Home Uttar Pradesh News Meerut पोल खुली तो ज्वाइंट डिपो पर बंद कर दिये दरवाजे

पोल खुली तो ज्वाइंट डिपो पर बंद कर दिये दरवाजे

0
पोल खुली तो ज्वाइंट डिपो पर बंद कर दिये दरवाजे
  • साढ़े चार करोड़ के डंपर की खरीद में हुआ घोटाला
  • अब मामले की लीपापोती में जुटे नगर निगम अधिकारी
  • चौकीदारों से किया जवाब तलब, कर्मचारियों पर सख्ती
  • अब बनाया एंट्री रजिस्टर, सिर्फ कर्मचारी ही जा सकेंगे
  • खौफ: ज्वाइंट डिपो के गेट पर ही बनवा दिया गया एंट्री रजिस्टर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अपनी करोड़ों रुपये की लूट का पर्दाफाश हुआ तो अब अधिकारी खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। पोल खुलने के बाद नगर निगम के ज्वाइंट डिपो के दरवाजे बंद कर दिये गये हैं तथा सभी का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। जनवाणी में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी होने के बाद अधिकारियों ने चौकीदारों से जवाब तलब किया है। बाकी कर्मचारियों पर भी सख्ती कर दी गई है। ज्वाइंट डिपो पर एंट्री रजिस्टर बना दिया गया है। अधिकारी अब मामले की लीपापोती में जुटे हैं।

घोटाले का पर्याय बन चुके नगर निगम में इन दिनों महालूट का धंधा चल रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ एक ओर भ्रष्टाचारियों को उखाड़ फेंकने के लिए सख्ती कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम में अधिकारी खुलेआम लूट के धंधे में लगे हैं। और यह हालात तो तब हैं जब नगर निगम में महापौर भी खुद भाजपा के कोटे से हैं। जनवाणी ने अपने आठ मार्च के अंक में वाहन खरीद के घोटाले का विस्तार से जिक्र किया है कि किस तरह अशोक लीलैंड के डंपरों के स्थान पर महेन्द्रा के 10 डंपरों की चोरी छिपे सप्लाई ले ली गई है।

07 8

फिर जब पोल खुली तो इन सभी डंपरों को दिल्ली रोड डिपो के सरस्वती लोक स्थित ज्वाइंट डिपो में खड़ा करने के लिए भेज दिया गया। साफ साबित है कि अधिकारियों ने खुद इस महालूट को छुपाने के लिए पूरा कुचक्र रचा है और ठेकेदार को कसूरवार ठहराकर यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि वह पाक साफ हैं। जबकि हकीकत में इस खरीद से जुड़े, वर्क आॅर्डर रिलीज करने वाले तथा भौतिक सत्यापन करने वाले सभी अधिकारी इसमें पूरी तरह शामिल हैं। फिर जब नीचे से लेकर उपर तक लंका में सब 52 गज के हों, तो खुद ही सोचा जा सकता है कि इस घोटाले की परत दर परत किनी तह हैं।

नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग में घोटाला करने के लिए अधिकारियों ने पूरे पांच महीने पहले से जो व्यूह रचना रची थी। उसे अंजाम तक पहुंचाने के बाद अब तो बस लीपापोती का खेल चल रहा है। सब शांति से निपट भी जाता, लेकिन इस पूरे महाघोटाले का विस्तार से जिक्र होने के बाद अब नगर निगम के अधिकारी बचाव की मुद्रा में आ गये हैं। नगर निगम के सरस्वती लोक के ज्वाइंट डिपो में जहां जनवाणी ने चोरी से खड़े किये गये डंपरों की बाकायदा पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की है। गोपनीय तरीके से इस ज्वाइंट डिपो के भीतर फोटोग्राफी होने के बाद नगर निगम के अधिकारी बौखला गये हैं।

