जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आज मंगलवार को लोकसभा में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऑपरेशन सिंदूर पर बोलना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में बोलते हुए भारतीय सेना के पराक्रम की तारीफ की और उन्होंने भारतीय सेना का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी फौज पर गर्व है। जब सेना ने ऑपरेशन शुरू किया तो पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया। न सिर्फ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया और पाकिस्तानी एयरबेस को भी ध्वस्त किया। उस दौरान मीडिया चैनल देखकर लगा कि कराची हमारा हो गया है और लाहौर हमारा हो गया है।
ऐसा लग रहा था कि पीओके हमारा हो जाएगा। हालांकि सरकार के इंजन मुझे टकराते दिखते हैं, लेकिन पीओके मामले में सभी इंजन एक दिखते हैं। क्या कारण था कि सरकार पीछे हट गई। हमें उम्मीद थी कि सरकार सीजफायर का एलान करेगी, लेकिन इनकी दोस्ती बहुत गहरी है कि इन्होंने अपने मित्र से कहा कि आप ही सीजफायर का एलान कर दीजिए।
इस सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सत्ता पक्ष के लोगों को मैंने सुना, ये लोग उत्तेजित भाषा में बोल रहे थे। लेकिन ये लोग जनता की उत्तेजना का फायदा उठाते हैं। पहलगाम हमले के वक्त पर्यटक पूछ रहे थे और हम सभी के मन में सवाल था कि पहलगाम में कोई सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं था? जो लोग पहलगाम गए, वो सरकार के भरोसे पर आश्वासन पर गए थे। इस सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा? हालांकि पूरा देश जानता है कि किसी ये जिम्मेदारी है।
हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाले लोग सीमाएं सुरक्षित रखते हैं, लेकिन सरकार को जनता को ये बताना चाहिए कि हमारे भारत का क्षेत्रफल क्या है। जो सवाल पर्यटक पूछ रहे थे कि कुछ लोगों को चाकचौबंद सुरक्षा दी जाती है, जो बाद में ठग साबित होते हैं, लेकिन पहलगाम की रक्षा क्यों नहीं की गई?
सरकार पर कसा तंज
गृह मंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले को खुफिया विभाग की चूक माना, लेकिन सरकार को ये बताना चाहिए कि ये चूक क्यों हुई? ये सरकार की विफलता है। सांसदों ने कई बार ये सवाल पूछा कि संघर्षविराम किसके कहने पर रोका गया। एक तरफ आजादी का ढिंढोरा पीटा जा रहा है और दूसरी तरफ हमारी संप्रभुता पर हमला हो रहा है। समाजवादी सरकारों ने हमेशा बताया है कि असली चुनौती कहां से मिल रही है। हमारी सीमाओं का अतिक्रमण हो रहा है।
पाकिस्तान के पीछे कौन है? हमें चीन से बड़ा खतरा है। सरकार को आर्थिक नीतियों को मजबूत करने पर फोकस करना चाहिए। आर्थिक मामलों में सरकार पूरी तरह से फेल हो रही है। भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। सरकार को अपनी राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक नीतियों पर जरूर पुनरीक्षण करना जरूरी है। पाकिस्तान की सीमा से आतंकवाद का खतरा रहता ही है, लेकिन दूसरी सीमाओं से भी लगातार खतरा है।
राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान राजनाथ सिंह ने बताया कि ‘ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकी वही हैं, जिन्होंने पहलगाम में आतंकी हमला किया। फोरेंसिक जांच से भी पुष्टि हो गई है कि ये तीनों वही आतंकी हैं। ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ हमारी नीति का प्रभावी प्रदर्शन था। 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। आतंकियों ने लोगों का धर्म पूछकर लोगों को मारा। सीमापार से आतंकवाद के जरिए भारत को तोड़ने की लगातार कोशिश हो रही।
इसके बाद पीएम मोदी ने तीनों सेनाओँ के प्रमुखों के साथ बैठक की और उन्हें भारत के निर्णायक जवाब की पूरी छूट दी ताकि आतंक के आकाओं को स्पष्ट संदेश चला जाए कि भारत कठोर कार्रवाई करेगा और हर उस हद तक जाएगा, जो जरूरी होगा। ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने से पहले हमारी सेनाओं हर पहलू पर गहराई से अध्ययन किया। जिसमें आतंकियों को निशाना बनाया जाए और आम नागरिकों को कोई नुकसान न होने पाए। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए हैं।’
आगे क्या बोले अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि ‘जिस तरह से हमारी सेना ने मुकाबला किया है। सरकार को ये भी स्वीकार करना होगा कि सीजफायर के बाद भी ड्रोन आ रहे थे। सीजफायर किसके दबाव में किया गया। सीजफायर का एलान सरकार की तरफ से नहीं आया था। सोशल मीडिया से आया था। हमारे देश का क्षेत्रफल 2014 में कितना था और आज कितना है, ये देश को बताया जाना चाहिए। हमारे देश को पाकिस्तान से तो खतरा है ही, लेकिन असली खतरा चीन से है और हमारी चीन से मुकाबले की क्या तैयारी है।’

