जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और टर्निंग पॉइंट यूएसए (Turning Point USA) के संस्थापक चार्ली कर्क की बुधवार को गोली लगने से मौत हो गई। यह दुखद घटना यूटा वैली यूनिवर्सिटी में उस समय हुई जब कर्क एक कंजर्वेटिव छात्र सभा को संबोधित कर रहे थे।
चार्ली कर्क, जिनकी उम्र महज 31 वर्ष थी, बंदूक हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बोल रहे थे, जब अचानक पास की एक इमारत से गोली चली और उन्हें गर्दन में गंभीर रूप से घायल कर दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल को घेर लिया, लेकिन अस्पताल ले जाते समय ही उनकी मृत्यु हो गई।
ट्रंप ने जताया गहरा शोक
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट करते हुए चार्ली कर्क के निधन की पुष्टि की। उन्होंने लिखा “संयुक्त राज्य अमेरिका में युवाओं के दिल को चार्ली से बेहतर कोई नहीं समझ सकता था। सभी, खासकर मैं, उन्हें प्यार और सम्मान देता था। अब वह हमारे बीच नहीं हैं। मेलानिया और मेरी संवेदनाएं उनकी खूबसूरत पत्नी एरिका और परिवार के साथ हैं। चार्ली, हम तुमसे प्यार करते हैं!”
झंडे झुकेंगे, देश करेगा श्रद्धांजलि
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आदेश के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने चार्ली कर्क को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाने का निर्देश दिया है।
कैसे हुई घटना?
वैली यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया कि चार्ली कर्क कार्यक्रम की शुरुआत के 20 मिनट बाद ही बोल रहे थे, तभी पास की इमारत से गोली चलने की आवाज आई। कुछ ही पलों में चार्ली मंच पर गिर पड़े। वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि वह गोली लगने के बाद मंच पर ढह गए।
इस घटना की एफबीआई और स्थानीय पुलिस मिलकर जांच कर रही है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार यह पूर्व नियोजित हमला हो सकता है, हालांकि अभी तक किसी संदिग्ध की पहचान नहीं हुई है।
कौन थे चार्ली कर्क?
चार्ली कर्क अमेरिकी युवा राजनीति का एक चर्चित चेहरा थे। उन्होंने टर्निंग पॉइंट यूएसए की स्थापना कर कंजर्वेटिव विचारधारा को कॉलेज परिसरों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह अमेरिका के दक्षिणपंथी युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय थे और ट्रंप प्रशासन के एक भरोसेमंद सहयोगी माने जाते थे।
शोक की लहर
चार्ली कर्क की मौत से अमेरिका के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। कई रिपब्लिकन नेताओं और कंजर्वेटिव संगठनों ने इसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर हमला बताया है।

