Sunday, February 8, 2026
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Muzaffarnagar Exclusive Report: मनरेगा का ‘तालाब घोटाला’, नरा में कागजों पर लाखों का काम, ज़मीन पर गंदगी का अंबार

जनवाणी की एक्सक्लूसिव पड़ताल में खुलासा: 40 मजदूरों को 90 दिन फर्जी काम दिखा लाखों गबन का आरोप

News By: गुलजार बेग/कौसर चौधरी

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर सदर ब्लॉक के नारा गांव में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना के तहत एक सनसनीखेज महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ है। ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन और विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाने वाली इस योजना के नाम पर लाखों रुपये के सरकारी धन के बड़े पैमाने पर गबन का आरोप लगा है, जिसके बाद मनरेगा लोकपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है।

गांव निवासी हारून द्वारा मनरेगा लोकपाल आयुक्त को दी गई शिकायत में दावा किया गया है कि गांव के खसरा नंबर 66 पर स्थित एक कथित तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। शिकायतकर्ता हारून के अनुसार, इस ‘परियोजना’ के लिए 40 मजदूरों को पूरे 90 दिनों तक काम करते हुए कागजों पर दिखाया गया, और उनके नाम पर लाखों रुपये की मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन, आरोप है कि वास्तव में मौके पर कोई कार्य हुआ ही नहीं। हारून ने सीधा आरोप ग्राम प्रधान पर लाखों रुपये के सरकारी धन के गबन का लगाया है।

दैनिक जनवाणी की पड़ताल: हकीकत में कूड़े का ढेर, तालाब का वजूद मिटा

दैनिक जनवाणी को प्राप्त हुए मौके के वीडियो और तस्वीरों से शिकायतकर्ता हारून के दावों की चौंकाने वाली पुष्टि होती है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि जिस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों खर्च दिखाए गए हैं, मौके पर उसका वजूद लगभग मिट चुका है। प्रत्येक वर्ष इस तालाब की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए जो पैसा आता है, वह कहां इस्तेमाल होता है, इसका कोई अंदाजा नहीं है। इतना ही नहीं, ‘अमृत सरोवर’ योजना के तहत तालाब पर नेम प्लेट तक भी नहीं लगी है।

हमारी पड़ताल में यह भी पता चला कि वर्ष 2023 में इस तालाब पर 3 लाख 92 हजार रुपये खर्च करना दिखाया गया है, जबकि वास्तव में कोई खर्च हुआ ही नहीं है। जनवाणी टीम ने जब मौके पर पहुंचकर पड़ताल की, तो जिस जगह पर मनरेगा के तहत काम दिखाए जाने का दावा किया गया है, वहाँ सिर्फ कूड़े, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का विशाल ढेर दिखाई दिया और पूरा तालाब घास-फूस तथा कूड़े से अटा पड़ा है। यह स्थिति गाँव में स्वच्छता की बदहाल व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। यह सीधे तौर पर दर्शाता है कि लाखों रुपये के सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया है और वास्तविक विकास कार्य के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई है।

लोकपाल ने लिया संज्ञान, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

इस गंभीर मामले की शिकायत मिलने के बाद, मनरेगा लोकपाल आयोग नीरज शर्मा ने तुरंत संज्ञान लिया है और पिछले दो माह से इस प्रकरण की जांच चल रही है। लोकपाल कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं और फर्जीवाड़े के ठोस सबूत मिलते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और गबन की गई सरकारी धनराशि की वसूली भी की जाएगी।

क्या कहते हैं मनरेगा लोकपाल?

मनरेगा लोकपाल नीरज शर्मा ने बताया, “एक शिकायत के आधार पर हमने मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच की है। प्रथम दृष्टया यह गबन का मामला प्रतीत हो रहा है, क्योंकि जहां पर चालीस मजदूरों द्वारा काम करना दर्शाया गया है, वहां की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।”

यह घोटाला न सिर्फ सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का एक ज्वलंत उदाहरण है, बल्कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजना के प्रति ग्रामीणों के विश्वास को भी गहरी ठेस पहुंचाता है। दैनिक जनवाणी इस पूरे मामले पर लगातार कड़ी नज़र रखेगा, ताकि नगला नारा के पीड़ित ग्रामीणों को न्याय मिल सके और मनरेगा जैसी योजनाओं का भविष्य में ऐसा दुरुपयोग रोका जा सके। यह आवश्यक है कि जाँच निष्पक्ष हो, और दोषी किसी भी कीमत पर बख्शे न जाएं ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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