शुक्रवार को महाशिवरात्रि का अवकाश होने के बावजूद सरस्वती लोक के ज्वाइंट डिपो पर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग के अधिकाारी सवेरे ही पहुंचे तथा वहां तैनात दोनों चौकीदारों को आड़े हाथों लेते हुए धमकाया कि कैसे कैमरामैन को अंदर जाने दिया गया। अधिकारियों ने गेट को पूरी तरह से बंद रखने के निर्देश दिये हैं तथा गेट पर ही एक एंट्री रजिस्टर बनवा दिया है। जिसमें डिपो के अंदर जाने वाली गाड़ी तथा

06 10

उसे लाने वाले कर्मचारी का बाकायदा नाम लिखा जा रहा है। इसी तरह डिपो से बाहर जाने पर भी इसी रजिस्टर में इस वाहन तथा ले जाने वाले कर्मचारी के नाम का उल्लेख करने की हिदायत दी गई है। अधिकारियों ने चौकीदारों को साफ हिदायत दी है कि अंदर सिर्फ वही चालक जायेगा, जो ट्रक या अन्य वाहन का चालक है। हैल्पर को बाहर ही खड़ा रहना होगा।

1992 में भी नयी की कीमत में खरीदी थी पुरानी अम्बेसडकर कार

नगर निगम में खरीद के विपरीत सामान खरीदने का यह पहला मामला नहीं हैं। इससे पूर्व भी इसी तरह का घोटाला सामने आया था। वर्ष-1992 में जब स्व.अय्यूब अंसारी मेयर बने थे। तब उनकी सरकारी गाड़ी को फूंक दिया गया था। स्व.अय्यूब अंसारी सादगी की मिसाल थे। वह गोला कुंआ स्थित अपने निवास से पैदल ही हापुड़ अड्डे आकर वहां से रिक्शा में बैठकर नगर निगम पहुंचते थे।

बाद में उस समय नगर निगम मेरठ में ही तैनात अधिकारियों ने भी मेयर के सादगी की आड़ लेते हुए नई अम्बेसडकर कार खरीदने का आॅर्डर पास करा लिया तथा नई अम्बेसडकर के स्थान पर दो पुरानी अम्बेसडकर कारों की आपूर्ति ले ली गई थी। उस समय पुरानी गाड़ियां खरीदने के मुद्दे पर काफी हो हल्ला मचा था, लेकिन स्व.अय्यूब अंसारी ने खुद ही खामोशी अख्त्यिार कर ली। इससे नई अम्बेसडकर कार की कीमत में पुरानी अम्बेसडकर कार खरीदने वाले अधिकारी पाक साफ बच गये।

09 9

एआईएमआईएम पार्षदों ने कमिश्नर को शिकायती पत्र सौंपा

अशोक लीलैंड के स्थान पर महेन्द्रा के डंपर खरीद के मामले का पर्दाफाश होने के बाद अब इस मामले में एआईएमआईएम (आॅल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुसलिमीन) के पार्षद एकजुट हो गये हैं। एआईएमआईएम के पार्षद फजल करीम ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट के साथ मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. को लिखित में इसकी शिकायत की है। पार्षद फजल करीम का कहना है कि जब साढ़े चार करोड़ रुपये की खरीद का निगम से प्रस्ताव पास हुआ है। फिर दूसरी कंपनी के डंपरों की सप्लाई क्यों ली गई है?

इसमें साफ नजर आ रहा है कि घोटाला बड़े स्तर पर किया गया है। अपनी खून पसीने की कमाई से हाउस टैक्स व वाटर टैक्स देने वाली जनता के हितों के साथ यह कुठाराघात है। इतनी बड़ी रकम के डंपर खुले में धूल फांक रहे हैं। अगर वह गलत आ गये थे, तो उनको चोरी छिपे क्यों खड़ा कर लिया गया है? हम इन डंपरों को वापिस कराकर सही डंपरों की आपूर्ति होने तक चुप नहीं बैठेंगे।