यदि मुगल दरबार में मोबाइल फोन की घुसपैठ हो गई होती, सम्राट अकबर तख़्त पर हाथ में लेटेस्ट आईफोन-ए-आजम लिए विराजमान होते। बीरबल…वो तब सिर्फ हाजिरजवाब नवरत्नी दरबारी नहीं, बाअदब शाही इंफ्लुएंसर होते। उनके इंस्टाग्राम पर हैश टैग बीरबल ट्रेंड करता। दरबार में दरबारी खत और फरमान नहीं पढे जाते, व्हाट्सएप चेक होते। यदि कोई दरबारी, दरबार में बादशाह सलामत से नजरें बचाकर कैंडी क्रश खेलता पाया जाता तो सोचिए उसे क्या सजा दी जाती?
घोड़े पर सवार दूत नदी नाले पार करके दरबार में आने की जगह जूम मीटिंग में सलाम बोलते और धोखा देकर बंदी बनाने की आधी मुश्किल यूं ही निपट जाती। मोबाइल की रिंगटोन गूंजती, मुगल-ए-आजम कॉलिंग…! सम्राट अकबर दरबार में घोषणा कर सकते थे, हमने सोचा है कि अब से सभी रजवाड़ों के राजाओं के साथ एक वाट्सएप ग्रुप बना लिया जाए ‘राजसी ठाठ’ नाम से। बीरबल तुरंत बोलते, जहांपनाह, कृपया ग्रुप के एडमिन मत बनिएगा, वरना कोई निकल नहीं पाएगा।
उधर तानसेन अब रियाज नहीं कर रहे होते, बल्कि ‘तानसेन म्यूजिÞक’ नाम से यूट्यूब चैनल चला रहे होते। हर नई रागिनी का प्रीमियर शॉर्ट्स में हो रहा होता, नीचे लिखा होता, डांट फॉरगेट टू लाइक शेयर एंड सबस्क्राइब। दरबारी एक-दूसरे की वीडियो पर कमेंट करके तारीफ करते, ‘वाह वाह, क्या क्लासिकल कंटेंट है!’ एक मंत्री वीडियो बना रहा होता, ‘ए क्लासिकल नाइट इन दरबार..’ ऐसे में कभी अकबर भी झुंझलाकर पूछ बैठते , ‘ये शाही दरबार है या ब्लॉगर मीट?’ तो बीरबल बोलते, ‘हुजूर, अब हुकूमत ‘रील्स’ में है, और विरोध ‘कमेंट्स’ में।’
ऐसे में ही अगर कभी कोई मीम बना डालता, ‘जब बादशाह अकबर गूगल मैप्स के भरोसे शिकार पर निकले!’ मीम वायरल हो ही जाता तो अकबर गुस्से में बोलते , ‘बीरबल, यह मजाक है या शाही तौहीन?’ बीरबल बोलते , ‘जहाँपनाह, अब मीम के रूप में हमें मौका मिलता है कि हुजूर रियाया के दिमाग को पढ़ सकते हैं। ट्रोलिंग अब एक नया टूल बन गया है।’ तब अकबर कहते, ‘फिर अब हम दरबार से हटकर, बोट हाउस पर मुखातिब होगे, वहां कम से कम मीम्स बनाए जाने का खतरा तो नहीं होगा।
शहजादे सलीम टिकटाक स्टार बन जाते। अनारकली इंस्टा पर जिंदा रहती। अंतत: बीरबल एक दिन सबका मोबाइल जब्त करवा देते और कहते, ‘जहांपनाह, मोबाइल से इतिहास नहीं बनता, इतिहास अनुभव और विवेक से बनता है। मोबाइल से हम पोस्ट कर सकते हैं, पर परंपराएं नहीं रच सकते। अगर उस जमाने में मोबाइल होता, तो शायद अबु-फजल ‘अकबरनामा’ न लिखते, बल्कि पॉडकास्ट बना देते, ‘दिल्ली दरबार लाइव’ और तब अकबर मुस्करा कर कहते, ‘बीरबल, तुम सचमुच स्मार्ट हो… पर टेक कंपनियों से ज्यादा महंगे पड़ रहे हो!’बीरबल आदाब करते हुए रुख्सत हो जाते।

