Sunday, February 15, 2026
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वैक्सीनेशन को लेकर लापरवाह बन रही जनता

  • कोरोना का असर कम होना राहत की बात, लेकिन वैक्सीन के प्रति लापरवाही गंभीर
  • बड़ी संख्या में वैक्सीन हो रही बर्बाद, एक वॉयल में पांच डोज, चार घंटे में खत्म होनी चाहिए वॉयल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना का असर अब काफी कम हो चला है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह खत्म हो गया है। वहीं, दूसरी ओर इससे बचाव के लिए केवल और केवल वैक्सीन ही उपाय है। जिसको लेकर अब जनता भी लापरवाह नजर आ रही है। बड़ी संख्या में वैक्सीन की बर्बादी हो रही है, जो सीधे तौर पर सरकार का नुकसान है।

जिले में वैक्सीन की सप्लाई जिला अस्पताल में एनएनएम ट्रेनिंग सैंटर पर बनी कोल्ड चेन से होता है। यहां से पूरे जिले में बने सेंटरों पर वैक्सीन की जरूरत के मुताबिक सप्लाई होती है, लेकिन पिछले कुछ समय से जनता में वैक्सीन लगवाने को लेकर उदासीनता देखी जा रही है।

53 लाख डोज लग चुकी

कोरोना वैक्सीन पिछले साल जून माह में आई थी जब कोरोना की दूसरी लहर समाप्त होने जा रही थी। उस समय करीब 300 वैक्सीनेशन कैंप लगाए गए थे। जहां बड़ी संख्या में आम लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगाई गई थी, लेकिन अब जिले में कोरोना के मामले लगातार कम हो रहे हैं तो जनता भी वैक्सीन को लेकर उदासीन होती जा रही है।

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अभी तक पूरे जिले में प्रत्येक व्यक्ति को दूसरी डोेज के अनुसार कुल 53 लाख वैक्सीन लगाई जा चुकी है। जबकि अब भी बड़ी संख्या ऐसे लोगों की मौजूद है, जिनको वैक्सीन नहीं लगी है। कह सकते हैं कि जनता अब वैक्सीन को लेकर लापरवाह बनती जा रही है।

तीन से चार माह में वैक्सीन हो जाती है एक्सपायर

कोरोना वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए ठंडा वातावरण चाहिए होता है, जो जिला अस्पताल में बने कोल्ड चेन में हैै। यहां वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए सभी तरह के इंतजाम है, लेकिन यहां चार माह पहले आया वैक्सीन का बैच एक्सपायर होेने जा रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि लोग अब वैक्सीनेशन को लेकर ज्यादा जागरूक नहीं है। ऐसे में बड़ी मात्रा में वैक्सीन के खराब होने का खतरा लगातार बना है।

जिले में इस समय कुल 65 वैक्सीनेशन सेंटर

पूरे जिले में इस समय कुल 65 वैक्सीनेशन सेंटर मौजूद है। जहां लोगों को वैक्सीन लगाने की सुविधा है, लेकिन देहात में वैक्सीन लेने वाले लोगों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसकी वजह यह है कि कोरोना के खतरे को लेकर लोग अब लापरवाह बनते जा रहे हैं। एक वॉयल में पांच खुराक होती है, जबकि वॉयल के खुलने के बाद इसमें मौजूद वैक्सीन चार घंटे तक ही सुरक्षित रहती है। ऐसे में बची हुई वैक्सीन खराब हो रही है।

1.2 प्रतिशत वैक्सीन हो रही खराब

कोरोना वैक्सीन की जितनी डोज इस समय कोल्डचेन में मौजूद है। उसमें से 1.2 प्रतिशत डोज खराब हो रही है। यानी एक लाख डोज में से 12 सौ डोज लगातार खराब हो रही है। अब यह आंकड़ा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन खराब होने वाली वैक्सीन को कैसे बचाया जाए या जिन लोगो ने वैक्सीन नहीं ली है उनको वैक्सीन लेने के लिए किस तरह जागरूक किया जाए यह बड़ा सवाल है।

डा. प्रवीण गौतम जिला प्रतिरक्षण अधिकारी का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन लेने से बच रहे हैं। ऐसा क्यों है यह कहना मुश्किल है? किसी को जबरदस्ती वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में खराब होने वाली वैक्सीन को कैसे बचाया जाए यह बड़ा सवाल है।

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