Sunday, February 25, 2024
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10 करोड़ के प्रोजेक्ट पर लग सकता है ग्रहण

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  • गंदगी का अंबार, माधवपुरम की ग्रीन बेल्ट पर खर्च किए जाएंगे 10 करोड़ रुपये
  • विशेषज्ञयों का दावा, नीचे दबी है पाइप लाइन एनजीटी की लगी है नजर
  • हाउस टैक्स, स्ट्रीट लाइट और पेयजल की समस्याओं से पूरा शहर परेशान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जल निगम और सीएंड डीएस की मार्फत 10 करोड़ खर्च करने को उताबले नगर निगम अफसरों के इस माधवपुरम ग्रीन बेल्ट के प्रोजेक्ट को लेकर सवाल खडेÞ होने लगे हैं। इलाके के लोग पूछ रहे हैं कि बजाय 10 करोड़ खर्च करने के निगम प्रशासन यदि माधवपुरम नाले की सफाई
और इसके पानी को अन्यत्र किसी बड़े नाले में गिरवाने का यदि इंतजाम करा दें तो शहर की इस पुराने इलाके की गंदगी व जलभराव की समस्या हमेशा के न केवल समाधान हो जाएगा बल्कि ग्रीन बेल्ट के नाम पर जिस 10 करोड़ के प्रोजेक्ट को लेकर निगम के आला अफसर उतावले नजर आ रहें ना तो उसकी जरूरत पडेÞगी और सरकार के 10 करोड़ भी बच जाएंगे।
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इसी के चलते जानकारों का कहना है कि निगम के इस 10 करोड़ के प्रोजेक्ट पर शासन का बैरियर भी गिर सकता है। कुछ लोगों ने इसको लेकर अध्ययन शुरू कर दिया है। जिसके चलते माना जा रहा है कि निगम प्रशासन के इस प्रोजेक्ट पर शासन में आपत्तियां लग सकती हैं और यह लटक सकता है।
चारों ओर गंदगी का अंबार
माधवपुरम नाले से सटी ग्रीन बेल्ट जो एक गंदे व रुके हुए नाले में तब्दील हो चुकी है, उस पर लगाए गए हरे भरे पडेÞ नाले की सफाई न होने तथा केमिकल युवक पानी की वजह से सूखकर ठंूठ में तब्दील हो चुके हैं और अक्सर इसका दूषित पानी पीकर पहले कई बार कुत्ते और अन्य पशुओं की मौत हो चुकी है, उसकी सुध लेने की फुर्सत लगता है निगम अफसरों को नहीं है, लेकिन माधवपुरम की ग्रीन बेल्ट के सौंदर्यीकरण के नाम पर 10 करोड़ के प्रोजेक्ट लाने में देरी नहीं लगायी। लोगों का कहना है कि प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ खर्च करने से बेहतर है कि नाले की सफाई कराएं।
माधवपुरम की जो सड़कें नाले का पानी रोड पर आने की वजह से टूट गयी हैं। वहां से पैदल निकला भी दुश्वार हैं, यदि उनकी मरम्मत करायी जाए तो कम से कम आए दिन होने वाले सड़क हादसे खासतौर से रात में जो सड़क हादसे होते हैं। उनसे से निजात मिल सकेगी, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। एक अन्य शख्स जो आरटीआई एक्टिविस्ट भी है नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि जब पुरानी ग्रीन बेल्ट का रखरखाव निगम नहीं रख सकता तो फिर अब इतनी बड़ी रकम खर्च करने से क्या हासिल करना चाहते हैं।

ग्रीन बेल्ट के नीचे पाइप लाइन

जिस ग्रीन बेल्ट पर करीब 10 करोड़ खर्च करने का प्लान है, उस ग्रीन बेल्ट के नीचे पानी या फिर सीवर की कोई पुरानी पाइप लाइन भी दबी है। जानकारों का कहना है कि इसके अलावा बड़ी बात यह है कि निगम के इस प्रोजेक्ट पर एनजीटी भी लगातार नजर रखे हुए हैं। जिस तर्ज पर प्रोजेक्ट की बात कही जा रही हैं उसके चलते आशंका है कि एनजीटी के सामने यह टिकने वाला नहीं।
और भी गम है शहर में
नगर निगम के पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार का कहना है कि स्वच्छता रैंकिंग में फजीहत कराने के बाद भी निगम प्रशासन का रवैया बदला नजर नहीं आ रहा है। ग्रीन बेल्ट में ऐसा क्या जो कमरों से न निकलने वाले अफसर रोड पर दौड़ रहे हैं। शहर में बिजली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट की गंभीर समस्या है। इसके अलावा हाउस टैक्स की समस्या भी कम गंभीर नहीं।
इसको लेकर निगम की बैठक में मारपीट हो गयी थी, लेकिन इन समस्याओं से ज्यादा अफसरों की फेहरिस्त में ग्रीन बेल्ट है। मुनासिब होता कि पहले बाकि समस्याओं पर काम किया जाता। रही माधवपुरम की ग्रीन बेल्ट की बात तो उसका रखरखाव तो नाल साफ कराकर भी किया जा सकता है। बस इतना इंतजाम कर कर दिया जाए कि नाले का पानी ग्रीन बेल्ट में ना जाए।
प्रोजेक्ट का करेंगे अध्ययन
इस प्रोजेक्ट का अध्ययन किया जाएगा। इसी प्रकार का एक प्रोजेक्ट फूलबाग को लेकर भी लाया गया था। उस पर शासन स्तर पर आपत्ति लगा दी गयी हैं। देखते हैं इसमें क्या व्यवस्थाएं दी गयी हैं। -डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद राज्यसभा
सभी चीजों का है ध्यान
माधवपुरम ग्रीन बेल्ट को लेकर जो प्रोजेक्ट है उसमें सभी तकनीकि चीजों का ध्यान कार्यदायी संस्था द्वारा रखा जा रहा है। अफसरों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ जानलकारी दी है। सभी चीजें देखी जा रही हैं। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर, मेरठ
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