- पशु की इम्युनिटी बढ़ने पर तीन सप्ताह में स्वत: हो जाता है ठीक
- विदेशी बीमारी है लंपी स्किन, इसकी अभी कोई दवाई नहीं
- गोटपोक्स वेक्सीन और घरेलु नुस्खों से नियंत्रित करने के प्रयास
जनवाणी संवाददाता |
किठौर: पशुओं के संक्रामक रोग लंपी स्किन ने पशु पालकों में हड़कंप मचा रखा है। खासतौर पर गोवंश में यह रोग तीव्रता से फैलता दिख रहा है। हालांकि यह रोग जानलेवा नहीं मगर विदेशी वायरस से पनपी इस बीमारी की भारत में वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल विभाग गोट पोक्स वैक्सीन और कुछ घरेलु नुस्खों से इस पर नियंत्रण के प्रयास कर रहा है।
लंपी स्किन के प्रकोप के चलते किठौर के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में खौफ का महौल है। वजह यहां गंगा के खादर से सटे गांवों तरबियतपुर, शाहीपुर, फिरोजपुर, सिकंदरपुर, सारंगपुर, मिश्रीपुर, ढकैनी, सालौर रसूलपनाह, गेसूपुर, छुछाई, असीलपुर, कोठरा के लोगों का मुख्य पेशा तो कृषि व पशुपालन है साथ ही बोंद्रा-नंगला सलेमपुर, ललियाना, राधना के लोग भी छोटे किसान होने के बावजूद काफी तादाद में पशु पालते हैं।
खादर के गांवों में आज भी गायों के बाढ़े हैं जिन्हें ग्वाले सुबह ही खोलकर चराने के लिए निकल पड़ते हैं। भैंस और चारे की महंगाई के कारण खादर से अलग के गांवों में भी गाय पालन में वृद्धि हुई है। क्योंकि गाय सस्ती होने के साथ कम चारा खाती है। जबकि उसका दूध निरोगा और पीने योग्य होता है। चूंकि गाय पालन का क्रेज है और लंपी स्किन गायों को अधिक संक्रमित कर रही है। इसलिए इस नये रोग से हाहाकार भी चैतरफा है।
ये है स्थिति
किठौर की बात करें तो यहां बोंद्रा में 5, नंगला सलेमपुर में 4, छुछाई में 3, बागवाला में 1, नदल्लीपुर में 2, सादुल्लापुर खादर में 1, शाहीपुर में 2, असीलपुर में 6, कोठरा में 2 लंपी स्किन ग्रसित गोवंश हैं। डा. कपिलदेव त्यागी का कहना है कि वैक्सीन फ्रीज कर रखी है। बृहस्पतिवार से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।
क्या कहते हैं डाक्टर?
पशु चिकित्साधिकारी राजकीय पशु चिकित्सालय परीक्षितगढ़ डा. कपिलदेव त्यागी का कहना है कि लंपी स्किन एक विदेशी बीमारी है। जो 2019 में संक्रमण के जरिये उड़ीसा से यहां पहुंची है।

संक्रमित रोग होने के कारण वायरस के अलावा मक्खी, मच्छरों व अन्य कीट पतंगों से यह बीमार से स्वस्थ पशु में पहुंचती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी जानलेवा नहीं, लेकिन पशु को बहुत अधिक प्रभावित करती है।
लंपी स्किन के लक्षण
- शरीर में चर्म पर गांठ बनने के साथ सूजन आना।
- गांठों के प्रकोप से तेज बुखार आना।
- पशु के खान-पान में कमी आ जाना।
- दुधारू पशुओं में दुग्ध उत्पादन घट जाना।
- उपचार में देरी पर शरीर की गांठों का जख्म में तब्दील हो जाना।
लंपी स्किन के चिकित्सीय उपचार
सामान्य तौर पर पशुओं को पौष्टिक आहार देने से शरीर में इम्युनिटी बढ़ने पर यह रोग दो से तीन सप्ताह में स्वत: ठीक हो जाता है। जहां तक दवा का प्रश्न है भारत में इसकी अभी कोई दवाई नहीं बनी है। रोग की रोकथाम के लिए गोटपोक्स का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। गांठों के घाव बनने पर बिटाडीन सरीखे मरहम प्रयोग किए जा रहे हैं।
लंपी स्किन के घरेलु उपचार
- प्रत्येक पशु पालक को चाहिए कि वह अपने पशुओं को नहलाकर साफ-सुथरा रखे।
- पशु थान की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान दे।
- मक्खी मच्छर व अन्य कीट के प्रकोप से बचाने के लिए पशु थान में धुंआ करे।
- स्वस्थ पशुओं को बीमार पशुओं से अलग रखे।
- बीमार पशु को फिटकरी व नीम के पत्तों में पके पानी से नहलाए।
- भयंकर बीमारी की शक्ल में शरीर की गांठों के घाव में तब्दील हो जाने पर हल्दी व सरसों का तेल मिलाकर घावों पर लगाएं।

