जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात के भावनगर पहुंचे, जहां उन्होंने ₹34,200 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम में भाग लेते हुए भारत को आत्मनिर्भर समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में कई अहम घोषणाएं कीं।
प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, “यह कार्यक्रम सिर्फ भावनगर का नहीं, बल्कि पूरे भारत का है। भारत को आत्मनिर्भर बनाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
आत्मनिर्भर भारत: 100 दुखों की एक दवा
मोदी ने अपने भाषण में आत्मनिर्भरता को देश की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि, “दूसरे देशों पर निर्भरता ही भारत का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो हमें ‘चिप हो या शिप’, सब कुछ भारत में ही बनाना होगा।”
उन्होंने बताया कि भारतीय समुद्री क्षेत्र को सशक्त करने के लिए 70,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे और ‘वन नेशन, वन पोर्ट प्रोसेस’ तथा ‘वन नेशन, वन डॉक्यूमेंट’ जैसी योजनाएं लागू की जाएंगी।
कांग्रेस पर निशाना, शिपिंग सेक्टर की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि, “आजादी के बाद कांग्रेस की नीतियों ने देश के युवाओं का बहुत नुकसान किया। विदेशी जहाजों पर निर्भरता ने भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर को कमजोर कर दिया।”
उन्होंने बताया कि करीब 6 लाख करोड़ रुपये हर साल विदेशी शिपिंग कंपनियों को किराए में दिए जाते हैं, जो देश के रक्षा बजट के बराबर है।
सेवा पखवाड़ा और नवरात्रि की बधाई
पीएम मोदी ने बताया कि सेवा पखवाड़ा के दौरान एक लाख से अधिक लोगों ने रक्तदान किया है और देशभर में स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने नवरात्रि के आगमन पर लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, “इस बार जीएसटी में राहत के कारण बाजारों में रौनक ज्यादा देखने को मिलेगी।”
समुद्री शक्ति की ओर भारत का अगला कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने देश को फिर से एक समुद्री महाशक्ति बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता जताई और कहा कि अब बड़े जहाजों को भी ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ की मान्यता दी गई है। इससे देश में शिपबिल्डिंग और लॉजिस्टिक इंडस्ट्री को नई ताकत मिलेगी।
मुख्य घोषणाएं संक्षेप में
₹34,200 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
समुद्री क्षेत्र में ₹70,000 करोड़ से अधिक के निवेश की योजना
‘वन नेशन, वन पोर्ट प्रोसेस’ की शुरुआत
हर साल विदेशी शिपिंग पर ₹6 लाख करोड़ का खर्च रोकने की तैयारी
आत्मनिर्भर भारत पर जोर: “चिप हो या शिप, सब कुछ भारत में बने”

