- भ्रष्टाचार में डूडा आफिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट आवास के मामले में भी भ्रष्टाचार हो रहा है, जिसको अधिकारी रोक नहीं पा रहे हैं। इस भ्रष्टाचार में डूडा आॅफिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, पीएम आवास के लिए पात्र लोगों को ढाई-ढाई लाख रुपये केन्द्र व यूपी सरकार दे रही है।
ये धनराशि मकान निर्माण के दौरान दी जा रही है, लेकिन इसमें भी भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। पात्र व्यक्ति से पहले डूडा आॅफिस के लोग पांच से 10 हजार रुपये पहले ही तय कर लिये जाते हैं, जिसके बाद ही पात्र व्यक्ति के एकाउंट में ढाई लाख की धनराशि को किश्तों में डाला जाता है।
भ्रष्टाचार की बात सार्वजनिक हो गई है। चल रहे भ्रष्टाचार की बात पार्षदों तक पहुंची तो उन्होंने बवाल खड़ा कर दिया है। कुछ पार्षदों ने नगरायुक्त को लिखकर दिया है कि इस भ्रष्टाचार में शामिल डूडा आॅफिस के लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पार्षद जनता के साथ सोमवार को डूडा आॅफिस पर इस मुद्दे को लेकर धरने पर भी बैठेंगे।
पीएम आवास निर्माण के लिए सरकार गरीबों को ढाई लाख दे रही है। ये धनराशि चार किश्तों में पात्र व्यक्ति के बैंक एकाउंट में डूडा आॅफिस से डाली जाती है। पात्र व्यक्ति यह धनराशि लेने के लिए कई दिनों तक डूडा आॅफिस के चक्कर लगाते हैं, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।
उन्हें इशारा कर दिया जाता है कि सरकार से धनराशि तो आ गई है, लेकिन पात्र व्यक्ति के बैंक एकाउंट में धनराशि की किश्त तभी डाली जाएगी जब पांच से 10 हजार रुपये पहले नहीं दे दिये जाते हैं। इस तरह से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। मामले को लेकर पार्षद आक्रामक हो गए हैं।
पार्षदों के पास डूडा आॅफिस के इस कृत्य की सूचना पहुंची तो पार्षद आग बबूला हो गए हैं। पार्षदों ने सोमवार को जनता को साथ लेकर डूडा आॅफिस में धरने पर बैठने का ऐलान किया है। क्योंकि इस पूरे मामले में डूडा के पीओ पर भी अंगूली उठ रही है, हालांकि पीओ का कहना है कि इस मामले में किसी को कोई शिकायत है तो उसकी जांच कराकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कई कंपनी हो चुकी है ब्लैकलिस्ट
तत्कालीन डीएम अनिल ढींगरा पीएम आवास में भ्रष्टाचार को लेकर कई कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर चुके हैं। अब फिर से वहीं कंपनी शहर में पीएम आवास योजना को लेकर काम करना चाहती है। वर्तमान में जो कंपनी काम कर रही है, उस पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसमें भी किसी अधिकारी की भागीदारी होना बताया जा रहा है, जिसकी जांच पड़ताल होने के बाद सच सामने आ जाएगा।

