खेकड़ा निवासी सचिन यादव से टोक्यो में थी पदक की उम्मीद
देश की झोली में पदक आने में बाधा बन गई बारिश
परिजन बोले, बारिश न होती तो देश को पदक दिलाता सचिन
नीरज त्यागीl
खेकड़ा: टोक्यो की सरजमीं पर विश्व एथलेटिक चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) में देश की नई उम्मीद बनकर उभरे सचिन यादव की राह में बारिश की बूंदे विलेन बन गई। जिससे वह तेज भागकर प्रेशर से भाले को नहीं फेंक पाया और महज 40 सेमी से पदक से चूक गया। परिजनों का मानना है कि अगर बारिश न आती तो आज खेकड़ा का लाल देश की झोली में पदक पक्का डालता, लेकिन वह जल्द ही इस कसक को भी पूरा करेगा और देश के तिरंगे की शान को बढ़ाएगा।
टोक्यो में विश्व एथलीट चैंपियनशिप चल रही है। प्रतियोगिता में खेकड़ा निवासी सचिन यादव ने जैवलिन थ्रो में प्रतिभाग किया। सचिन के खेल का परिजनों, रिश्तेदारों और अन्य दोस्तों बेसब्री से इंतजार था। उम्मीद थी कि सचिन देश की झोली में पदक डालेगा। जब उसने पहला भाला फेंका तो हर कोई हैरान रह गया। क्योंकि सचिन पहले भी प्रतियोगिता में रिकॉर्ड अपने नाम कर चुका है।
गुरुवार को सुबह से ही उसके खेल को देखने के लिए इंतजार होने लगा था। जिसके चलते सचिन के परिवार के साथ आस पड़ोस के लोग भी उसके घर में टीवी पर चिपके हुए थे। प्रतियोगिता में जब सचिन का नंबर आया तो उससे पहले हलकी बारिश थी, लेकिन उसके नंबर पर बारिश थोड़ी तेज हो गई। जिससे वहां मैदान गीला होने पर वह महज 40 सेमी. से पीछे रह गया।
यानी वह चौथे स्थान पर रहा। परिजनों और लोगों मानना है कि बारिश ने उसके खेल में विलेन की भूमिका अदा की। क्योंकि बारिश के चलते ट्रैक भी गिला हो जाता है। वहीं खिलाड़ी भी उस ताकत का प्रयोग नहीं कर पाता जिसका उसे करना चाहिए। यदि बारिश नहीं होती तो वह ओर ज्यादा बेहतर करके पदक पक्का लेकर आता। सचिन के पिता नरेश यादव का कहना है कि वह दिन रात देश को पदक दिलाने की तैयारी में लगा रहता है। ओलंपिक में पदक जीतना उसका लक्ष्य है। सबकुछ सही रहा तो वह देशवासियों की झोली में पदक डालने में जरूर कामयाब होगा।

