- पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, प्रिंटर, माउस, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, पेनकार्ड, फर्जी आईडी कार्ड आदि बरामद किया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लिसाड़ीगेट पुलिस ने लोन कराने के नाम उसी करने वाले दोनों भाई रशीद नगर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फरार दो साथी अदनान आरिफ की तलाश में पुलिस टीम दबिश दे रही है। पुलिस के मुताबिक लिसाड़ीगेट व सर्विलांस टीम ने अंतर्राज्यीय गिरोह के दो सदस्य लिसाड़ीगेट रशीद नगर निवासी वसीम, मोहसिन को गिरफ्तार किया था। जबकि उसके दो साथी आरिफ, अदनान फरार हो गए। हजारों लोगों को लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये का चूना लगा चुके हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास लैपटॉप पिटर, माऊस, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, पेन कार्ड, फजी आईडी कार्ड, बड़े कंपनी लिफाके मोबाइल, कटर, मुहर, स्टॉप पेपर, पेन ड्राइवर बरामद की गई है। लिसाड़ीगेट थाने में चारों आरोपियों के उगी का केस दर्ज किया गया है। दो आरोपियों को जेल भेज दिया है। सीओ कोतवाली अमित राय का कहना है कि पूछताछ करने गहनता से पूछताछ की आरोपी वसीम ने बताया कि मोहसिन आरिफ व अदनान के साथ मिलकर बिहार और झारखण्ड में विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से फाइनेंस कंपनी के नाम से लोन के लिए विज्ञापन देते थे।
जिससे विज्ञापन देखकर लोग फोन करते थे। उन्ही लोगों में से बतौर कर्मचारी लोन एजेंट के पद पर ज्वाइंन कराकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने का प्रलोभन देते थे। इसी लालच में आकर कर्मचारी के पद पर आवेदन करने वाले से 10 से 15 हजार रुपये वसूलते थे। अब तक हजारों लोगों को फर्जी तरीके से बतौर एजेंट नियुक्त कर चुके हैं। लोन के लिए आवेदन करने वालों से फाइल प्रोसिसिंग शुल्क के नाम पर शुल्क वसूलते थे। उन लोगों की आईडी कार्ड व ज्वाइनिंग लेटर देते थे। जिसमें आवेदन करने वाले के नाम पता व मोबाइल नंबर एलईडी दर्ज होते थे। जबकि वास्तविकता में से किसी को भी लोन नहीं देते हैं।
गबन के आरोप में जांच कमेटी गठित
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्व विद्यालय के छात्रों ने स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों पर गबन का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी। छात्र नेता शशिकांत गौतम ने कर्मचारी राजेश पर अपना वेतन शासनादेशों के विपरीत गलत तरीके से 2011 में ग्रेड 28 के स्थान पर 42 सौ निर्धारित करा लिया था। इसी तरह सीएमओ कार्यालय पर तैनात रहे वरिष्ठ सहायक नीरज कुदेशिया ने भी यही खेल करते हुए अपना वेतन मान निर्धारित से अधिक करा लिया था। दोनों कर्मचारियों पर गलत तरीके से 12 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी, जिसके बाद डीएम ने दो सदस्यों की जांच कमेटी गठित कर दी है।

