- मेरठ मंडल के छह जिलों का काम होता है यहां
- दो हजार की फीस के बदले वसूली जाती है मोटी रकम
- दो लाख के करीब फर्म और सोसायटी है रजिस्टर्ड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय मेरठ में छह जिलों के फर्म व सोसायटियों से जुडेÞ काम होते है। लेकिन यहां पर बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। मिली जानकारी के अनुसार जिस सोसायटी-एनजीओ की रजिस्ट्रेशन फीस केवल दो हजार रूपये है उसके लिए 17 हजार तक वसूले जाते है। इसी तरह के आरोप व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल भी लगा चुके हैं।
मेरठ में न्यू मोहनपुरी स्थित डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बागपत, हापुड़ व बुलंदशहर जिलों की फर्म व सोसायटियों का रजिस्ट्रेशन से लेकर रिन्यूवल तक का काम होता है, लेकिन यहां पर काम कराना टेढ़ी खीर है, क्योंकि बिना रिश्वत के यहां कोई काम नहीं होता। बताया जा रहा है कि पहले ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन भी यहीं पर होते थे, लेकिन 2006 में ट्रस्टों के रजिस्ट्रेशन को यहां से अलग कर दिया गया।
क्या फर्क है फर्म और सोसायटी-एनजीओ में?
फर्म का रजिस्ट्रेशन बिजनेस के लिए होता है। जबकि सोसायटी-एनजीओ सामाजिक कार्यों के लिए होती है। हर पांच साल बाद सोसायटी-एनजीओ का रिन्यूवल होता है, जबकि फर्म का एक बार रजिस्ट्रेशन होने के बाद रिन्यूवल नहीं होता। सोसायटी-एनजीओ के रिन्यूवल की फीस एक हजार रुपये होती है।
आसानी से नहीं होता है रिन्यूवल
सोसाइटी-एनजीओ के रिन्यूवल से पहले उसके सभी कागजात पूरे करने पड़ते हैं। जिसमें सीए के द्वारा सत्यापित बैलेंस शीट से लेकर किए गए सभी कार्यों का ब्योरा होता है। जिस समय कोई अपनी सोसायटी का रिन्यूवल कराने आता है तो उसको रिश्वत देनी पड़ती है। नहीं देने पर उसकी फाइल को रोक दिया जाता है, और फिर चक्कर लगवाए जाते हैं। बाहरी जिलों से आनें वाले लोगों को इससे खासी परेशानी होती है।
जब वह थक जाते हैं तो उन्हें मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ती है। तब कहीं जाकर उनका काम होता है। इस खेल मेंं मोटी रिश्वत का आदन-प्रदान होता है, जबकि सरकार से एनजीओ चलानें के लिए अनुदान मिलता है। यह अनुदान सरकारी कामों में एनजीओ की मदद लेने के बदले दिया जाता है, लेकिन बड़ी संख्या में एनजीओ अनुदान तो पा लेते हैं मगर काम के नाम पर जमा किये गए कागजातों पर हमेशा संशय रहता है।
इसी भ्रष्टाचार के चलते पीएम मोदी ने कुछ समय पहले पूरे देश में एक लाख 30 हजार एनजीओ का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया था, लेकिन मेरठ में डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में यह सिलसिला लगातार जारी है। जिस पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है। इस मामले को लेकर डिप्टर रजिस्ट्रार मेरठ अरविंद कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने अपने आपको किसी जांच में व्यस्त होने की बात कही।

