- फरमान के अरमान पर फिरा पानी, मदद की सरकार से लगाई गुहार
- गुजारा करने के लिए मजदूरी कर रहा है नेशनल मेडलिस्ट एथलीट
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में चार-चार पदक जीत कर सहारनपुर का नाम रोशन करने वाले एथलीट का भविष्य क्या वर्तमान भी घुप्प अंधेरे में है। जानकर हैरानी होगी कि पापी पेट के सवाल पर यह एथलीट जवाब मांग रहा है पूरे तंत्र से। हाकिम से और हुकूमत से भी। आखिरकार, यह खिलाड़ी फलों की पेटियां उठा रहा तो कभी दिहाड़ी मजदूरी कर दो जून की रोटी जुटा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित यह खिलाड़ी सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है।
सहारनपुर के हौजखेड़ी गांव का रहने वाला मोहम्मद फरमान चार बार पैदल चाल की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत चुका है। फरमान ने साल 2016 में नेशनल प्रतियोगिता के 10 किलोमीटर प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। 2017 दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में हुई वॉकिंग चैंपियनशिप में भी फरमान ने कांस्य पदक हासिल किया था।
इसके अलावा 2019 गुंटूर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी फरमान ने कांस्य पदक जीता था। इस साल के फरवरी महीने में हुई छठी राष्ट्रीय ओपन और पहली अंतरराष्ट्रीय पैदल चाल प्रतियोगिता में फरमान ने कांस्य पदक जीता था। चेन्नई में हुई इस प्रतियोगिता में विदेशी खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया था।

खेल प्रतियोगिता में अच्छे प्रदर्शन के चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फरमान को नगद पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चार पदक जीतने वाले एथलीट को अपनी पढ़ाई और डाइट के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है।फरमान का कहना है कि करंट लगने से उसके पिता की मौत हो गई थी।
परिवार में मां, बहन, भाई है। अपना गुजारा करने के लिए वह मजदूरी करता है। फरमान को अपनी पढ़ाई और डाइट के लिए मंडी समिति में रात के समय फलों की पेटियां उठानी पड़ती है। इसके अलावा फरमान को प्रेक्टिस करने में भी दिक्कत आ रही है।
डॉ भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण कार्य चलने और कारोना के कारण खेल गतिविधियों पर ब्रेक लगा हुआ है। ऐसे में फरमान जान का जोखिम लेकर अम्बाला हाईवे पर अभयास करता है। हाईवे पर दौड़ते हुए दुर्घटना का भी खतरा बना रहता है। फरमान ने उत्तर प्रदेश सरकारऔर केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

