- 65 बेड है इमरजेंसी में, जिनमें से 41 पर वैक्यूम सिस्टम लगा, जबकि 24 नार्मल
- ट्रामा सेंटर में इस समय 20 बेड, जिनमें वैक्यूम सिस्टम लगा, लेकिन चलता नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल की इमरजेंसी में लगा वैक्यूम सिस्टम पिछले छह महीनों से बंद है। चार मेनुअल मशीन इमरजेंसी में है। जबकि दो ट्रामा सेंटर में है। ऐसे में गंभीर मरीजों को वैक्यूम की जरूरत पड़ने पर मेनुअल मशीनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
साथ ही यहां स्टाफ की भी भारी कमी है। जिसके चलते मेनुअल मशीनों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में परेशानी होती है। इसको लेकर कई बार मेडिकल प्रशासन से लिखित में शिकायत की गई है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
ऐसे मरीजों को पड़ती है वैक्यूम सिस्टम की जरूरत
जिन मरीजों को हेड इंजरी होती है, एक्सीडेंट केस, जहर खाने के मामलों व सांस लेने में परेशानी होने वाले मरीजों को वैक्यूम सिस्टम की जरूरत पड़ती है। इन मरीजों के शरीर के भीतरी भागों में जमे खून, कफ की शिकायत होने पर उसे बाहर निकालने के लिए व जहर खाने वाले मरीजों के शरीर से जहर बाहर निकालने के लिए वैक्यूम की जरूरत होती है, लेकिन बेडों पर लगा सिस्टम पिछले छह माह से बंद हैं। ऐसे में केवल मेनुअल मशीनों का ही सहारा है। जिसके लिए जरूरी स्टाफ भी उपलब्ध नहीं है।
रात में आते हैं ज्यादातर केस
इमरजेंसी में ज्यादातर केस रात के समय आते हैं, साथ ही दूसरे जिलों से रेफर किए गए मरीजों को भी लाया जाता है, लेकिन गंभीर मरीजों को अचानक वैक्यूम देने के लिए रात के समय स्टाफ नाकाफी रहता है। ऐसे में किसी तरह मौके पर मौजूद स्टाफ मामलों को संभालता है।

कुल 12 नर्से है, इमरजेंसी में। जिनमेें 6 स्टाफ नर्स व 6 डिगनस कंपनी की संविदा कर्मी है। इन्हीं नर्सों से 24 घंटे काम लिया जा रहा है। साथ ही छुट्टियों पर भी स्टाफ रहता है तो हालात गंंभीर हो जाते हैं। वहीं, ट्रामा सेंटर में भी कुल 14 नर्स है। जबकि वहां पर बेडों की संख्या 20 है। इन बेडों पर गंभीर मरीजों को रखा जाता है, सभी बेडों पर वेंटीलेटर लगा है। ऐसे में एक नर्स की तैनाती हर समय एक बेड पर होनी चाहिए, लेकिन कम स्टाफ होने की वजह से मामला नाजुक रहता है।
वैक्यूम सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं। इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। अगर ऐसा है तो वह इनको जल्दी ही चालू कराएंगे। स्टाफ की भी कोई कमी नहीं है।
-आरसी गुप्ता, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज

