जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बिलासपुर जिले के बरठीं क्षेत्र में मंगलवार शाम को भल्लू पुल के पास हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। भारी बारिश के चलते पहाड़ी से चट्टानों और मलबे के गिरने से मरोतन से घुमारवीं जा रही एक निजी बस उसकी चपेट में आ गई। हादसे में 16 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक बच्चा अब भी लापता है।
पहले से संवेदनशील थी जगह, चेतावनी के बावजूद नहीं उठाए गए कदम
स्थानीय सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर कुलवंत सिंह पटियाल ने घटनास्थल से जानकारी देते हुए बताया कि यह क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील था। पहाड़ी से अक्सर मिट्टी और पत्थर गिरते थे, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित करने या कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए।
ग्रामीणों ने बारिश के बाद पहाड़ी में आई दरारों की जानकारी कई बार विभाग को दी थी, लेकिन आठ दिन पहले की चेतावनी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसका नतीजा यह दर्दनाक हादसा है।
कैसे हुआ हादसा?
दोपहर से लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की स्थिति बनी हुई थी। शाम करीब 6:30 बजे जब 32-सीटर बस मरोतन से घुमारवीं लौट रही थी, उसी समय भल्लू पुल के पास पहाड़ी से मलबा और विशाल चट्टानें सीधे बस पर आ गिरीं। बस की छत उखड़ गई और सवारियां मलबे में दब गईं।
बस में कुल 18 लोग सवार थे। इनमें से 16 की मौत हो गई, जबकि दो बच्चों — आरुषि (10) और शौर्य (8) को बचा लिया गया। स्थानीय निवासी आठ वर्षीय राहुल अब भी लापता है।
बचाव कार्य में जुटे स्थानीय लोग और NDRF
घटना के बाद स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और अपनी जान की परवाह किए बिना राहत कार्य शुरू किया। थोड़ी ही देर में पुलिस, प्रशासन और NDRF की टीम मौके पर पहुंच गई।
रात करीब 9 बजे एनडीआरएफ ने कमान संभाली। जेसीबी मशीनों, प्रशिक्षित जवानों और डॉग स्क्वाड की मदद से रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। अंधेरे के चलते जनरेटर से प्रकाश की व्यवस्था की गई।
एक ही परिवार के चार सदस्य हादसे में मारे गए
फगोग गांव के आरुषि और शौर्य की मां कमलेश कुमारी, उनके दो चचेरे भाई नक्श और आरव, और उनकी मां अंजना कुमारी की भी इस हादसे में मौत हो गई। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से पूरा गांव शोक में डूब गया है।
बस मालिक बच गया, नया परिचालक हादसे का शिकार
बस का मालिक राजकुमार पहले खुद कंडक्टरी कर रहा था, लेकिन बरठीं में उतर गया और नए परिचालक को बस सौंप दी। कुछ ही दूरी पर बस हादसे का शिकार हो गई और नए परिचालक की मौत हो गई। चालक की भी मौत हुई है।
हादसे में जान गंवाने वालों के नाम
बख्शी राम (भल्लू)
नरेंद्र (छत)
कृष्णलाल (थापना नरली)
रजनीश
चुन्नी (बरड़)
सोनू (कच्युत)
शरीफ खान (मलांगण)
बिमला (देण)
आरव
कमलेश
अंजना
नक्श (फगोग)
प्रवीण (डोहग)
कांता देवी (सियोथा)
संजीव (मैड)
एक परिचालक (नाम अज्ञात)
210 की मौतें मानसून में
प्रदेश भर में मानसून के दौरान अब तक 210 लोगों की मौत हो चुकी है। बिलासपुर में अब तक 8 मौतें हो चुकी थीं, जिनमें अब और 16 की जुड़ने से आंकड़ा बढ़ गया है।
राजनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर शोक
इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये, घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, सांसद अनुराग ठाकुर, पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, विधायक जीत राम कटवाल, और अभिनेत्री कंगना रणौत ने भी दुख प्रकट किया है।
सरकार और विभाग की लापरवाही सवालों के घेरे में
यह हादसा केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और अनदेखी का परिणाम भी है। जब क्षेत्रवासियों और अधिकारियों को पहले से खतरे की जानकारी थी, तब भी सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए?
अब यह सवाल उठता है कि क्या आने वाले समय में प्रशासन इससे सबक लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, या फिर ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी?

