- 24 जुलाई के बाद नहीं होगी शहर में सप्लाई
- घटिया बटर और पाउडर हो गया खत्म
- पराग संस्था आर्थिक समस्या की तरफ बढ़ रही
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पराग शहर की नामचीन संस्था थी। इस कंपनी को 19 जुलाई को मात्र दस हजार लीटर दूध ही मिला। दूध की आपूर्ति जारी रखने के लिए पांच से छह मीटएसएमपी एवं 3.50 मीटरी टन व्हाइट बटर प्रतिदिन घोला जा रहा हैं। उपलब्ध एसएमपी मात्रा में से भी 4.0 टन एसएमपी नोएडा डेयरी प्लांट को भेजा जाना हैं और यदि दूध आवक मात्रा की यही स्थिति रही तो 23 जुलाई के बाद क्रांतिधरा को दूध की आपूर्ति नहीं हो पाएगी।
व्यवधान उत्पन्न हो सकता हैं। व्हाइट बटर भी मात्र 13.0 मी. टन ही बचा हैं। ऐसे में व्हाइट बटर की व्यवस्था तत्काल करने के लिए कहा गया है। दूध की जिस तरह से कमी हो रही है, उसको लेकर महाप्रबंधक ने भी सख्त नाराजगी व्यक्त की हैं। प्रभारी पीएण्डआई को भी पत्र लिखा गया हैं। कहा गया है कि दूध का उपार्जन मात्रा में वृद्धि करना सुनिश्किरें।
हो रही कमी के बारे में भी पूछा गया है। दूध मूल्य भुगतान में विलंब के कारण भी दूध उपार्जन मात्रा में कमी होना बताया गया है। रक्षा बंधन एवं जन्माष्टमी का पर्व आ रहे हैं, जिस पर दूध की आपूर्ति ज्यादा होती हैं। ऐसे में दिक्कत पैदा होगी। बागपत और नाएडा का भुगतान अभी किसानों को नहीं किया गया। यातायात व्यय की अधिवक्ता को लेकर भी आपत्ति की गई है।

मोहिद्दीनपुर स्थित हरबंश डेयरी के पास नदिंनी ब्रांड का एसएमपी उपलब्ध है, उसे खरीदा जाए, ताकि भविष्य में दूध का संकट से बचा जा सके। इसकी कवायद भी की जा रही हैं, लेकिन संस्थान आर्थिक तंगी से जूझ रहा हैं। महत्वपूर्ण बात यह है दो माह पहले ही दूध विकास मंत्री मेरठ आये थे, तब पराग संस्थान के अधिकारियों ने जो रिपोर्ट उन्हें सौंपी थी, उसमें संस्थान को बचत में दर्शाया गया था।
इस तरह के फर्जी आंकड़ों को पेश कर अधिकारी आखिर क्या जताना चाहते हैं, जो वास्तविकता है, उसे सामने क्यों नहीं लाया जाता हैं। चार माह से ट्रांसपोर्टरों का बकाया चल रहा है, जिसका भुगतान नहीं होने से दूध लाने में दिक्कत हो सकती हैं। अचानक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बंद हो गया तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी। यह स्थिति उस पराग संस्थान की है, जो कभी टॉप पर रहता था।
पूरे प्रदेश में दूध खरीदने के मामले में अव्वल था। आखिर ऐसा क्या हो गया है कि पराग संस्थान लगातार डाउन हो रहा हैं। इसके लिए जवाबदेही आखिर किसकी हैं? जो स्टाफ इस संस्थान को गर्त भी ले जा रहा है, उस पर कार्रवाई करने से क्यों बचा जा रहा हैं? इसमें कमिश्नर स्तर से हस्ताक्षेप करने की आवश्यकता हैं, तब जाकर इस संस्था को बचाया जा सकता हैं।

