नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली छोटी दिवाली दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का दूसरा दिन होता है। इसे नरक चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दीपोत्सव का दूसरा दिन
छोटी दिवाली के दिन से ही चारों ओर दीयों की रौशनी, सजावट और उल्लास का माहौल बन जाता है। घरों की सफाई, सजावट और दीप सज्जा का कार्य इसी दिन से चरम पर होता है। बाजारों में भी रौनक देखने को मिलती है — मिठाइयों की दुकानों, सजावटी सामान और उपहारों की खरीदारी जोरों पर रहती है। लोग इस दिन अपने प्रियजनों को दिवाली की अग्रिम शुभकामनाएं और उपहार देकर स्नेह व सौहार्द का आदान-प्रदान करते हैं।
क्यों कहते हैं इसे नरक चतुर्दशी?
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी कहा जाता है क्योंकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर 16,000 कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था। इस उपलक्ष्य में लोगों ने घरों में दीप जलाकर उल्लास मनाया था। तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
सौंदर्य, शुद्धता और आत्मचिंतन का दिन
छोटी दिवाली को रूप चौदस भी कहा जाता है, विशेष रूप से उन परंपराओं में जहां इस दिन स्नान, शृंगार और आत्म-शुद्धि का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन और स्नान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति रूपवान व तेजस्वी बनता है। इसे “अभ्यंग स्नान” भी कहा जाता है।
घरों में दीपदान और पूजा
इस दिन भी लोग शाम को दीप जलाकर यमराज के लिए दीपदान करते हैं ताकि अकाल मृत्यु से बचा जा सके। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन यम दीपदान करता है, उसके घर में दीर्घायु और सुख-शांति बनी रहती है। कुछ स्थानों पर इस दिन काली माता और हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।
त्योहार से पहले का उत्साह
छोटी दिवाली को लेकर लोगों में एक अलग ही उत्साह और उमंग देखने को मिलती है। यह दिन वास्तव में मुख्य दिवाली की पूर्व संध्या जैसा होता है, जिसमें तैयारी, मिलनसारिता और उम्मीदों की चमक होती है। बच्चे फुलझड़ियां और पटाखे चलाकर आनंद लेते हैं, महिलाएं घर की सजावट और पकवानों की तैयारी में लगी होती हैं और व्यापारी वर्ग इसे ग्राहकों के लिए उपहार वितरण और ऑफर्स के रूप में मनाता है।
तिथि और महत्वपूर्ण समय
तारीख: 19 अक्टूबर 2025
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर को रात 11:52 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर को रात 9:10 बजे तक
अभ्यंग स्नान का मुहूर्त: 19 अक्टूबर, प्रातः 5:30 से 6:45 तक (स्थानीय समय अनुसार भिन्न हो सकता है)
बता दें कि, छोटी दिवाली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धार्मिक श्रद्धा, सामाजिक जुड़ाव और पारिवारिक प्रेम का सुंदर संगम है। यह दिन हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर, और विभाजन से एकता की ओर बढ़ने का संदेश देता है।

