- बच्चा वार्ड में हर समय रहते हैं 70 से 80 नवजात शिशु
- 40 हैं बेडों की संख्या और केवल सात वेंटीलेटर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल में पिछले दो सालों से नवजात शिशुओं को नर्सरी में इलाज के लिए आने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जहां पहले 40 से 50 नवजात ही विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए भर्ती होते थे। वहीं अब इनकी संख्या 70 से 80 तक हो गई है, लेकिन नवजात शिशुओं की नर्सरी में आज भी केवल 40 बेडों की ही व्यवस्था है। वहीं अगर नवजातों के लिए उपलब्ध वेंटीलेटरों की बात करे तो उनकी संख्या महज 7 है,
इनमें से एक वेंटीलेटर खराब है, जबकि केवल 6 ही चालू है। ऐसे में नवजातो को वेंटीलेटर के लिए भी वेटिंग में रहना पड़ रहा है। वहीं मेडिकल प्रशासन का कहना है एनआईसीयू में उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार करने के लिए शासन को लिखा गया है। जल्दी वहां से सुविधाओं को बढ़ाने के लिए आदेश आने वाले है।
मेडिकल के बच्चा विभाग में इस समय केवल 40 बेड है। जिन पर हर समय 70 से 80 बच्चों को रखा जाता है। एक बेड पर दो बच्चों को रखना मजबूरी है। क्योंकि बच्चों को लेकर आने वाले परिजन बड़ी उम्मीद से यहां आते हैं। ऐसे में उनके शिशु को भर्ती न किया जाए तो यह ठीक नहीं। नवजातों के इलाज के लिए कुल 14 सी पैप (कंटूनियर प्रेशर), बाई पैप मशीन 5 व केवल 7 वेंटीलेटर है। ऐसे में वेंटीलर पर आने वाले शिशुओ को काफी समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
मेडिकल के बच्चा विभाग में निजी व जिला अस्पतालों से बच्चों को रेफर किया जाता है। बताया जा रहा है कि निजी अस्पतालों में पहले तो बच्चे को सभी सुविधाएं देने की बात कहते हुए भर्ती कर लिया जाता है, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
पिछले दो सालों में नवजात शिशुओं की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए कोई आधुनिक नर्सरी नहीं होने पर वहां से भी नवजातों को मेडिकल के लिए ही रेफर किया जाता है। ऐसे में मेडिकल के पीकू वार्ड में नवजातों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।
शासन से की गई मांग
मेडिकल के बच्चा वार्ड खासकर पीकू व नीकू वार्ड में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए मेडिकल प्रशासन ने शासन को पत्र लिखा है। जल्दी ही वेंटीलेटरों व बेडों समेत नवजातों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है जिससे नवजातों को और अच्छा इलाज मिलेगा।
मेडिकल में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनता का विश्वास बढ़ा है। इसी वजह से यहां मरीजों खासकर नवजात शिशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। हमारे पास जितने भी संसाधन है
उनसे ही हम बच्चों को हर तरह की चिकित्सा सेवा देने का प्रयास कर रहे हैं। शासन से सेवाओं का विस्तार करने को लिखा गया है।
-डा. नवरतन गुप्ता, बाल रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज


