सुनील कुमार महला |
हरिवंशराय बच्चन जी ने अपनी एक कविता ‘आजादी की पहली वर्षगांठ’ में बड़े ही खूबसूरत शब्दों में यह लिखा है -‘… है आज उचित उन वीरों का करना सुमिरन,जिनके आँसू, जिनके लहू, जिनके श्रमकण से हमें मिला है दुनिया में ऐसा अवसर।हम तान सकें सीना, ऊँची रक्खें गर्दन। आज़ाद कंठ से आज़ादी का करें गान। आज़ादी का दिन मना रहा हिन्दोस्तान…।’
संपूर्ण भारत देश आज आजादी के जश्न में डूबा हुआ है। देश का बच्चा बच्चा बहुत ही उत्साहित और प्रफुल्लित है। आजादी का यह राष्ट्रीय पर्व हर कहीं खुशियां, उमंग और उल्लास घोलता नजर आता है। एक नया जोश, नया जज्बा हमारे खून में दौड़ने लगता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब देश के कोने कोने में देशभक्ति गीत गूंजते हैं तो ये कानों में एक अलग ही मिठास, देशभक्ति की धुन घोलते हैं। मिठाईयां बांटी जाती हैं, अनेक प्रकार के सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रमों, परेड व भाषण आदि का आयोजन हर कहीं उल्लासपूर्ण, समारोहपूर्वक किया जाता है। स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों, विभिन्न सार्वजनिक स्थानों से देशभक्ति की लहर उठती दिखाई देती है। हरेक दिल मानों महावीर प्रसाद ‘मधुप’ जी की ये पंक्तियां गुनगुनाता नजर आता है –
‘ धन्य सुभग स्वर्णिम दिन तुमको, धन्य तुम्हारी शुभ घड़ियाँ। जिनमें पराधीन भारत माँ की खुल पाईं हथकड़ियाँ। भौतिक बल के दृढ़-विश्वासी, झुके आत्मबल के आगे, सत्य-अहिंसा के सम्बल से भाग्य हमारे फिर जागे…।’
आज आजादी के हम 76 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं और आज संपूर्ण विश्व को भारत की एक नई तस्वीर, नया भविष्य दिखता है। ‘हर घर तिरंगा’ भारत की आज़ादी के 77वें वर्ष के उपलक्ष्य में देश के आम लोगों को अपने घर पर तिरंगा झंडा फहराने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ‘आज़ादी के अमृत’ महोत्सव के तत्वावधान में चलाया जा रहा एक अभियान है। वास्तव में, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
आज इस अभियान के तहत देश के सभी लोग तिरंगे के साथ सेल्फी खींचकर इंटरनेट पर अपलोड कर रहे हैं। देश के सभी स्थानों पर कोने कोने में आज तिरंगा लहरा रहा है। स्वयं भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर घर तिरंगा अभियान के तहत लोगों से सोशल मीडिया पर अपनी डीपी में तिरंगा लगाने का आग्रह किया है। हर कोई बहुत ही खुश हैं, लेकिन हर घर तिरंगा अभियान के साथ ही हमें हमारे देश की ध्वज संहिता का भी पूरा ख्याल रखना है, क्यों कि तिरंगा हमारी आन-बान-शान है। यह हमारा राष्ट्रीय ध्वज है और हमारा यह परम कर्तव्य बनता है कि हम राष्ट्रीय ध्वज संहिता का पूर्णतः पालन करें।
भारत सरकार ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय ध्वज ‘जहाँ ध्वज खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है।’ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के साथ हमारा संबंध हमेशा व्यक्तिगत से अधिक औपचारिक और संस्थागत रहा है। एक राष्ट्र के रूप में ध्वज को सामूहिक रूप से घर पर फहराना न केवल तिरंगे से व्यक्तिगत संबंध स्थापित करना है, बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बन जाता है।
हम सभी अपने घरों में तिरंगा अवश्य फहराये लेकिन ध्वज संहिता का हमेशा विशेष ध्यान रखें, क्यों कि हमें हर हाल में तिरंगे की आन बान और शान को संजो कर रखना है, क्यों कि हमने आजादी बहुत मुश्किलों को सहते हुए, बहुत सी कुर्बानियां देकर हासिल की है। अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहूतियां आजादी के यज्ञ में दी हैं। तिरंगा हमें अपने प्राणों से भी ज्यादा प्यारा है। वास्तव में, तिरंगा झंडा को फहराने से लेकर इसे सहेजकर तथा संभाल कर अच्छी तरह से रखने के लिए हम सभी को भारतीय ध्वज संहिता का पालन करना चाहिए। वैसे तो घर में झंडा रखने के लिए कोई खास तरीका नहीं है, लेकिन ध्वज को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हम सभी की स्वयं की है। ध्वज किसी भी तरह से खराब ना हो।
