जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एक अरसा पहले कोर्ट के आदेश पर जिस्म की मंडी के तौर पर देश भर में खास पहचान रखने वाला कबाड़ी बाजार भले ही पुलिस प्रशासन ने बंद करा दिया हो, लेकिन बागपत फ्लाईओवर के आसपास टीपीनगर और जानी थाना इलाके में शहर के कबाड़ी बाजार से कहीं बड़ी जिस्म की मंडी बस गई है। यह ठीक वैसी है जैसे कोलकाता का सोनागाछी बाजार है। फर्क सिर्फ इतना है कि सोनागाछी में बहुमंजिला इमारत हैं और यहां सुभारती और एमआईटी के आसपास ओयो होटलों में 24 घंटे जिस्मफरोशी करायी जा रही है।

बागपत रोड पर तमाम कच्ची कॉलोनियों में कई लोगों ने मकान बनाकर ओयो होटल के संचालकों को मोटी रकम पर किराए पर दे दिए हैं। सुभारती के आसपास तो सबसे बुरी स्थिति है। इस एरिया में 52 ओयो होटल हैं। कुछ लोगों ने तो घरों में ओयो होटल खोल लिए हैं। जनवाणी जिस इलाके की बात कर रहा है, वहां ना तो टूरिस्ट आते हैं और ना ही बाहर से आने वाले इस इलाके में ठहरते हैं। ना ही यहां कोई कारोबारी इलाका है जो बाहर से आने वाले यहां ठहरेंगे। यहां केवल ओयो होटल खोलकर मोटी कमाई करने वालों का ठिकाना है।
अफसरों को फुर्सत नहीं या फेर ली नजर
ओयो होटलों को लेकर जानी और टीपीनगर पुलिस की कारगुजारियों की खबर अफसरों को ना हो यह बात गले नहीं उतरती। थाना पुलिस ना बताए तो फिर एलआईयू की रिपोर्ट नियमित रूप से जाती है, यदि एलआईयू भी बेखर है तो फिर पुलिस की इस महत्वपूर्ण यूनिट की कम से मेरठ तो कतई जरूरत नहीं है। आला अफसर यदि बेखबर है तो फिर उनकी काबिलियत पर सवाल है। ऐसा कैसे हो सकता है कि थानेदार पांच-पांच हजार में जिस्मफरोशी का अड्डा चलाने का लाइसेंस दे रहे हो और उन्हें खबर ना हो।

कभी नहीं की जाती चेकिंग
इस इलाके में ओयो के नाम पर जिस्मफरोशी का लाइसेंस लेने के लिए थाना पुलिस को सिर्फ पांच हजार रुपये महीना देने होते हैं, उसके बाद ना तो पुलिस छापे का डर है ना ही चेकिंग का झंझट। यदि कभी कभार चेकिंग की नौबत भी आती है तो उसकी खबर पहले ही थाने का स्टाफ दे देता है। कुछ देर के लिए ओयो संचालक ग्राहकों और लड़कियों को वहां से निकला देता है। करीब दो साल पहले इस पूरे इलाके के लोगों ने ओयो होटलों के खिलाफ अभियान चलाया था। पुलिस प्रशासन के आलाधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन बजाय ओयो पर कार्रवाई के पुलिस ने विरोध करने वालों पर ही कार्रवाई कर दी। कुछ ने बताया कि उन्हें मुचलका पाबंद कर दिया गया।

कोड़ियों के भाव बिक रहे नियम और शर्ते
कुछ कायदे कानून ओयो होटल खोलने के लिए जरूरी है इनका सराय पंजीकरण एक्ट में पंजीकरण हो। होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को राजस्व, पुलिस, खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन और पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक होता है। इन विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही जिला प्रशासन द्वारा इनका रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
ऐसे लेना होता है लाइसेंस
ओयो होटल और गेस्ट हाउस को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए शर्तें निर्धारित हैं। इसके तहत संचालकों की जवाबदेही तय करने की भी शर्त शामिल है। इसके अलावा सीसीटीवी और सुरक्षा मानक, होटल और गेस्ट हाउस में सीसीटीवी कैमरे लगाना और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। होटल और गेस्ट हाउस में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक होगा। होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को मेहमानों के आने-जाने और पहचान से जुड़े नियमों का पालन करना होगा, जिसमें पहचान पत्र लेना और रिकॉर्ड रखना शामिल है। होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच करनी और इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी।

ओयो होटल खोलने के लिए जरूरी है कि यदि होटल आवासीय क्षेत्र में स्थित है, तो व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति लेनी आवश्यक है। ओयो होटल और गेस्ट हाउस संचालक को पर्यावरण और स्वास्थ्य विभाग से अनुमति लेनी आवश्यक है, लेकिन जिन ओयो की बात की जा रही है वो ऐसा कुछ नहीं करते। आला अफसर यदि एक सप्ताह के सप्ताह के सभी ओयो के सीसीटीवी की फुटेज चेक कर लें तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा और उठने वाली शक की सुई भी साफ हो जाएगी। अन्यथा बंदरबाट की बात तो हवा में तैर ही रही है।
ये विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं
मेरठ विकास प्राधिकरण: सभी 52 ओयो होटल रोड बाइंडिग और ग्रीन वर्ज में बने हैं, लेकिन प्राधिकरण चुप हैं।
दमकल विभाग: किसी भी ओयो होटल के पास दमकल विभाग की एनओसी नहीं है, जो बेहद
अनिवार्य है।
जिला प्रशासन: एक भी ओयो होटल सराय एक्ट में पंजीकृत नहीं ना ही अन्य कोई लाइसेंस है।
जिला पुलिस: बगैर किसी वैरिफिकेशन व अनुमोदित रजिस्टर के चलाए जा रहे ओयो होटलों में अनैतिक कार्यों को स्वीकृति।
नगर निगम: निगम अधिकारी व्यवसायिक कार्य कर रहे इन ओयो होटलों से व्यवसायिक टैक्स नहीं वसूल कर रहा है।
जीएसटी: ओयो होटलों पर कभी भी जीएसटी विभाग छापे मारी नहीं करता, व्यवसायिक कार्य के बाद भी एक भी ओयो जीएसटी में पंजीकृत नहीं हैं।
एलआईयू: यूनिट का स्टाफ कभी भी ओयो होटलों नंबरिंग नहीं करता। यदि कोई विदेशी यहां आकर ठहरता है तो उसकी भी सूचना नहीं दी जाती। इसको लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती

