Wednesday, March 25, 2026
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हिमाचल में मानसून बना कहर: भूस्खलन-बाढ़ से सैकड़ों सड़कें बंद, 263 मौतें, करोड़ों का नुकसान

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार तबाही लेकर आया है। लगातार बारिश, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने राज्य में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों, पुलों और जल-विद्युत सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ है, जबकि अब तक 263 लोगों की मौत और 2,17,354 लाख रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है।

सड़कें, बिजली और जलापूर्ति ठप

सोमवार सुबह 10 बजे तक 3 नेशनल हाईवे सहित 400 सड़कें बंद रहीं।

883 बिजली ट्रांसफार्मर और 122 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित।

मंडी में सबसे अधिक 192 सड़कें, 303 ट्रांसफार्मर और 44 जल योजनाएं ठप।

किन्नौर और करसोग सबसे ज्यादा प्रभावित

किन्नौर में पवारी के पास NH-5 धंस गया, 60% हिस्सा बहा।

करसोग को शिमला से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी सतलुज नदी के उफान से बर्बाद।

कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं, सड़क की चौड़ाई सिर्फ 1.5 मीटर बची।

HRTC ने शुरू की ट्रांस-शिपमेंट सेवा

एसडीएम करसोग के निर्देश पर यात्रियों के लिए वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था।

करसोग-तत्तापानी और शिमला-सुन्नी रूट पर HRTC की बसें लगाई गईं।

47 सीटर, इलेक्ट्रिक बसें और आपातकालीन स्थिति में मिनी बस भी तैनात।

मानसून का खौफनाक आंकड़ा (20 जून – 17 अगस्त)

263 मौतें, जिनमें 127 सड़क हादसों में

332 घायल, 37 लोग लापता

2,814 घर-दुकानों को नुकसान, 2,201 गोशालाएं ध्वस्त

1,626 पालतु पशुओं की मौत

कुल अनुमानित नुकसान: ₹2,17,354.38 लाख

भारी बारिश का अलर्ट जारी

बीती रात धौलाकुआं में 113 mm, जोत में 70.8 mm, पालमपुर में 58.7 mm बारिश दर्ज।

मौसम विभाग ने 24 अगस्त तक भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।

21 अगस्त को छोड़कर बाकी दिनों के लिए येलो अलर्ट।

पांवटा साहिब में स्कूल बंद, पर शिक्षकों से उपस्थिति

पांवटा उपमंडल में आज सभी स्कूल-कॉलेज बंद।

लेकिन शिक्षकों को अवकाश नहीं, जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचे।

बुद्धिजीवियों और संगठनों ने फैसले पर सवाल उठाए।

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