- संजीव बालियान के भाजपा प्रत्याशी बनने से होगा कड़ा मुकाबला
- लगातार दो बार मुजफ्फरनगर सीट से सांसद हैं बालियान
- रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद संजीव बालियान को मिलेगी मजबूती
मिर्जा गुलजार बेग |
मुजफ्फरनगर: भाजपा हाईकमान द्वारा डा. संजीव बालियान को अपना प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हो गये हैं। इस सीट पर समाजवादी पार्टी द्वारा पहले से ही हरेन्द्र मलिक को अपना प्रत्याशी घोषित किया हुआ है। हरेन्द्र मलिक व डा. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर में बड़े नाम हैं। दोनों ही जाट समाज की धुरी माने जाते हैं। अब देखना यह होगा कि इस मुकाबले में जाट मतदाताओं को कौन अपने पक्ष में लामबंद करेगा।
बता दें कि मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर जाट मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में डा. संजीव बालियान ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर नये समीकरण बनाये थे और वह रिकॉर्ड तोड़ मतों से विजयश्री हासिल कर संसद पहुंचे थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी डा. संजीव बालियान ने मजबूती दिखाई थी और रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को पटकनी दी थी। चौधरी अजित सिंह की हार के बाद जाट मतदाताओं में धुव्रीकरण शुरू हो गया था।
किसान आंदोलन में भी जाट समाज के साथ-साथ किसानों ने भी भाजपा का विरोध शुरू कर दिया था। यही कारण रहा था कि विधानसभा चुनाव में भाजपा को जाट मतदाताओं का विरोध झेलना पड़ा था। हालांकि डा. संजीव बालियान ने भाजपा प्रत्याशियों को जितवाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया था, जिसके परिणाम स्वरूप मुजफ्फरनगर की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर विपक्ष का कब्जा हो गया था।
मुजफ्फरनगर में विपक्ष के बढ़ते जनाधार को रोकने के लिए भाजपा ने जयंत चौधरी पर डोरे डालने शुरू कर दिये थे और वह मौके की तलाश में थे। मौका उस समय मिला, जब मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर टिकट को लेकर रालोद की सपा से बात बिगड़ गयी। भाजपा ने तुरन्त जयंत चौधरी को अपने पाले में ले लिया और एनडीए में शामिल कर लिया। रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद संजीव बालियान का मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से टिकट काटे जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था, परन्तु आज उन सभी चर्चाओं पर विराम लग गया और डा. संजीव बालियान को भाजपा द्वारा अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है।
आसान नहीं होगा संजीव बालियान का रास्ता
डा. संजीव बालियान जिस तरह से वेस्ट यूपी में बड़े जाट नेता बनकर उभरे हैं, उससे लोग कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार वह लोकसभा चुनाव में अपनी हैट्रिक लगायेंगे, परन्तु संजीव बालियान के लिए यह 2014 के जितना आसान नहीं होगा। इस बार जहां फिर से मोदी लहर है, वहीं डा. संजीव बालियान का विरोध भी हो रहा है।
2019 के लोकसभा चुनाव में जिस सरधना विधानसभा ने डा. संजीव बालियान को जीत का स्वाद चखाया था, अब उसी सरधना विधानासभा में ठाकुर मतदाताओं द्वारा डा. संजीव बालियान का विरोध किया जा रहा है, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी ओर सपा द्वारा हरेन्द्र मलिक जैसे मजबूत जाट नेता को अपना प्रत्याशी बनाकर संजीव बालियान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि यदि जाट मतदाताओं में धुव्रीकरण हो गया, तो डा. संजीव बालियान की मुश्किलें बढ़
सकती हैं।

