जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित मतदाता धोखाधड़ी के खिलाफ विपक्षी सांसदों द्वारा आयोजित विरोध मार्च ने आज राजधानी दिल्ली में जोर पकड़ा। संसद भवन से भारत निर्वाचन आयोग (ECI) तक निकाले जा रहे इस मार्च को पुलिस ने बीच में ही रोक दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
क्या है मामला?
विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के सांसदों ने बिहार में चल रहे SIR कार्यक्रम और 2024 लोकसभा चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विरोध जताते हुए चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां की जा रही हैं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता खतरे में है।
पुलिस ने मार्च क्यों रोका?
दिल्ली पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति मार्च निकालने पर विरोध जताया और संसद मार्ग पर परिवहन भवन के पास भारी बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। पुलिस का कहना है कि चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को पत्र लिखकर 30 सांसदों को दोपहर 12:30 बजे तक मिलने के लिए बुलाया था। आयोग ने सभी सांसदों की सूची पहले से देने की शर्त भी रखी थी। हालांकि, विपक्ष सभी सांसदों को लेकर सामूहिक रूप से ECI कार्यालय जाना चाहता था, जिसे पुलिस ने रोक दिया।
मार्च में शामिल बड़े नाम
राहुल गांधी (कांग्रेस)
प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस)
अखिलेश यादव (सपा)
मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष)
शरद पवार (राकांपा)
संजय राउत (शिवसेना-यूबीटी)
टीआर बालू (द्रमुक)
महुआ मोइत्रा (टीएमसी)
सुष्मिता देव, ज्योतिमणि, संजना जाटव समेत कई महिला सांसद
सड़क पर प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर चढ़े नेता
मार्च रोके जाने पर विपक्षी सांसदों ने सड़क पर धरना दे दिया। अखिलेश यादव बैरिकेड के ऊपर से कूद गए और वहीं धरने पर बैठ गए। महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव और अन्य महिला सांसद भी बैरिकेड्स पर चढ़ गईं। नारेबाजी करते हुए सांसदों ने पोस्टर और बैनर लहराए, जिन पर लिखा था — “श्रीमान + वोट चोरी = लोकतंत्र की हत्या”।
राहुल गांधी बोले – ‘यह लड़ाई संविधान बचाने की है’
राहुल गांधी ने कहा, “यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह संविधान और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। हम साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहते हैं।”
प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “हमने हिम्मत दिखाई है, लेकिन सरकार डर गई है। यह कायरता है।”
जयराम रमेश का आरोप – ‘चुनाव आयोग अब चुराओ आयोग बन गया’
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमने आयोग को पत्र भेजकर शांतिपूर्ण मार्च की सूचना दी थी, लेकिन आयोग ने जवाब नहीं दिया। अब हमें रोकने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया है। यह संस्थाओं की गिरती साख का प्रतीक है।”
शशि थरूर ने उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “राहुल गांधी ने जो सवाल उठाए हैं, वे गंभीर हैं और ईमानदार जवाब के हकदार हैं। अगर लोगों के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह है, तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि उसे दूर करे।”
स्थिति अब भी तनावपूर्ण
पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश जारी है। वहीं विपक्ष का कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोका गया और जबरन हिरासत में लिया गया।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है।