जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: देश की दिवालिया हो चुकी दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) पर संकट और गहराता जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बाद अब बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने भी कंपनी और उसके पूर्व निदेशक अनिल अंबानी को धोखाधड़ी (फ्रॉड) का दोषी बताया है। बैंक ने इस संबंध में 8 अगस्त को एक पत्र कंपनी को भेजा, जिसमें कंपनी और संबंधित व्यक्तियों के खातों को “फ्रॉड” घोषित किया गया है।
करोड़ों का लोन बना फ्रॉड केस?
बैंक ऑफ इंडिया ने अगस्त 2016 में RCom को ₹724.78 करोड़ का कर्ज दिया था, जिसका उद्देश्य कंपनी के रोज़मर्रा के खर्च, संचालन और पुराने कर्ज का भुगतान करना था। लेकिन बैंक का आरोप है कि RCom ने न केवल लोन की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि फंड्स का गलत इस्तेमाल भी किया।
BOI की रिपोर्ट के अनुसार?
यह खाता 30 जून 2017 को ही NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) बन गया था।
कर्ज की राशि न चुकाने पर अब इसे फ्रॉड अकाउंट घोषित किया गया है।
बैंक ने कंपनी की एक और सहयोगी इकाई, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, के खिलाफ भी कार्रवाई की है, जिस पर ₹51.77 करोड़ का बकाया है।
CBI की छापेमारी और गंभीर खुलासे
बढ़ते आरोपों के बीच CBI ने हाल ही में मुंबई में दो जगहों पर छापेमारी की – एक अनिल अंबानी के घर पर और दूसरा RCom के कार्यालय में। यह कार्रवाई SBI की शिकायत पर आधारित है, जिसमें RCom पर ₹2,929.05 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
CBI की जांच में सामने आया?
लोन की रकम का अन्य कंपनियों को अवैध ट्रांसफर किया गया।
फर्जी बिलों के ज़रिए पैसों को हेर-फेर किया गया।
पैसों को रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों में घुमाया गया।
अनिल अंबानी का पक्ष?
इन गंभीर आरोपों पर अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं। अंबानी कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और अपनी सफाई पेश करेंगे।
बढ़ती मुश्किलें और संभावित नतीजे
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों की ओर से लगातार मिल रहे धोखाधड़ी के प्रमाण और CBI की सक्रियता के चलते अनिल अंबानी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है।
यदि सभी आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड मामलों में से एक बन सकता है।

