Thursday, February 12, 2026
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राहुल के बयानों पर हंगामा क्यों

Samvad 51

62राहुल गांधी विदेश जाएं और वहां उनकी कही गई बातों पर भाजपा तीखी प्रतिक्रिया न दे, ऐसा आज तक नहीं हुआ। अमेरिका की उनकी हालिया यात्रा भी अपवाद नहीं रही। जब कोई नेता विदेश जाएगा और वो भी नेता प्रतिपक्ष तो क्या उससे वहां के मौसम के बारे में पूछा जाएगा? क्या वहां के खान पान पर प्रतिक्रिया ली जाएगी? क्या पिज्जा बर्गर पर बात की जाएगी? राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं, विदेश में उनसे राजनीति वाले सवाल ही पूछे जाएंगे। अमेरिका में भी यही हो रहा है। भारत सरकार के बारे में, भारत के हालात के बारे में कुछ बोलना कैसे देश विरोधी हो सकता है। राहुल गांधी जो कुछ विदेश में कह रहे हैं, वह अपने देश में भी कह चुके हैं। संसद में कह चुके हैं। ये अलग बात है कि सदन में उनका माइक बंद कर दिया जाता है। इस वक्त बीजेपी नेताओं में होड़ लगी है कि कौन राहुल गांधी के बयानों की ज्यादा आलोचना करता है? कौन उनके बयानों को देशविरोधी साबित करता है। सवाल यह है कि अगर राहुल गांधी का विदेश में देश के बारे बोलना गलत है, तो प्रधानमंत्री का कैसे सही है? प्रधानमंत्री ने जो कुछ विदेश में जाकर देश के बारे में कहा है, क्या वह सही था?

प्र्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो तब से ही विदेश में भारत सरकार की आलोचना करते आ रहे हैं, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। बतौर मुख्यमंत्री 2013 में उन्होंने भारतीय मूल के अमेरिकियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा था-भारत में कमजोर नेताओं की सरकार है। उन्होंने तत्कालीन यूपीए की सरकार पर ‘भ्रष्टाचार’ का आरोप लगाते हुए कहा था कि ‘सरकार के प्रति लोगों का भरोसा और विश्वास’ खत्म हो चुका है। 2015 में बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के अपने दौरे में टोरंटो में कहा था-पहले भारत ‘स्कैम इंडिया’ था अब ‘स्किल इंडिया’ बन गया है। 16 मई 2015 को शंघाई में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा-था एक साल पहले तक जिनको शर्म आती थी, अब वो खुद को भारतीय कहने में गर्व महसूस करते हैं। मई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी के बर्लिन में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कह चुके हैं-2014 से पहले भारत ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ था लेकिन पिछले आठ सालों में भारत ने विकास की लंबी छलांग लगानी शुरू कर दी है। दक्षिण कोरिया के सियोल में वह कह चुके हैं-पहले मुझे और तमाम लोगों को शर्म आती थी कि कैसा देश है, यह जहां हम पैदा हो गए। जरूर पिछले जन्म में कोई पाप किए होंगे, लेकिन अब हमें गर्व है। घर में शादी है, पैसे नहीं है, यह किसने कहा था और कहां कहा था, ये तो आपको पता ही होगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में हाउडी मोदी कार्यक्रम में भाषण के दौरान अबकी बार, ट्रम्प सरकार कहा था। क्या प्रधानमंत्री को यह शोभा देता है कि वह दूसरे के चुनाव में दखल दें? क्या विदेश में इस तरह के बयान देना देश का अपमान नहीं हैं?

अगर राहुल गांधी ने यह कहा कि चीन विशाल उत्पादक देश है, भारत ऐसा नहीं कर सका तो क्या गलत कह दिया। चीन पर आज लगभग पूरी दुनिया आश्रित है। इतना सस्ता सामान कोई देश नहीं दे सकता, जितना चीन दे रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर कह चुके हैं कि चीन बड़ी ताकत है, हम उससे नहीं लड़ सकते। क्या हम चीन से कमजोर हैं? पूरा बाजार आज चाइना माल से अटा पड़ा है। कोई उत्पाद ऐसा नहीं, जिन्हें बनाने के लिए चीन से जरूरी चीजें आयात न की जाती हों। दवाओं के साल्ट तक पर हम चीन पर निर्भर हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों से भारतीय बाजार अटे पड़े हैं। राहुल गांधी का यह कहना भी गलत नहीं है कि भारत में युवाओं के पास स्किल है, लेकिन हम उन्हें काम नहीं दे पाते। राहुल गांधी ने यह भी गलत नहीं कहा कि वह इस साल हुए लोकसभा चुनावों को स्वतंत्र चुनाव की तरह नहीं देखते हैं, बल्कि इसे बेहद नियंत्रित चुनाव की तरह देखते हैं। राहुल के यह कहने के संदर्भ में एडीआर की वह रिपोर्ट याद की जा सकती है, जिसमें कहा गया है कि लोकसभा की बहुत सीटें ऐसी हैं, जिनमें डाले गए वोटों से ज्यादा वोट गिने गए या फिर डाले गए वोटों से कम वोट गिने गए। एडीआर की रिपोर्ट को भले ही नकार दिया गया है, लेकिन उनकी रिसर्च को नहीं नकारा जा सकता।

