06:43 पर
शुभ: प्रातः 10:36 से प्रातः 11:53 तक
लाभ: प्रातः 06:43 से प्रातः 08:00 तक
अमृत: प्रातः08:00 से प्रातः 09:18 तक
रात के लिए चौघड़िया:
सूर्यास्त: सायं 05:04 पर
शुभ: सायं 06:46 से रात्रि 08:29 तक
अमृत: रात्रि 08:29 से रात्रि 10:11 तक
लाभ: तड़के 03:19 से प्रातः 05:01,नवम्बर 07
प्रातःकाल लाभ पञ्चमी पूजा मुहूर्त – प्रातः 06:37 से प्रातः 10:15
अवधि – 03 घण्टे 38 मिनट्स
पूजा-विधि
- पंचम पूजा के दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए।
- इसके बाद शुभ चौघड़िया मुहूर्त में भगवान सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए.
- भगवान गणेश और भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए।
- एक सुपारी लें और उस पर पवित्र धागा लपेट क्र चावल की ढेरी पर रख दें।
- यदि संभव हो तो भगवान गणेश की मूर्ति भी रखें।
- भगवान गणेश को चंदन, सिन्दूर, फूल और दुर्वा अर्पित करना चाहिए।
- साथ ही भगवान शिव को भस्म, बिल्व पत्र, धतूरे के फूल और सफेद वस्त्र चढ़ाना चाहिए।
- भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना चाहिए और भगवान शिव को दूध से बना प्रसाद चढ़ाना चाहिए।
- भगवान शिव और गणेश जी के लिए लाभ पंचम मंत्र का जाप करना चाहिए।
भगवान गणेश के लिए लाभ पंचम मंत्र:
लम्बोदरं महाकायं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्. आवाह्याम्यहं देवं गणेशं सिद्धिदायकम्
भगवान शिव के लिए लाभ पंचम मंत्र :
त्रिनेत्राय नमस्तुभ्यं उमादेहार्धधारिणे. त्रिशूलधारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:

