Sunday, February 15, 2026
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बड़ी बरकतों वाला है रमजान मुबारक का महीना

  • पहला रोजा आज, रोजा रखने से होती है रूह की गंदगी दूर
  • माह रमज़ान की बरकतों से मस्जिदें हुई गुलजार
  • मुस्लिम इलाकों में हर तरफ छाई रौनक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रमजान का दिखा चांद दिखने से आज से रोजे की शुरुआत हो गई है। माह रमजान की आमद पर शहर की सभी छोटी-बड़ी मस्जिदों की साफ-सफाई कर दी गई है और मस्जिद की कमेटियों द्वारा बिजली पानी की व्यवस्था को भी निजी स्तर पर दुरुस्त करा दिया गया है। माह रमज़ान की बरकतों से शहर के मस्जिदें गुलजार हो गर्इं और मुस्लिम इलाकों में हर तरफ रौनक छा गई।

इस्लामी महीनों में नौवां महीना रमजान मुबारक का है, जिसमें हर मुसलमान पूरे महीने रोजे रखकर अल्लाह की इबादत और अपने गुनाहों की तौबा करता है। जो शख्स माह रमज़ान के रोजे रखता है उसके सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों से रमज़ान के रोज़े गर्मी के मौसम में आरहे हैं, लेकिन कड़ी गरमी में भी मुसलमान पूरे महीने रोज़े की पाबंदी करते हैं।

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उलेमा बताते हैं कि इस्लामी महीनों में अल्लाह ने रजब, शाबान, मौहर्रम और माह रमजान को पसंद फरमाया है और इन चारों महीनों में रमज़ान को खास किया है। मदरसा दारूल उलूम के उस्ताद मौलाना खुरशीद ने हदीस के हवाले से बताया कि जब रजब चांद नजर आता तो अल्लाह के रसूल सल. यह दुआ फरमाया करते हैं कि ऐ अल्लाह रजब और शाबान में हमें बरकत दे और हमें खैरियत के साथ रमज़ान तक पहुंचा। हजरत मौहम्मद ने शाबान की आखरी तारीख में लोगों को नसीहत दी कि ऐ लोगों तुम्हारे लिए एम महीना आरहा है जो बहुत बड़ा और मुबारक महीना है।

इसमें एक रात है जो हजारों महीनों से बेहतर है, अल्लाह ने इस महीने के रोज़े को फर्ज किया और उसकी रात के कयाम को सवाब एवं पुण्य बनाया। रमज़ान मुबारक का यह महीना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत एवं स्वर्ग है। यह महीना लोगों के साथ हमदर्दी करने का है, इस महीने में मोमिन का रिज्क बढ़ा दिया जाता है। जो शख्स रमज़ान के महीने में रोज़ेदार का रोज़ा इफ्तार कराएगा उसके सारे गुनाह माफ होजाएंगे और वे दोज़क नर्क से आजाद हो जाएगा।

रोज़ा इफ्तार कराने वाले को रोज़ेदार के बराबर सवाब मिलेगा। चाहे एक खजूर से इफ्तार करादे या एक घूंट पानी से। गोलाकुआं क्षेत्र की दरियागंज मस्जिद के ईमाम मौलाना जिब्राईल ने माह रमज़ान की अहमियत बताते हुए जानकारी दी कि माह रमज़ान के पहले 10 दिन रहमत के हैं, इसके बाद के 10 दिन मगफिरत के और आखिर के दस दिन नर्क से आजादी के हैं।

उन्होंने बताया कि इस महीने में जो शख्स अपने नौकर आदि के काम को हलका कर दे अल्ला ऐसे शख्स की मगफिरत कर देता है। इस महीने में खूब दुआएं मांगनी चाहिएं क्योंकि रोज़ेदार की दुआ अल्लाह रद नहीं करता। रमज़ान के महीने में झूठ बोलना, गाली देना, किसी पर तोहमद लगाना, किसी का दिल दुखाना, किसी का हक़ छीनना, धोखा देना, गाना सुन्ना बहुत बड़ा गुनाह है। मोमिन को इन सभी बुराइयों से बचना चाहिए। जबकि कुरान पढ़ना एवं उसकी तिलावत करना, हर वक्त अल्लाह का ज़िक्र करना, ज़कात देना, सदका खैरात करना, दूसरों के दुख दर्द में शामिल होना यह सब काम सवाब के हैं और अल्लाह इन सब काम करने वालों से राजी होता है।

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