Sunday, February 15, 2026
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थानों पर सुनवाई नहीं, कप्तान के दफ्तर पर उमड़ रही भीड़

  • थानों पर जनता के साथ खराब व्यवहार की पुलिस की आ रही शिकायतें

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पिछले कुछ दिनों में एसएसपी दफ्तर पर शिकायतों का बोढ़ बढ़ा है। कारण साफ है कि थानों पर फरियादियों की सुनवाई नहीं होती। अगर सुन भी ली गई तो किसी न किसी हस्तक्षेप के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। वैसे भी थानों पर पुलिस के जनता के साथ खराब व्यवहार की शिकायतें भी कुछ ज्यादा ही हैं। इसी कारण फरियादियों का थानों पर से विश्वास उठता जा रहा है। ऐसे में लोग अपनी फरियाद लेकर कप्तान के दफ्तर पर पहुंच रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि कप्तान के आफिस फरियादियों की संख्या अब बीस-तीस नहीं बल्कि दो-ढाई सौ तक पहुंच गई है। पूरा मजमा पुलिस कार्यालय पर कई दिन से नजर आ रहा है।

शासन जन सुनवाई को लेकर बेहद गंभीर है। फरियादियों को अपनी समस्याओं को लेकर बेवजह अफसरों के पास दौड़ न लगानी न पड़े, इसके लिए ही तहसील दिवस और समाधान दिवस आयोजित किये जाते हैं। फिर भी लोगों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाता। अक्सर देखा जाता है कि जब पीड़ित व्यक्ति थाने पर जाता है तो उसकी सुनवाई नहीं हो पाती। पुलिस उसका शिकायती पत्र तो ले लेती है, लेकिन इसका उपयोग अक्सर दूसरे पक्ष से आर्थिक लाभ लेने में करती है। इससे पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता।

यहां तक कुछ मामले ऐसे भी आए हैं, जिनमें पुलिस शिकायतकर्ता के विरोध में ही गलत रिपोर्ट लगाकर भेज देती है। इससे पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए भटकता रहता है। हालात कुछ ऐसे हैं कि अब लोगोंं को सीओ स्तर से न्याय मिलने का भी भरोसा नहीं रह गया है। पीड़ित को आस रहती है कि यदि वह कप्तान से मिलेगा तो उसे न्याय मिल सकता है। इसी उम्मीद में पीड़ित कप्तान के दफ्तर पर चक्कर लगाते रहते हैं। एसएसपी दफ्तर पर आने वाली शिकायतों के आजकल अंबार लगे हैं। यह भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है।

अफसरों का भी नहीं थानेदारों में खौफ

अफसर जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर बैठकों में भी मातहत अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हैं और उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने की बात कहते हैं। यहां तक कि लापरवाही पर दंडित करने की बात कहने से भी गुरेज नहीं करते, लेकिन थानेदारों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता। नये कप्तान ने आते ही तमाम थानेदारों की बैठक लेकर अपने इरादों को साफ कर दिया और जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने के लिए निर्देशित किया। बावजूद इसके कप्तान के दफ्तर पर टूटती भीड़ थानेदारों की कार्यशैली को कटघरे मेें खड़ा करती है।

जमीनी विवाद और घरेलू हिंसा के मामले ज्यादा

कप्तान के दफ्तर पर आने वाली शिकायतों पर गौर करें तो अधिकतर मामले जमीन के विवाद और घरेलू हिंसा से जुुड़े होते हैं। जमीन के विवाद राजस्व विभाग से जुड़े होने की वजह से पुलिस इनके निस्तारण में लाचार दिखती है। ऐसे में पीड़ित को लगता है कि पुलिस मामले को जान बूझकर टाल रही है।

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