राहुल गांधी लगातार कहते रहे हैं कि हमारी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया गया है। शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस ने कब्जा कर लिया है। मीडिया पर कब्जा है, जांच एजेंसियों पर कब्जा है। हम ये कह तो रहे थे, लेकिन लोगों तक पहुंच नहीं रहा था। बार बार दोहराने के बावजूद हमारी बात लोगों तक पहुंच नहीं रही थी। हमें भी इसकी वजह समझ नहीं आ रही थी। क्योंकि हमें ये साफ होता दिख रहा था, दिख तो उन्हें भी रहा था साफ साफ। लेकिन कुछ था जिसकी कमी थी। और फिर एक बैठक में हमारे एक साथी ने सुझाव दिया कि एक काम करते हैं कि संविधान की बात करते हैं। मैं चुनाव देख रहा था…चुनावों में एक ऐसा वक्त भी आया जहां हम अपने कोषाध्यक्ष के साथ बैठे थे और वो हमें कह रहे थे कि हमारे बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए गए हैं। अगर हमारे बैंक अकाउंट ही बंद कर दिए गए तो आखिर हम कैसे चुनाव लड़ सकते हैं। हमें तब लगा कि बस अब कुछ नहीं हो सकता। हमारे पास उस वक्त सच में कोई जवाब नहीं था। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने उसके बावजूद चुनाव लड़ा। बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए थे, उस परिस्थिति में भी लड़ा और हमने मोदी नाम के विचार को ध्वस्त कर दिया। वे मनोवैज्ञानिक स्तर पर फंस गए हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं, विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि ये कैसे हो गया। बताएं इसमें राहुल गांधी ने क्या गलत कह दिया, जो उन्हें देशद्रोही कहा जा रहा है।

राहुल गांधी जी ने अमेरिका में पत्रकारों से संवाद करते हुए कहा, भारत में जब वास्तव में सभी लोगों को बराबर का अधिकार और हिस्सेदारी मिलेगी तब आरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और इसे खत्म कर दिया जाएगा। बताइए इसमें क्या गलत है? लेकिन भाजपा के सारे नेता एक साथ मिल कर देश भर में झूठ फैलाने में जुट गए कि राहुल गांधी ने आरक्षण खत्म कर देंगे बोला। इस देश में झूठ ऐसा फैलता है की आम जनमानस इसमें यकीन कर फंस जाता है।

क्या ये सच नहीं कि चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को जेलो में बंद किया गया? दो सीटिंग मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया? कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज किए गए! जैसे राहुल गांधी विदेश में अलग अलग मंचों से पूछे गए सवालों का जवाब देते हैं, ऐसा कभी मोदी जी को करते नहीं देखा। देश हो या विदेश राहुल गांधी प्रेस कांफ्रेंस से नहीं भागते। सवालों का सामना करते हैं। मोदी को कभी इस तरह प्रेस कांफ्रेंस करते नहीं देखा। विदेश में भी मोदी संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस का हिस्सा नहीं बनते। ऐसा क्यों है?

अमेरिका में बोलते हुए राहुल को दुनिया देख रही है। मोदी को दुनिया ने इस तरह बोलते नहीं देखा, जैसे राहुल गांधी को बोलता देख रहे हैं। मोदी विदेशों में भीड़ जुटा कर ये साबित करने की कोशिश करते हैं कि मोदी का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। राहुल क्यों नहीं इस ढोल की पोल खोलें? दुनिया को पता चल रहा है कि भारत में सिर्फ मोदी ही नहीं हैं, एक विपक्ष भी है और उसका नेता राहुल गांधी है।

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