- एनजीटी ने उद्यमियों को दिया 30 सितंबर तक का समय
- पीएनजी का सेटअप तैयार करने में एक ही फैक्ट्री में खर्च होंगे लाखों रुपये
- प्रदूषण विभाग की ओर से किया जा रहा उद्यमियों का शोषण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एनजीटी ने उद्यमियों को पीएनजी से उद्योग चलाने के लिये सेटअप तैयार करने के लिये 30 सितंबर तक का समय दिया है, लेकिन पीएनजी सेटअप तैयार करना यहां उद्यमियों के लिये आसान नहीं होगा। एक फैक्ट्री का सेटअप तैयार करने में ही कंपनी को लाखों रुपये खर्च करने होंगे। उधर, जो जनरेटर पीएनजी से चलते हैं। वह भारत में बनते ही नहीं है। लाखों रुपये के जेनसेट विदेशों से लेने होंगे, जिनकी कीमतें लाखों में है। ऐसे में उद्यमियों की सामने समस्याएं आन पड़ी है कि वह किस तरह से कार्य को चालू रख सकें।
उद्यमियों को एक फैक्ट्री का संचालन करने के लिये कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। उन्हें कई विभागों से एनओसी लेनी होती है। उसके बाद कहीं जाकर उद्योग का संचालन होता है। एक फैक्ट्री को शुरू करने के लिये कभी नगर निगम, फायर विभाग, प्रदूषण विभाग न जाने कौन से विभाग से प्रमाण पत्र लेना होता है?
पहले उद्यमी फैक्ट्री लगाने के लिये परेशान होता है और फिर बाद में उसे सही प्रकार से चलाने के लिये भी उसे कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। वर्तमान में एनजीटी ने उद्योगों पर डंडा कर रखा है कि वह पीएनजी सेटअप लगाकर उद्योगों को चलाये। कोयले और डीजल का इस्तेमाल न करें, लेकिन मेरठ में हजारों की संख्या में ऐसी फैक्ट्री हैं जो इस समय प्रभावित हैं।
कोयले, डीजल का इस्तेमाल करने वाली हजारों फैक्ट्री
एनजीटी के आदेश हैं कि 30 सितंबर के बाद उद्यमी पीएनजी का इस्तेमाल करेंगे। जिन फैक्ट्रियों में वर्तमान में डीजल के जनरेटर का भी इस्तेमाल हो रहा है, उन्हें भी बदला जाये। मेरठ में छोटी बड़ी मिलाकर 20 हजार से भी अधिक फैक्ट्रियां हैं। इनमें अधिकांश फैक्ट्रियों में डीजल से चलने वाले ही जनरेटर लगे हैं। इसके अलावा कोयले का इस्तेमाल करने वाली फैक्ट्रियां भी हजारों में हैं। फैक्ट्रियों में बॉयलर में कोयले का इस्तेमाल होता है। इस तरह के एनजीटी के आदेशों से उद्यमियों का उत्पीड़न हो रहा है। यह संभव ही नहीं है कि पीएनजी का इस्तेमाल सही प्रकार से हो सके।
पीएनजी से चलने वाले जेनसेट नहीं उपलब्ध
शहर में सभी फैक्ट्रियों में डीजल से चलने वाले जेनसेट लगे हैं। अब एनजीटी से मिले लेटर में डीजल से चलने वाले जेनसेट को भी हटाने के लिये कहा गया है। सभी फैक्ट्रियों में डीजल से चलने वाले जेनसेट लगे हैं। इन्हें हटाना आसान नहीं होगा। एनजीटी उद्यमियों का शोषण कर रहा है। उन्होंने बताया कि पीएनजी से चलने वाले जेनसेट की कीमत लाखों में है। उन्हें खरीदना आसान नहीं होगा और आसानी से वह मिल भी नहीं पायेंगे। एक फैक्ट्री में एक जेनसेट लगाने में भी लगभग 50 लाख तक का खर्च आ सकता है ऐसे में उद्यमियों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
बॉयलरों में भी इस्तेमाल होगी हजारों यूनिट पीएनजी
सैकड़ों की संख्या में कंपनी ऐसी हैं, जिनमें बॉयलर लगे हैं। इन कंपनियों में पीएनजी सेटअप तैयार करने की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। क्योंकि मेरठ में पीएनजी की पाइपलाइन तो बिछी है, लेकिन अभी उतनी यूनिट यहां उपलब्ध नहीं है। जितनी फैक्ट्रियों को चाहिये होगी। ऐसे में बॉयलर में इस्तेमाल के लिये पीएनजी पूरी नहीं पड़ेगी। ऐसे में कोई भी सेटअप तैयार करना अभी आसान नहीं होगा। इससे उद्यमियों का सारा कार्य प्रभावित होगा और उन्हें हजारों लाखों का नुकसान झेलना पड़ेगा।