ध्वज को अच्छे से, संभाल कर रखा जाना चाहिए ताकि ध्वज को किसी प्रकार का नुकसान ना पहुंचे। हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि तिरंगे का अपमान करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। हमें अपने बच्चों को ध्वज संहिता के बारे में जानकारी देनी चाहिए। जानकारी देना चाहूंगा कि भारतीय ध्वज संहिता भारतीय ध्वज को फहराने व इसे प्रयोग करने के बारे में दिये गए निर्देश हैं। भारत का राष्ट्रीय ध्वज भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिरूप है। यह राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। सभी के मार्गदर्शन और हित के लिए भारतीय ध्वज संहिता-2002 में सभी नियमों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है। ध्वज संहिता-भारत के स्थान पर भारतीय ध्वज संहिता-2002 को 26 जनवरी 2002 से लागू किया गया।
ध्वज संहिता के कुछ महत्वपूर्ण नियम ये हैं कि जब भी कोई भी ध्वज फहराये तो ध्वज को सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। ध्वज को ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां से ध्वज स्पष्ट रूप से व अच्छी तरह से दिखाई दे। सरकारी भवनों पर ध्वज रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है। जानकारी देना चाहूंगा कि केंद्र ने भारत के ध्वज संहिता में संशोधन (भारत ध्वज संहिता संशोधन 2022) किया है, जिससे राष्ट्रीय ध्वज को दिन और रात दोनों समय फहराया जा सकता है।
पहले तिरंगा केवल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच ही फहराया जा सकता था। यहां पाठकों को यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि भारतीय ध्वज संहिता 26 जनवरी, 2002 को लागू हुई, एक व्यापक निर्देश के रूप में कार्य करती है जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग, प्रदर्शन और फहराने के लिए सभी कानूनों, परंपराओं, प्रथाओं और निर्देशों को एक साथ लाती है। भारतीय ध्वज संहिता में कहा गया है कि सार्वजनिक, निजी संगठन या शैक्षणिक संस्थान के किसी सदस्य को ध्वज की गरिमा और सम्मान के अनुरूप सभी दिनों और अवसरों पर, औपचारिक या अन्यथा, राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति है। यह भी कि तिरंगा वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और किसी भी व्यक्ति सलामी में नहीं झुकाया जा सकता है। ध्वज का उपयोग उत्सव के रूप में, या किसी भी प्रकार की सजावट के प्रयोजनों के लिए नहीं किया जा सकता है।
भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप और उनके चिह्न वाले झंडे केवल आधिकारिक प्रदर्शन के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। यहां यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि पहले के एक संशोधन में, सरकार ने मशीन से बने और पॉलिएस्टर के झंडे के उपयोग की अनुमति दी थी, जिन्हें पहले इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि राष्ट्रीय ध्वज को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। राष्ट्रीय ध्वज को फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि ध्वज को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।
यदि ध्वज किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचों-बीच या गाड़ी के दांयी ओर लगाया जाए। यह ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी कटा-फटा या मैला ध्वज नहीं फहराया जाता है। ध्वज केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है। किसी दूसरे ध्वज या पताका को राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाना चाहिए। ध्वज पर कुछ भी लिखा या छपा हुआ भी नहीं होना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाओं के साथ। जय जय। जय हिंद,जय भारत।
(आर्टिकल का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।)



