Saturday, February 14, 2026
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ध्यानमग्न होकर करें स्टडी

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कांस्टेंट यानी ध्यानमग्न और स्थिरचित्त होकर अध्ययन करना आपकी परीक्षाओं और सफलता की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अब जबकि एकादमिक परीक्षाओं, चाहे वह बोर्ड के हों, विश्वविद्यालयों के हों, या फिर कोई अन्य, का समय बस दो-चार महीनों की दूरी पर हैं तो आपके लिए ध्यानमग्न होकर पढ़ाई करने का कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।

’ ध्यानमग्न पढ़ाई के लिए सबसे जरुरी है कि अगली सिटिंग के लिए क्या पढ़ा जाना है, यह तय कर लें। उस विषय से संबंधित किताबें, रेफरेंस मैटिरियल, नोटबुक, रफशीट्स, पेन, पेंसिल जैसी सभी जरुरी चीजें अपने स्टडी टेबल पर पहले से ही सहेज कर रखें। पहले से न सहेजे होने के कारण हो सकता है कि आप सवेरे उठकर या शाम क ो मन बनाने के बाद भी आपका अधिक वक्त उन्हें इकट्ठा करने में लग जाएं और आप तनाव महसूस करने लगें।

’ कहते हैं कि ध्यानमग्न होकर पढ़ाई करने की अवस्था शुरुआत करने के दस से पंद्रह मिनटों में आती है। लेकिन यदि आप, चाहे सुबह हो या शाम का वक्त, अपने आसपास ध्यान भटकाने वाली आवाजों, गतिविधियों और गैजेट्स से धिरे हैं तो आपके लिए खुद को कॉन्संट्रेट कर पाना मुश्किल होगा। आमतौर पर यदि आप गंभीरता से पढ़ाई कर रहे हैं तो यह संभव नहीं है कि परिवार में कोई जानबूझकर आपके साथ टोका-टाकी करे। संभव है कि वे टीवी सेट्स भी बंद कर दें।

अपने मोबाइल फोन को साइलेंट मोड में करके अपने से इस प्रकार दूर रखें कि उसपर आपकी नजर न रहे। पड़ोस की हलचलों पर आपका नियंत्रण नहीं हो सकता, न ही आप वाहनों की आवाजाही रोक सकते हैं। लिहाजा, अच्छी घ्यानमग्न पढ़ाई के लिए सबसे बेहतर समय सुबह सवेरे या फिर शाम है जब गतिविधियां कम होती हैं।

’ यदि आप अपने अध्ययन में मन लगाने में कामयाब हो गए तो न केवल आपका आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि अगली सीटिंग के लिए आप अधिक उत्साही भी होते हैं। अपनी सीटिंग के दौरान मुश्किल सवालों या संदर्भों को साथ के ‘टू-डू’ नोटपैड पर नोट करें। अध्ययन के बाद अपनी समस्याओं को अपने मार्गदर्शक, अभिभावक या शिक्षक से मिलकर सुलझाएं।

’ ध्यानमग्न होकर पढ़ने के लिए 90-120 मिनट की अवधि पर्याप्त है। इससे अधिक लंबे समय तक लगातार एक समान कॉन्संट्रेशन मुश्किल है। वहीं इससे कम समय देने से ध्यानमग्न पढ़ाई का तुलनात्मक लाभ कम हो जाता है। एक सीटिंग में एक ही विषय को लें। एक से अधिक विषयों को एक ही सीटिंग में कवर करने में सब्जेक्ट करेक्टर यानी विषय चरित्र आपको उलझा सकता है। बेहतर है कि नई सीटिंग में नए मूड के साथ नए विषय, नए प्रश्न और नए उत्साह से पढ़ाई को शुरु करें।


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