- 28 करोड़ से बहुरेंगे दिन, छह लेन की होगी पूरी रोड, चौड़ीकरण के लिए जगह पर्याप्त
- फुटपाथ भी बनेंगे, नालियां भी होंगी कवर्ड, टेंडर तैयार, एक साल में पूरा होगा काम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर की प्रमुख हापुड़ रोड के दिन बहुरने वाले हैं। स्मार्ट रोड की मानिन्द इस सड़क को विकसित किया जाएगा ।कागजी कार्रवाई अपने अन्तिम चरण में है। टेंडर तैयार है और जमीनी काम टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुरू हो जाएगा। काम शुरु होने के दिन से एक साल के भीतर इस स्मार्ट रोड पर आप फर्राटा भर सकते हैं।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अंडर में इस सड़क का चौड़ीकरण होना है। छह लेन की यह सड़क कुल 28 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता (एई) एससी शर्मा ने बताया कि सड़क दोनों तरफ से तीन-तीन लेन की होगी बीच में डिवाइडर होगा और इसका चौड़ीकरण हापुड़ अड्डा चौराहे से बिजली बम्बा बाईपास तक किया जाएगा। चौड़ीकरण के साथ साथ इस रोड पर बनने वाली नालियां पूरी तरह से कवर्ड होंगी।
इस रोड पर चलने के लिए फुटपाथ भी बनाए जाएंगे। इं. एससी शर्मा के अनुसार इसके लिए टेंडर तैयार है और टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद से एक साल के भीतर इस रोड को सिक्स लेन कर लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में सबसे खास बात यह है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए अलग से जमीन का अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा क्योंकि सिक्स लेन के लिए जितनी चौड़ी जमीन की जरुरत पड़ेगी उतनी जमीन पहले से ही विभाग के पास है।
बकौल एई इं. एससी शर्मा हापुड़ स्टैण्ड से लेकर बिजली बम्बा बाइपास तक जो सड़क है उसकी दोनों तरफ की चौड़ाई लगभग 100 से 110 फुट है जो कि सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रयाप्त है। इसी के चलते अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण करने की जरुरत नहीं पडेÞगी। इस संबध में लोक निमार्ण विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर स्वतंत्रपाल सिंह ने दो दिन पूर्व ही में लखनऊ में शासन स्तर पर इस प्रोजेक्ट पर चर्चा की।
उधर एई के अनुसार इस मार्ग पर उन्हे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की भी एनओसी मिलने में भी कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। बताते चलें कि पेड़ काटने के लिए सबसे पहले पीडब्ल्यूडी ने जिला स्तर पर फॉरेस्ट विभाग (डीएफओ) से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। जहां से पीडब्ल्यूडी के आवेदन पत्र को उत्तर प्रदेश शासन को भेजा गया और उत्तर प्रदेश शासन से केन्द्र की फॉरेस्ट मिनिस्ट्री को भेज दिया गया। बताया जाता है कि यहीं से कुछ अनापत्ति लगाकर इसे पीडब्ल्यूडी को वापस भेज दिया गया। पीडब्ल्यूडी अब दोबारा वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए आवेदन करेगा।